बस्ती। जिला धीरे-धीरे ठगबाजों के लिए स्वर्ग साबित होता जा रहा है, जो चाह रहा है, साजिश करके जमीन के नाम पर ठग ले रहा है, कोई पांच करोड़ ठग रहा है, तो कोई 27 लाख पर हाथ फेर दे रहा है। मीडिया के द्वारा बार-बार जागरुक करने के बाद भी लोग ठगी का शिकार होते जा रहे है। कोई लालच में तो कोई आवष्यकता में पड़कर ठगी का षिकार हो रहा है। ठगबाजों का गिरोह इतना षातिर और चालाक होता है, कि खरीदार को जरा भी यह एहसास नहीं होने देता कि वह ठगी के षिकार होने वाले है। शहर से ग्रामीण तक ठगबाजों का जाल फैला हुआ है। अब तो गांव का हर दूसरा और तीसरा व्यक्ति प्रापर्टी डीलर हो गया। विपिन शुक्ल के बाद एक और चौकाने वाला ठगी का मामला सामने आया। कोई सोच भी नहीं सकता कि ठगबाज उस दादा के नाम फर्जी आधार कार्ड बनवा सकता है, जिसे मरे हुए 40 साल हो गए। मृतक दादा का पोता बनकर 26 लाख 50 हजार का चेक लिया, चेक मिलते ही चार ठगबाज ऐश करने लगें। फर्जी दादा बनकर पंजीकृत अनुबंध भी कर दिया। लेकिन जब जमीन लिखाने की बारी आई तो सभी फरार हो गए, ठगी का शिकार हुए मो. यासीन ने जब हकीकत जानने के लिए उस गांव गए, जहां पर उसे जमीन बेचने को कहा गया, पता चला कि जिस माता प्रसाद के नाम पर पंजीकृत अनुबंध हुआ, और जो जमीन का बैनामा करने वाले थे, उनका स्वर्गवास हुए 40 साल हो गया। इतना ही जब चारों से पैसा मांगा तो सौ रुपये के स्टांप पर लिखकर दिया कि तीन माह में पैसा वापस कर देगें, तीन माह बीतने के बाद भी जब पैसा वापस नहीं किया तो चार में से दो लोगों ने दो-दो चेक दिया, हाकिम ने 13.50 लाख का दो चेक दिया और सुशील गिरी ने 12 लाख का दो चेक पहली अप्रैल 25 को दिया, जब चारों चेक बैंक में डाला गया तो चारों डिस्आनर हो गया, ठगी का शिकार व्यक्ति कप्तानगंज थाने भी एफआईआर दर्ज करवाने गया, लेकिन पुलिस ने दबाव में आकर दर्ज ही नहीं किया, अंत में पीड़ित व्यक्ति ने सीजेएम कोर्ट का सहारा लिया, जहां पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश हुआ। कहा जाता है, सबकुछ फर्जी बन सकता है, लेकिन आधार कार्ड नहीं बन सकता, लेकिन यहां पर तो चार ठगबाजों ने 40 साल पहले मर चुके व्यक्ति के नाम फर्जी आधार कार्ड भी बनवा लिया। आखिर ऐसे चालाक ठगबाजों से बचे तो कैसे बचा जाए?

दर्ज एफआईआर के अनुसार थाना कप्तानंगज के मटिहनिया निवासी मो. यासीन पुत्र ष्षेर अली को खेतीबारी के लिए जमीन की आवष्यकता थी, इसी को लेकर उन्होंने कई लोगों से जिक्र भी किया था। इसी बीच हाकिम पुत्र मोतीराम बरहना, इंद्रेश पुत्र रामजी कौड़ीकोल, सुशील गिरी पुत्र राम अजोर महुआरी एवं अमन पांडेय पुत्र लक्ष्मी नरायन निवासी नरायनपुर थाना नगर मिले। इन लोगों ने बताया कि माता प्रसाद पुत्र गोपाल निवासी बघौड़ी थाना कलवारी जमीन बेचना चाहते। सौदा 27 लाख में तय हुआ, खासबात यह है, कि चारों ने कभी माता प्रसाद से यासीन को नहीं मिलवाया। चूंकि 50 हजार कम था, इस लिए पहली फरवरी 24 को रजिस्टी कार्यालय में माता प्रसाद बने अमन पांडेय ने पंजीकृत अनुबंध कर दिया। चेक भी उसी समय दे दिया। जब 50 हजार का इंतजाम हो गया, जमीन का बैनामा करने को कहा गया, टाल मटोल करते रहे। इसी बीच जब यासीन को पता चला कि माता प्रसाद की मृत्यु तो 40 साल पहले हो चुकी है, तो उन्हें लगा कि वह ठगी का शिकार हो चुके है। पैसा मांगा तो चेक दिया, लेकिन चेक डिस्आनर हो गया। कहने का मतलब 27 लाख से भी गए, और जमीन से भी। जब भी इस तरह की ठगी होती है, गिरोह बनाकर होती है। बहरहाल, कब तक विपिन शुक्ल और मो. यासीन जैसे लोग ठगी का शिकार होते रहेगें, कहा नहीं जाकर सकता, जमीन न देखकर जो गलती शुक्लजी ने किया वही गलती यासीन ने भी किया।