बनकटी/बस्ती। बनकटी विकास क्षेत्र के कई बार रहे ब्लॉक प्रमुख, एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनाथ सिंह का वेदांता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक आम जनमानस में गहरा  शोक व्याप्त है। रघुनाथ सिंह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज वेदांता हॉस्पिटल में चल रहा था, जहां आज उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रीय लोगों का अस्पताल की ओर तांता लग गया। उनके पार्थिव शरीर को निज निवास महादेवा अंतिम दर्शन के लिए लाया गया था। बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पुन्यआत्मा को शांति मिलने की कामना की। उनके पार्थिव शरीर को अयोध्या के पावन सरयू तट पर विधि-विधान, श्रद्धा और सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। रघुनाथ सिंह सहज, सरल और जनप्रिय नेता के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने  जनसेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके निधन से सिर्फ एक परिवार का जनहानि नहीं अपितु विकास क्षेत्र की एक अपूरणीय क्षति हुई है। विभिन्न जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं गणमान्य लोगों द्वारा उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी शोक संदेशों का सिलसिला लगातार जारी है। लोग अपने अपने शब्दों से दिवंगत आत्मा के शांति के लिए ईश्वर से कामना कर रहे हैं। जनसेवा के एक युग का अवसान, बस्ती की माटी आज असामान्य रूप से शांत है। जैसे समय स्वयं ठहर कर उस व्यक्तित्व को निहार रहा हो, जिसने अपने जीवन को जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख और वर्तमान में बनकटी ब्लॉक के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने केवल दायित्व नहीं निभाया, बल्कि एक ऐसी परंपरा गढ़ी जिसमें सेवा, सादगी और संवेदना का अद्भुत समन्वय था। राजनीति के इस दौर में, जहाँ पद अक्सर व्यक्तित्व पर भारी पड़ जाता है, वहाँ रघुनाथ सिंह जी उन विरले लोगों में थे। जिन्होंने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व पद का मोहताज नहीं होता। उनका स्वभाव सहज, सहयोगी और सर्वस्व समर्पित था। जो भी उनके संपर्क में आया, वह उनके व्यवहार की गरिमा और मानवीयता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। बनकटी की गलियों से लेकर बस्ती जनपद के जनमानस तक, उनकी छवि एक ऐसे जनप्रतिनिधि की थी जो कथित प्रतिनिधि कम और परिवार का सदस्यष् अधिक लगता था। उन्होंने लोगों की समस्याओं को केवल सुना नहीं, बल्कि उन्हें अपना समझकर समाधान का प्रयास किया। यही कारण है कि आज उनके जाने के बाद जो शून्य उत्पन्न हुआ है, वह केवल एक व्यक्ति का अभाव नहीं, बल्कि एक मूल्य-व्यवस्था का क्षय प्रतीत होता है।उनकी स्मृतियाँ आज केवल यादों में सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक प्रेरणा हैं-उन सभी के लिए जो सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, समर्पण और संवेदनशीलता को जीवित रखना चाहते हैं। आने वाली पीढ़ियाँ जब भी जनसेवा के आदर्शों की चर्चा करेंगी, रघुनाथ सिंह का नाम एक उज्ज्वल उदाहरण के रूप में लिया जाएगा। यदि रहते सोशल मीडिया पर आपसी भाईचारा दिखता तो बात कुछ और होती, लेकिन यहां पर लोग जाने के बाद कसीदें पढ़ते हैं, और अपनापन दिखाते है।