बस्ती। सोशल मीडिया पर एक सवाल किया गया, कि किस मंत्री, सांसद और विधायक ने युवाओं को सबसे अधिक रोजगार दिया, पूछे गए सवाल की लोगों ने खूब सराहना की, लेकिन लोगों के जो कमेंट आएं हैं, उससे लगता है, कि माननीयों ने युवाओं को रोजगार देने के बजाए उनके रोजगार को छीन लिया। सबसे बढ़िया और चुभता हुआ कमेंट ‘सरदार कुलवेंद्र सिंह मजहबी’ ने किया, कहा कि स्वतः रोजगार जैसे चुगली, कानाफूसी, दलाली, खड़े-खड़े खरीदना और बेचना, पीठ पीछे बुराई, परनिंदा, किसी का काम बन रहा हो, तो उसके जाने के बाद शिकायत जैसा रोजगार सभी नेताओं ने दिया, कोई न ले पाया यह उसकी किस्मत। रोजगार छीनने वाले नेताओं को ‘जय राठौर’ ने बहुत-बहुत धन्यवाद देते हुए कहा कि वाल्टरगंज चीनी मिल को बंदकरवा कर नेताओं ने हजारों युवाओं का रोजगार छीन लिया, क्या यह किसी उपलब्धि से कम है, कहते हैं, कि रोजगार छीनने में सभी सांसद और विधायकों का सहयोग रहा, इस लिए सभी को मेरा धन्यवाद। अपने कमेंट के जरिए राठौरजी ने एक तरह से जिले के सांसदों और विधायकों को उनके मुंह पर करारा तमाचा जड़ा। ‘मनमोहन श्रीवास्तव उर्फ काजू’ का कहना है, कि किसी का तो नहीं जानता, लेकिन जनता ने मौका दिया, तो सबसे अधिक रोजगार देने का काम करुंगा, कई लोगों को आपे संबधों के बल पर रोजगार दिया भी हूं, और दिलवाता भी हूं। भावेष पांडेय ने कहा कि यह क्या पूछ लिया आपने। आशुतोष सिंह लिखते हैं, कि आप सब जानते हो आप को सब जानकारी है, कि किन-किन नेताओं के सहयोग से बस्ती में लोग बेरोजगार हो रहे है, और आगे बेरोजगार करने की तैयारी है। ‘अब्दुल हक’ ने कहा कि हरीश द्विवेदी और भाजपा ने। प्रकाश सिंह मुन्ना ने राजकिशोर सिंह का नाम लिया। ‘महिपाल पटेल’ लिखते हैं, अपने मतलब से सब अच्छे हैं, वरना सब हीरो हमेशा जीरो। खादिम हुसैन ने राजकिशोर सिंह का नाम लिया। ‘रमेश चंद्र मिश्र’ ने तो लिखा कि सबसे अधिक रोजगार बस्ती के युवाओं को फेसबुक और यूटूब ने दे रखा है। ‘सत्येंद्र सुभाष शुक्ल जिप्पी’ ने लिखा कि जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी रोजगार दे रखा है, जैसे 10 फारचूनर लेकर निकलते है, तो कम से कम 10 चालक को रोजगार मिला, जिस कंपनी से गाड़ी खरीदी, वहां पर सैकड़ों काम करने वालों को रोजगार मिला, 10-10 गाड़ी में डीजल/पेटोल भरा तो पंप पर काम करने वालों और पंप के मालिक को रोजगार मिला, इस तरह सैकड़ों हजारों लोगों को जनप्रतिनिधियों ने रोजगार देते है। ‘राघवेंद्र सिंह’ कहते हैं, कि बस्ती के नेताओं ने रोजगार छीन लिया, वाल्टरगंज चीनी मिल से रोजगार छीना, एक भी कोई रोजगार देने वाली फैक्टी लगी हो तो पत्रकारजी बता दीजिए, आप को बहुत-बहुत शुभकानाएं जो आपने ऐसा सवाल किया। ‘अरशद मसूद’ की नजर में राजकिषोर सिंह और रामप्रसाद चौधरी ने युवाओं को रोजगार दिया। सत्येंद्रनाथ श्रीवास्तव लिखते हैं, कि राम प्रसाद चौधरी ने भी बहुत युवाओं को रोजगार दिया। ‘आलोक पांडेय’ लिखते हैं, कि कुछ नेता सिर्फ चाटुकारों को नोकरी दिए, जो इधर की बात उधर और उधर की बात इधर करके अपना रोजगार चला रहे है, उसी से ही उनका जीवन यापन हो रहा, इसे भी रोजगार की श्रेणी ही समझिए। ‘राकेष पांडेय’ का मानना है, कि सारे जनप्रतिनिधि अपने रोजगार बढ़ाने में व्यस्त रहते हैं, हां अगर अपना रोजगार बढ़ाने में अनजाने में किसी को कोई रोजगार मिल गया हो तो उसका भाग्य। ‘राघवेंद्र सिंह’ कहते हैं, कि हमारे एक मित्र जो अपने बलबूते पर रोजगार पैदा किए थे, उसे भी वर्तमान के नेताओं ने छेड़खानी करके उन्हें कमजोर कर दिया। ‘मोनू पांडेय’ का कानना है, कि हरीश भईया ने सबसे अधिक रोजगार दिया। यही ‘संतोश उपाध्याय’ ती का भी मानना है। ‘प्रमोद द्विवेदी’ ने मनीश जायसवाल का नाम लिया। उमेश त्रिपाठी कहते हैं, कि नेता और रोजगार, हो ही नहीं सकता। ‘अंकित पांडेय पवन’ ने हरीश द्विवेदी को श्रेय दिया। ‘मोहित सिंह क्षत्रिय’ कहते हैं, कि विधायक मंत्री नहले खुद को रोजगार देगें, उनसे बचता ही कहां। ‘वीरेंद्र मिश्र’ कहते हैं, जातिवाद परिवारवाद न करके और साफ सुधरी छवि वाले नेता हरीष द्विवेदीजी ने बाकी कोई नहीं। ‘राजीव श्रीवास्तव’ कहते हैं, कि हिंदु-मुसलमान इसी पे बहुत से लोगों का रोजगार चल रहा है।
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