बस्ती। अगर कोई ईमानदार नगर पंचायत का चेयरमैन पत्रकार को मारते तो उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी चर्चा भ्रष्ट कहे जाने वाले नगर पंचायत बभनान के चेयरमैन प्रबल मलानी की हो रही है। अगर इन्होंने कानून को हाथ में नहीं लिया होता तो कोई इनके भ्रष्टाचार की ओर देखने नहीं जाता, लेकिन जिस तरह इन्होंने सत्ता के नशे में चूर होकर सार्वजनिक स्थान पर पत्रकार को मारापीटा, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। माफी मांग लेने से किसी का अपराध कम नहीं हो जाता, अगर पत्रकार ने किसी तरह की अनियमित या फिर खबर के बदले पैसे की मांग की हो, या सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया तो पत्रकार के खिलाफ मुकदमा कायम कराना चाहिए था, लेकिन ठहरे यह सत्ता पक्ष के चेयरमैन, तो डर किसका। अगर पत्रकार ने चेयरमैन पर हाथ उठा दिया होता या विरोध स्वरुप मार भी दिया होता तो चेयरमैन साहब की क्या इज्जत रह जाती? इनकी भी इज्जत सरे आम चली जाती, जिस तरह पत्रकार की गई। किसी को भी यह अधिकार नहीं हैं, कि वह कानून को अपने हाथ में लें। जिसने भी कानून को अपने हाथ में लिया, उसे उसकी कीमत किसी न किसी रुप में अवष्य चुकानी पड़ी। अब हम आप लोगों उन चेयरमैन के भ्रष्टाचार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे खुद नगर पंचायत बभनान के जेई ने स्वीकार किया, मगर कार्रवाई करने के बजाए मामले को लीपापोती करने वाली रिपोर्ट लगा दी। दोनों की शिकायत वार्ड दो शिवाजी नगर निवासी विवेक तिवारी पुत्र अरुन तिवारी ने आईजीआरएस में की थी। पहली षिकायत 16 मार्च 26 को वार्ड संख्या छह रामजानकी नगर चेतरा में सड़क निर्माण के पांच माह में ही टूटने की षिकायत की गई, अपर जिलाधिकारी/ प्रभारी स्थानीय निकाय को ईओ की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में माना गया कि ठेकेदार को इस मामले में 18 मार्च 26 को ही नोटिस देकर सीसी सड़क की मरम्मत करवा दिया गया। मामले को निक्षेपित करने की सिफारिश की गई, मामले को एडीएम के द्वारा निक्षेपित भी कर दिया गया, लेकिन न तो ठेकेदार और न ही एमबी बनाने वाले जेई और भुगतान करने वाले चेयरमैन और ईओ के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। ऐसी षिकायत से क्या फायदा जिसमें दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई ही न की जाए, कार्रवाई इस लिए नहीं की जाती, क्यों कि कमीशन का हिस्सा जो मिलता है। सवाल उठ रहा है, आखिर क्या देखकर जेई ने एमबी कर दिया, और क्या देखकर चेयरमैन और ईओ ने भुगतान कर दिया। अगर षिकायत न की गई होती तो सड़क की मरम्मत भी न होती। सड़क के मरम्मत के मामले में भी फर्जी रिपोर्ट लगाई गई, पूरी सड़क की मरम्मत नहीं की गई, और रिपोर्ट लगा दी गई। अब दूसरे भ्रष्टाचार की ओर ले चलते है। इसकी भी शिकायत विवेक तिवारी ने 24 जून 26 को आईजीआरएस में करते हुए कहा कि वार्ड छह रामजानकी नगर में प्राथमिक विधालय चेतरा के सामने सीसी रोड के नाम पर जमकर लीपापोती की जा रही है, पुराने खंडंजे को हटाए बिना उसी पर नई सड़क बना दी जा रही है। उक्त सड़क का निर्माण भी गुध्णवत्तापरक नहीं किया जा रहा है। ईओ की ओर से आठ जुलाई 26 को मुख्य राजस्व अधिकारी/प्रभारी स्थानीय निकाय को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि साइट पर थर्ड क्वालिटी की ईट पाई गईं। जिसे तत्काल हटवा दिया गया, और कुछ स्थानों पर जीएसबी कम डाला गया था, जिसको मानक के अनुरुप डालने का निर्देश ठेकेदार को दिया गया। इतनी कमियां पाए जाने के बावजूद भी ईओ साहब ने कार्य को संतोष जनक बता दिया, इस लिए बता दिया, क्यों कि भुगतान भी उन्होंने किया और कमीशन भी उन्होंने खाया। इसी लिए किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जब कार्रवाई करने वाला ही भ्रष्टाचार में लिप्त रहेगा तो कार्रवाई कौन करेगा? इस सवाल का जबाव कोई नहीं दे रहा है, उस चेयरमैन के पास भी इस सवाल का जबाव नहीं होगा, जिसने पत्रकार का मारा। अब आप लोग समझ गए होंगे कि नगर पंचायत बभनान में भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वालों को क्यों मारा जाता है, और साथ देने वालों क्यों माखनभोग खिलाया जाता है?
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