बस्ती। कलेक्टेट सभागार में पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 40 शिक्षकों को सम्मान पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया। इस समारोह की खास बात चीफ गेस्ट डीएम और सीडीओ नहीं बल्कि एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह और सरोज मिश्र रहे। जिस विभाग का यह कार्यक्रम रहा, उस विभाग के न तो बीएसए और न एडी बेसिक ही मॉैजूद रहें। अगर इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सांसद और विधायक समय नहीं देगें तो देगा कौन, इतना ही नहीं अगर विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी इस कार्यक्रम के महत्व को नहीं समझेगें तो समझेगा कोैन? यह कुछ ऐसे सवाल हैं, जिसका जबाव हर षिक्षक जानना चाहता है। षिक्षकों ने हरीश सिंह और सरोज मिश्र को इस बात के लिए धन्यवाद दिया, कि कम से कम इन दोनों ने समय जो दिया। वरना, एक शिक्षक दूसरे शिक्षक को सम्मानित करता। सीडीओ साहब, डीएम के चेंबर में बैठे रहे, लेकिन वह शिक्षक सम्मान समारोह में नहीं आए, और न ही उन्होंने किसी शिक्षक को सम्मानित ही किया। जो कि चर्चा का विषय रहा। यह पहला ऐसा शिक्षक सम्मान समारोह रहा, जिसमें न तो विभाग का और न प्रशासन का ही कोई अधिकारी मौजूद रहा। ़मान लिया जाए कि डीएम तहसील दिवस में व्यस्त रही, लेकिन सीडीओ तो कलेक्टेट में मौजूद रहें, उन्हें तो कम से कम षिक्षकों को सम्मानित करना चाहिए था। अगर बीएसए भी तहसील दिवस में थे, तो उन्हें भी डीएम को बताकर आना चाहिए था, डीएम मना तो करती नहीं, रही बात एडी बेसिक की तो यह कहकर नहीं बच सकते कि तहसील दिवस में थे, क्यों कि मंडलीय अधिकारी तहसील दिवस में नहीं रहते। जब कि यह कार्यक्रम राजधानी से मुख्यमंत्री सीधे लाइव पर रहे। सम्मान पत्र पर एडी बेसिक का नाम तो हैं, लेकिन उनका हस्ताक्षर नहीं है। शिक्षक इसे शिक्षकों का सम्मान समारोह न मानकर अपमान समारोह मान रहे है। पहली बार हरीश सिंह और सरोज मिश्र को इतने बड़े कार्यक्रम के चीफ गेस्ट बनने का मौका मिला। शिक्षक भूले या न भूले लेकिन इस सम्मान समारोह को हरीश सिंह और सरोज मिश्र नहीं भूल सकते। शिक्षकों का महत्व अगर किसी को जानना हो तो वह अमेरिकी प्रेसीडेंट अब्राहम लिंकन के उस पत्र से जान जा सकता है, जो उन्होंने अपने बेटे के लिए नहीं बल्कि अपने बेटे के शिक्षक को लिखा था, उन्होंने शिक्षक से अपने बेटे को जीवन के मूल्य और षिक्षा का पाठ पढ़ाने का अनुरोध किया था। यह है, एक षिक्षक का महत्व।
चार विशेष क्षेत्र की उपलब्धियों के कारण षिक्ष्कों को सम्मानित किया गया, इनमें कक्षा एक में सर्वाधिक नामांकन के लिए बहादुरपुर के कंपोजिट पीएस कोठवा भरतपुर में 39, बनकटी के अहरा में 45, सदर के महसों में 48, मूड़घाट में 38, दक्षिण दरवाजा में 35, दुबौलिया के भरपटिया में 38, कुदरहा के बानपुर में 36, सल्टौआ गोपालपुर के बैतौहा में 39, इसी ब्लॉक के दमया में 38 एवं विक्रमजोत के पीएस बाघानाला में 34 बच्चों का नया नामांकन हुआ। इसी तरह कक्षा छह में सर्वाधिक नामांकन कराने वालों बहादुरपुर के यूपीएस कलवारी में 69, बनकटी के अहरा में 80, गौर के तनुआ में 64, कुदरहा के बानपुर में 61, रामनगर के बढ़ोखर में 88, सल्टौआ के ढगढवा में 74, बेतोैहा में 72, जगतपुर में 64, विक्रमजोत के मलौलीगोसाई में सवार्घिक 96 एवं छावनी में 62 बच्चों का नया नामांकन हुआ। बेतिर कक्षा संचालन एवं बेहतर शिक्षण कौषल के लिए बहादुरपुर के पीएस मलवार की शिल्पी मिश्रा, सदर के सीएस डारीडीहा की शिल्पी पांडेय, हर्रैया पीएस प्रथम की निरुपता तिवारी, हर्रैया के पीएस मौली के राम प्यारे, कप्तानगंज के पीएस महुआ लखनपुर की खुशबू, कुदरहा के पीएस बनहरा के राम फल, कुदरहा के पीएस यिकंदरपुर की सोनी सिंह, रुधौली के यूपीएस मझवाकला के सुरेंद्र कुमार चौधरी, रुधौली के पीएस बखैया के अविनाश शुक्ल, सल्टौआ के सीएस पड़रिया दत्तू के कृष्ण पांडेय, यूपीएस कोठिला के चंद्र शेखर पांडे, साउंघाट के सीएस जीवधारा के शिवाकांत पांडेय एवं इसी ब्लॉक के पीएस अंडा की निवेदिता श्रीवास्तवा। बेहतर एवं सुसज्जित स्कूल परिसर के लिए बहादुरपुर के यूपीएस नगर बाजार के प्रधानाचार्य प्रमोद सिंह, हर्रैया के जेएचएस चोरखरी के राम सागर वर्मा, परसरामपुर के यूपीएस जतौलिया के अजय पांडेय, रामनगर के पीएस पकरी के निखिल एवं कुदरहा के यूपीएस कुदरहा के सुनील कुमार यादव। स्कूलों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अन्य शिक्षक को भी सम्मानित किया गया, जिसमें हर्रैया के पीएस भावनापुर के राम रक्षा भर एवं इसी ब्लाक के पीएस हदही के अरविंद कुमार विष्वकर्मा शामिल है।
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