बस्ती। अब जरा अंदाजा लगाइए कि जब डीसी मनरेगा यानि उपायुक्त मनरेगा की जांच बीडीओ और सचिव करेगें, तो क्या होगा? इसी लिए कहा जाता है, कि आईजीआरएस मजाक बनकर रह गया। जांच मिली बीडीओ और बीडीओ बनकटी ने थमा दिया सचिव को, शिकायत डीसी मनरेगा के तीन साल से अधिक रहने और उनके भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग बनकटी ब्लॉक के ग्राम बेहिल निवासी गंगाराम यादव ने की थी। पोर्टल पर जांच बीडीओ को देना बताया गया। शिकायत शपथ पत्र पर किया गया, कहा गया कि पिछले तीन सालों में मनरेगा में भ्रष्टाचार बढ़ा है, इनका कार्य जनहित में कम और मनरेगा में लूट की अधिक रहती है। इसी लिए इनका तबादला आवष्यक है। यह वही गंगाराम यादव है, जिसने बेहिल के भ्रष्टाचार को लेकर डीएम कार्यालय पर आत्मदाह करने का प्रयास किया। यह चिल्लाता रहा कि ग्राम पंचायत में प्रधान, सचिव और बीडीओ की मिली भगत से मनरेगा को लूटा जा रहा है। एक ही परिवार में एक ही व्यक्ति के नाम डबल कार्ड बनने की शिकायत नाम के साथ की गई, 100 से ज्यादा एक ही परिवार को कार्य देने भी बताया गया, जांच में प्रधान दोषी भी पाए गए, नोटिस भी जारी हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर लीपापोती होती रही। बीडीओ ने सीडीओ को लिखकर दिया कि डीसी मनरेगा स्तर से प्रधान के खिलाफ कार्रवाई किया जाना है। सवाल उठ रहा है, कि जब मनरेगा में फर्जी भुगतान का मामला साबित हो गया तो फिर क्यों नहीं बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की गई? क्यों नहीं रोजगार सेवक और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की गई? बार-बार कहा जाता है, कि जब मनरेगा में कार्यो की स्वीकृति और भुगतान मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी/बीडीओ करते हैं, तो क्यों नहीं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती? क्यों उन्हें हर बार बरी कर दिया जाता? इस लिए बरी कर दिया जाता कि वह विकास भवन तक हिस्सा पहुंचाते है। कहा भी जाता है, कि डीएम और सीडीओ के ईमानदार होने से क्या फायदा जब तक डीसी मनरेगा और बीडीओ ईमानदार नहीं होगें? सवाल यह भी उठ रहा है, कि जब डीएम और सीडीओ को ईमानदार माना जाता है, तो फिर उनका हिस्सा कहां चला जाता है, कौन है, जो दोनों के नाम पर हिस्सा तो लेते, लेकिन हिस्सा नहीं पहुंचाते। एक डीएम का लगभग 60 लाख हिस्सा मार लिया गया, डीएम चले भी गए, लेकिन उन्हें उनका हिस्सा नहीं दिया, बीच में खा लिया गया। इसी लिए मनरेगा में भ्रष्टाचार नहीं रुक रहा है। मीडिया बार-बार कह रही है, कि यह भ्रष्टाचार तभी रुकेगा, जब पीओ/बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई होगा। या फिर गंगाराम यादव जैसा कोई शिकायतकर्त्ता हो, जो भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए अपनी जान भी दे सकता है। कौन ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे अपनी जिंदगी प्यारी न हो, क्यों कोई प्रधान के भ्रष्टाचार के खिलाफ आत्मदाह करेगा? पांच साल तक गंगाराम यादव बेहिल के प्रधान के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता रहा, आत्मदाह का प्रयास भी किया, लेकिन भ्रष्ट बीडीओ और डीसी मनरेगा के चलते प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, पहले बीडीओ रोक देते फिर विकास भवन जाता तो वहां मैनेज हो जाता।