बस्ती। जब भी पत्रकारों की ओर से कृषि मंत्रीजी से खाद की कालाबाजारी के आरोप में जिला कृषि अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की बात करते तो मंत्रीजी यह कहकर टाल जाते कि पहले साक्ष्य लाइए, फिर कार्रवाई करुंगा। मंत्रीजी अब तो साक्ष्य आपको मिल गया, आप की जांच में ओवर रेटिगं की शिकायतें किसानों ने आप से की, फिर भी आपने अपने दुलारे और लाडले जिला कृषि अधिकारी बाबू राम मौर्य के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, मंत्रीजी कार्रवाई करने के लिए आप को कितना बड़ा सबूत चाहिए। मंत्रीजी ऐसा लगता है, कि आप को मोटा लिफाफा मिल गया, इस लिए कार्रवाई करने से कतरा रहे है। कहीं ऐसा तो नहीं मोटा लिफाफा के लिए ही आपने रास्ते में समितियों और खाद की दुकानों की जांच किया। मंत्रीजी, सवाल उठ रहा है, कि जब आप ओवर रेटिगं के मामले में बलरामपुर और सिद्वार्थनगर के जिला कृषि अधिकारी को रेल सकते हैं, तो क्यों नहीं बस्ती के डीओ को रेल रहे हैं? मंत्रीजी इससे आपकी और सरकार की छवि दोनों खराब होती जा रही है, कहीं ऐसा न हो कि इसका खामियाजा 2027 में सरकार और आप को भुगतना पड़ें। क्यों कि आपकी जो कार्यशैली हैं, उससे तो यही लगता है, कि न तो आप खुद की और न सरकार की चिंता है, आपको चिंता अधिक से अधिक मोटा लिफाफा लेने में है। मंत्री वाला जो तेवर होना चाहिए, वह आप में नहीं दिखाई दे रहा हैं, न तो आपके भीतर ईमानदारी हैं, और न आपके भीतर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता ही है। अगर होता तो आपके ही गृह जनपद के एक पत्रकार यह न कहते थे, कि आप मंत्री बनने लायक ही नहीं है।
बताते चलंे कि बस्ती में बैठक के बाद मंत्रीजी ने रास्ते में विक्रमजोत के सहकारी समिति कवलपुर का निरीक्षण किया आधा दर्जन से अधिक किसानों ने बताया कि अधिक दाम लिया जाता है, शिकायत करने पर जिला कृषि अधिकारी कार्रवाई के बजाए सचिव से सौदा कर लेते हैं, इसी तरह पैकोलिया के परसा तिराहे के पास खाद की दुकान का निरीक्षण किया, यहां पर ओवर रेटिगं की शिकायत मिली। फिर सवाल उठ रहा है, कि निरीक्षण के समय जिला कृषि अधिकारी साथ में रहें, अगर कोई दूसरा मंत्री होता तो इतनी शिकायत पर अब तक डीओ को खड़े-खड़े रेल देता। लेकिन ठहरे लिफाफा वाले मंत्री तो कार्रवाई कैसे करेगें? ऐसे में जब कैबिनेट मंत्री का ईमान लिफाफा पर बिक जाएगा तो अधिकारी कालाबाजारी करेगा ही, क्यों कि उसे अच्छी तरह मालूम हैं, कि जब तक वह मोटा लिफाफा देता रहेगें, तब तक गोरखध्ंाधा चलता रहेगा, पत्रकार चाहंे जितना सवाल पूछें, किसान चाहें जितना चिल्लाएं, शिकायतकर्त्ता चाहें जितना शिकायत करें, नेता बैठकों में चाहें जितना खाद की कालाबाजारी को लेकर आवाज उठाएं, कुछ होने वाला नहीं है। जबतक मंत्रीजी का जमीर नहीं जागेगा, कुछ नहीं, सवाल यह भी है, कि जिस मंत्री का 10 साल में भी जमीर नहीं जागा, उसका अब अंतिम समय में क्या जागेगा? और क्यों जागेगा? क्यों कोई मंत्री अंतिम समय में अपना नुकसान करेगा, मान लीजिए कि अगर जाग भी गया तो क्या होगा, अधिक से अधिक लिफाफे का वजन बढ़ जाएगा। क्या आप लोगों को ऐसे मंत्रियों की कार्यशैली को देख ऐसा लगता है, कि प्रदेश में भाजपा की तीसरी बार सरकार बनेगी, सरकार बनने का मतलब भ्रष्टाचार बढ़ना, और सूर्यप्रताप शाही जैसे मंत्रियों का मनोबल बढ़ना। डा. बाबू राम मौर्य और डा. राज मंगल चौधरी जैसे भ्रष्ट अधिकारी तो चाहेगें कि भाजपा की सरकार बने, और यह भी चाहेंगें, कि फिर सूर्यप्रताप शाही ही कृषि मंत्री बने।
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