बस्ती। जब-जब किसी ने आस्था पर चोट की, पूरा समाज खुलकर सामने आया। बात जब राम मंदिर के चढ़ावे की हो तो यह सुनकर समाज विचलित हो जाता है, कि क्या इंसान इतना लालची हो गया है, कि वह भगवान को भी नहीं छोड़ रहा है। कहा भी जाता है, कि अगर कोई मंदिर में चोरी करता है, तो वह सबसे बड़ा अपराध करता है, मंदिर में वही लोग चोरी करते हैं, जिन्हें भगवान का भी डर नहीं रहता है। अगर कहीं चोरी उन लोगों के द्वारा की गई, जिन्हें रखवाली का जिम्मा दिया गया तो समझो घोर कलयुग आ गया, आखिर समाज और सरकार किस पर भरोसा करे, जिसपर भरोसा किया जाता है, वहीं चोर और बेईमान निकलता। जब राम मंदिर के टस्टी पर चोरी करने का आरोप लग सकता है, और अगर राम मंदिर के टस्टी विष्वासी नहीं होगें तो दुनिया में किसी पर विष्वास नहीं किया जा सकता है। पूरी दुनिया मंदिर से चोरी को लेकर हैरान और परेषान है। कहते भी कि अगर इसकी निष्पक्ष और खुली जांच नहीं हुई, और दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया तो यह सरकार के मत्थे पर महापाप लगेगा, और इसका खामियाजा उन-उन लोगों को भुगतना पड़ेगा, जो इस दान की चोरी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से शामिल है। श्रद्धालु चंद्रेश प्रताप सिंह सहित अन्य का कहना है, कि राम सबके हैं, राम मंदिर का पैसा भी सबका है। उसका हिसाब भी सबके सामने होना चाहिए। अयोध्या के राम मंदिर पर श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान दिया। गरीब ने भी 10 रुपये दिए, अमीर ने करोड़। हर नोट के साथ एक आस्था जुड़ी थी। पर अब जब चढ़ावा चोरी की बात सामने आई है, तो आस्था पर चोट पहुंची है। कहते हैं, कि सरकार ने एसआईटी बनाकर जांच के आदेश दिए। पर एसआईटी सरकार के अधीन काम करती है। अपनी ही सरकार के लोगों की जांच अपनी ही एजेंसी से करवाने से जांच निष्पक्ष कैसे होगा? ये तो भूसे पर लिपवाकर मामला शांत करने जैसा लग रहा है। एक श्वेत पत्र जारी कर देने से जनता संतुष्ट नहीं होगी। निष्पक्ष जांच तब मानी जाएगी जब जांच रिटायर्ड जज के पैनल से हो। सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज-जिनका न कोई मोह हो, न कोई दबाव।  से अलग, एक स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट हो। हर पैसे का हिसाब सार्वजनिक हो। कौन कितना लाया, कहां खर्च हुआ, किसकी जेब में गया। अगर सरकार सच में स्वच्छता और निष्पक्षता चाहती है, और अपनी छवि जनता के बीच बचाना चाहती है, तो उसे खुद आगे बढ़कर स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए। जनता को भरोसा देना चाहिए कि राम के नाम पर एक पैसा भी इधर-उधर नहीं हुआ। नहीं तो ये महापाप सरकार के माथे लगेगा। राम के नाम पर इकट्ठा हुआ धन अगर लूटा गया, और सरकार ने लीपापोती की, तो इतिहास माफ नहीं करेगा। जनता माफ नहीं करेगी। राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। आस्था में कालिख न लगे, इसलिए पारदर्शिता जरूरी है। दूध का दूध, पानी का पानी हो। स्वतंत्र जांच हो, रिटायर्ड जज की निगरानी में हो। तभी जय श्री राम का नारा सार्थक होगा। कगहते हैं, कि दान देने वाला हर भक्त हिसाब मांगने का हक रखता है। इस मामले अयूब और बदरुदीन नामक दो भाईयों के खिलाफ परसरामपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।