बस्ती। जब पांच-छह साल में राम मंदिर का निर्माण हो सकता है, तो 20 साल में ब्राहृमण महासभा का मंदिर क्यों नहीं बन सकता? जबकि धन की कोई कमी नहीं। इस सवाल का हर वह व्यक्ति जबाव जानना चाहता है, जिसने या तो चंदा दिया, या फिर किसी अन्य रुप में निर्माण में योगदान दिया। राम मंदिर की तरह इस मंदिर से भी लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। न जाने क्यों लोगों को आस्था के साथ खिलवाड़ करने का शोक पैदा हो गया। कोई भी लूटपाट करिए लेकिन मंदिर को तो छोड़ दीजिए। महासभा का मंदिर निर्माण न होने को लेकर हर कोई क्रोधित और व्यथित हैं, और कह रहे हैं, कि जब तक महामंत्री शम्भूनाथ मिश्र रहेगें मंदिर का निर्माण नहीं हो सकता हैं, लोग तो इन्हें दूसरा चंपत राय की तरह मान रहे है, और कह रहे हैं, कि यह क्यों नहीं चंदें का हिसाब-किताब दे रहे हैं? और क्यों नहीं बैठक बुलाते? क्यों यह कोषाध्यक्ष बने हुए हैं? जब कि यह महामंत्री और इनका काम बैठक बुलाना और अन्य व्यवस्था करना है? चंदे का हिसाब-किताब न देने का मामला सम्मान समारोह के बाद उठा, खुद राष्टीय अध्यक्ष ने इसे गंभीर मानते हुए हिसाब-किताब मांगा है। चंदें की धनराधि में हुई कथित गड़बड़ी का मामला खुद राष्टीय उपाध्यक्ष राधेष्याम पांडेय ने उठाते हुए कहा कि दो हजार से अधिक चंदा देने वालों ने एक करोड़ से अधिक दिया चंदा दिया, वहीं पांच सौ से उपर देने वालों की गिनती ही नहीं, कहा कि उन्होंने खुद पांच लाख दिया, राष्टीय अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ल तो अपनी जेब से अब तक 32-33 लाख खर्च कर चुके हैं, विपिन शुक्ल ने 11 लाख दिया, सभी ब्राहृमण ब्लाक प्रमुखों ने डेढ़-डेढ़ लाख दिया। अनेक कथा वाचकों ने चंदा किया। 72 हजार ईंट, 1100 बोरी सीमेंट, बाबू, मोरंग और दो हजार क्ंिवटल से अधिक सरिया फ्री में आया। एक करोड़ से अधिक तो गुप्त दान के रुप में कैश चंदा आया। कहा कि महासभा के महामंत्री बनने के बाद से इन्होंने अकूत संपत्ति अर्जित किया, कटेष्वरपार्क के पास इन्होंने आठ-नौ बिस्वा में मकान बनवाया, बेटी को एमबीबीएस करवाया। गाड़ी घोढ़ा खरीदा। इसकी जांच होनी आवष्यक हैं, जांच हो गई तो चंपत राय की तरह उतना बड़ा तो नहीं लेकिन छोटा भी घोटाला नहीं निकलेगा। कहते हैं, कि मैं खुद मीडिया को इनके घोटाले को उजागर करने वाला हूं। सवाल करते हैं, कि जब ‘रा’ मैटेरिएल दान में आया तो मजदूरी में कितना लगा होगा? कहते हैं, कि मंदिर की रखवाली पर अब तक 48 लाख से अधिक खर्च हो गए, 20 हजार हर माह दिया जा रहा है। यह भी नहीं कि मंदिर का निर्माण करने में कोई अड़चन आ रही हो, या फिर कोई जमीनी विवाद हो, जब कोई अड़चन नहीं धन की कमी हैं, दानपीरों की कमी नहीं तो फिर क्यों नहीं 20 सालों में मंदिर का निर्माण हो सका, कहते हैं, कि अगर निर्माण हो गया, तो दुकानदारी बंद हो जाएगी। कहा कि इस मामले में अभी तक बैठक तक नहीं बुलाई गई। कहते हैं, कि महामंत्रीजी ब्राहृमण महासभा को मूर्ख बना रहे हैं, कार्रवाई नहीं हुई तो जल्द ही महासभा के बार धरने पर बैठूंगा, तब बताउंगा कि महासभा को कौन कौन लोग हड़पना चाहते, जिनका इतिहास ही कब्जा करने का रहा। षर्म भी नहीं आती, चोरों की तरह भाग रहे है। महामंत्री शंभूनाथ मिश्र से उनके मोबाइल 9415711919 पर पक्ष लेने का प्रयास किया लेकिन रिस्पांस नहीं मिला, रिस्पांस मिलने पर पक्ष लिख दिया जाएगा। वैसे यह एक आडियो में कर रहे हैं, कि कोई भी चंदें की चोरी नहीं हुई, पैसा सुरक्षित हैं, इस लिए चोरी की बात मत लीखिए।
ग्रुप में महादेव लिखते हैं, कि यहां भी चंपत राय, जब भी बाहर के लोगों से जुड़ने की अपील करता हूं, तो वह लोग पदाधिकारियों को ही गाली देने लगते हैं, और कहते है, सब चोर हैं, जुड़ने से मना कर देते हैं, उल्टा समझाने लगते हैं, कि कहां जाकर फंस गए। इतना-इतना पैसा दान दिया, न जाने कितनों ने रसीद तक नहीं ली, कितनों ने गुप्त दान किया, लेकिन जब भी हिसाब-किताब की बात किया जाता तो उल्टा कह दिया जाता है, कि अभी तो हम्हीं को ही पाना है। पुराने पदाधिकारी अंदर ही अंदर संगठन को खोखला कर रहे है, हाल में ही पता चला कि मंदिर से पत्थर ही गायब हो गया, जब कि परिवार पहरा देता हैं, और जिस पर हर माह 20 हजार खर्च कर होे रहा, हर माह बीस हजार खर्च कर दे रहे हैं, लेकिन लेकिन पांच हजार का सीसी कैमरा नहीं लगवा पा रहे है, पदाधिकारियों को अपना पद छोड़ देना चाहिए। प्रशांत पांडेय लिखते हैं, कि मंदिर अपूर्ण है, वह बात अलग है, इतना पैसा आया, इतना सामान आया, पैसा कहां गया, मूर्ति बनाने वालों का पैसा कहां गया? इसके जिम्मेदार हिसाब दें। चंदा चोरी राम मंदिर में ही नहीं हुई, बल्कि परसुराम मंदिर में भी हुई, पूरे जिले से पैसा लेकर लूट रहे है। महासभा अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा है। अभी तक बैठक नहीं बुलाई गई। कहा कि बेैठक बुलाने की जिम्मेदारी महामंत्री की हैं, अगर वह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो पद से उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। कहते हैं, कि आज ब्राहमणों की जो जिले में स्थित हैं, उसके लिए ब्राहृमण सभा जिम्मेदार है। कार्यकारिणी को भंग किया जाए और नए सिरे से संगठन को मजबूत किया जाए। आकाष पांडेय लिखते हैं, कि वैसे तो जीवन में बहुत सारी गलती किया, लेकिन सबसे बड़ी गलती महासभा से जुड़कर की, वह भी प्रधानजी की वजह से, आज से मैं ब्राहृमण महासभा के बारे में सपने में भी नहीं सोचूंगा, मेरा आखिरी प्रणाम। इतना परेषान तो घर वालों से नहीं हुआ, जितना महासभा से। कृष्णचंद्र उपाध्याय लिखते हैं, ब्राहृमण महासभा के पदाधिकारियों को तत्काल अपने पद को छोड़ देना चाहिए। मनीष मिश्र लिखते हैं, मंदिर का निर्माण कार्यपूर्ण होगा कि नहीं, क्यों सारे पैसे का दुरुपयोग हो रहा, कहते हैं, कि अगर महामंत्री का पद नहीं संभलता को इस्तीफ दे दीजिए। आरुष होम सलूषन वाले लिखते हैं, कि सव में मन बहुत आहत हुआ, इस तरह का रर्वैया देखकर बहुत अफसोस हो रहा है, कि हम लोगों ने अपना समय ऐसे संगठन के लिए व्यर्थ किया, लिखा कि राष्टीय अध्यक्षजी अभी तक बैठक क्यों नहीं बुला रहे है, इसका जबाव कौन देगा। जयश्री महाकाल लिखते हैं, कि समय आ गया है, कि संगठन को भंग कर नई कमेटी का गठन किया जाए, ताकि नये लोगों को जोड़ा जा सके, कहा कि संगठन किसी की जागीर नहीं होती, कुछ लोग आत्ममुग्धता के साथ संगठन चलाने का प्रयास कर रहे है।
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