बस्ती। रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े रहे भाजपा के राजेंद्रनाथ तिवारी ने राम जन्म भूमि की बदली हुई व्यवस्था से असहमति जताते हुए कहा कि यह नई टीम चंपत राय की फोटो कापी है। नई टीम के सीईओ जितेंद्र मिश्र को याद दिलाते हुए कहते हैं, कि राम जन्मभूमि में आने वाला कोई भी व्यक्ति पाकिस्तानी नहीं है। कहा कि जिस तरह इन्होंने पत्रकारों के प्रति अपनी प्रथम टिपणी की वह असभ्य एवं अषोभनीय है। अपना दर्द बयां करते हुए कहते हैं, कि अगर उन्हें मालूूम होता कि व्यवस्था इतनी लचर और एकांकी रहती तो न तो वह कभी राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ का पदाधिकारी नहीं बनते और न धन संग्रह करने के लिए अयोध्या से लेकर लखनऊ तक ताला खुलवाने के लिए पैदल यात्रा ही करते। कहते हैं, कि हमारे जैसे लोग राम मंदिर के उदघाटन में आमंत्रण पत्र और एक फोन काल के लिए तरस गए। दुखी होकर कहते हैं, कि राम का मंदिर हैं, इसे राम ही बचाएगें, और दूसरा कोई नहीं बचाएगा। कहते हैं, के सीईओ के लिए हमने भी आवेदन किया था, लेकिन मेरे आवेदन को रददी की टोकरी में डाल दिया गया, साक्षात्कार के लिए भी नहीं बुलाया गया। जबकि अधिकांष आवेदक सम्मानित नागरिक रहे। इनके पास अपार प्रषासनिक और सामाजिक अनुभव का खजाना था। जिसने 70 साल जीवन संगठन को दिया, क्या वह एक फोन का भी अधिकारी नहीं? कहा कि गोविंदगिरी के कोषाध्यक्ष रहते ही मंदिर में सारा लूटपाट हुआ, अब यह महासचिव के रुप में कितना सफल होगें, यह भी राम जाने। यह सच हैं, कि जो नई टीम बनी है, उसमें चंपत राय की पूरी छाप है। कहा जा रहा है, कि जब तक राम मंदिर को आरएएस वालों से मुक्त नहीं कराया जाएगा, यूंही लूटपाट होती रहेगी, एक चोर से पीछा छुड़ाने के लिए दूसरे चोर को मंदिर सौंप दिया। रही बात नये सीईओ की तो इन्हें यह समझना होगा, कि यह कोई लड़ाई का मैदान या इनकी फौज नहीं हैं, जो एक टांग पर खड़े रहेगें। अगर नए सीईओ ने मीडिया के प्रति अपना रर्वैया नहीं बदला तो इन्हें अनेक सवालों का सामना करना पड़ सकता है। मीडिया के सवालों से जब पीएम नहीं बच सकते हैं, तो सीईओ साहब आप कैसे बचेगें? आपके यह कहने से कि पुरानी बातें भूल जाइए, कैसे कोई पुरानी बाते भूल सकता? क्या कोई यह भूल सकता है, कि करोड़ों लोगों के आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ? कैसे कोई यह भूल सकता है, कि उसके चंदें की चोरी की गई? कैसे कोई उन लूटेरों को भूल सकता है, जिसने राम के नाम पर भक्तों का पैसा लूटा। सीईओ साहब अगर आप को सफल सीईओ बनना हैं, तो मीडिया को गले लगाना होगा। मिलिटी वाली तानाषाही को छोड़ना होगा। यह भी सही है, आप मीडिया को तो ठीक नहीं कर सकते लेकिन मीडिया आपको अवष्य ठीक कर सकती है।
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