सभी इंसानों को सामान दर्जा दिया, मेरे पर प्रहार क्यों?

सोच ने इंसान,दिन,रंग,फल बांटे अब संविधान को भी दलित बनाया

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने संविधान बदलने को मांगी थी 430 सीट

ओमप्रकाश गौतम

मैं भारत का संविधान हूं मेरे निर्माताओं ने महिलाओं की बेड़ियों को तोड़कर समानता का अधिकार दिया और उच्च शिखर पर पहुंचने के रास्ते खोले। वहीं सभी नागरिकों को समानता, समाज व देश को आगे बढ़ने का मौका दिया। मेरे निर्माता

डॉ बीआर अम्बेडकर ने विपरीत परिस्थितियों में नौ भाषाओं में 22 डिग्रियां लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त की और आजाद भारत का संविधान लिखा। बाबा साहब ने अपने परिवार से बड़ा समाज और समाज से बड़ा देश की सोच को प्राथमिकता दी। संविधान में हम भारत के लोग के साथ महिलाओं की बेड़ियों को तोड़कर समानता का अधिकार देने पर आज महिला सभी क्षेत्रों में मेरी वजह से आगे निकल रही है। मैने देश के सभी जाति, लिंग, धर्मों को समानता के साथ देश को सर्वोपरि माना। देश का विशेष वर्ग जिसकी मानसिकता एकाधिकार की रही। इस वर्ग ने इंसान को चार वर्गों में बांटा,दिन बांटे,हरा रंग मुसलमानी,नीला दलित,भगवा सनातनी तो दिन भी बांट दिए। देश के तिरंगा को नहीं माना। फल भी खजूर मुसलमानी और नारियल हिन्दू का बना दिया। हद तो उस समय हो गई जब दुनिया का सबसे श्रेष्ठ संविधान को भी बदलने के लिए भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 430 सीटों की मांगकर चुनाव प्रचार किया। देश के प्रधानमंत्री ने अमर्यादित भाषा से प्रचार किया। इस वर्ग की सोच ने मुझे भी डॉबीआर अम्बेडकर का दलित संविधान बना दिया। जबकि लोकतंत्र संविधान से चलता है। सभी उच्च पदों पर मेरी शपथ लेकर बैठे हुए है।

बाबा साहब डॉ बीआर अम्बेडकर के सूत्रों को तोड़ा

डॉ बीआर अम्बेडकर ने देश के समस्त नागरिकों को शिक्षित बनो,संगठित हो,संघर्ष करो को तोड़ने में जुटे है। इस वर्ग ने संस्कृत भाषा को बपौती समझा तो गर्त में चली गई। सभी देवी देवताओं को अपनी जागीर समझकर चले और भगवान श्री के मंदिर के डांका डालकर राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाकर,श्रद्धा को भी खत्म कर दिया।