बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि क्या ब्रहृमदेव पांडेय को पत्रकार कहा और माना जा सकता है? ऐसे ही लालची पत्रकार पूरी बिरादरी को बदनाम कर रहे है। यूट्यूबर वाले पत्रकारों पर सबसे अधिक खबर चलाने और न चलाने के बदले पैसा मांगने का आरोप लग रहा है। हालांकि सभी यूट्यूबर पर यह आरोप नहीं लग रहा, लेकिन अधिकांश पर लग रहा है। चूंकि षोसल मीडिया पर इन लोगों की सक्रियता अधिक रहती है, और जिसकी सक्रियता अधिक रहेगी, उसी पर आरोप भी लगेगा। प्रधानों के साथ मारपीट की घटनाएं भी सबसे अधिक सामने आती है। इन्हीं घटनाओं के चलते इन लोगों के साथ विष्वास का संकट खड़ा हो गया। इधर इन लोगों का उपयोग/दुरुपयोग करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनके सवाल और जबाव में होमवर्क की कमी का एहसास होता है, सवाल करने के बजाए यह सामने वालों की बातों पर अधिक फोकस करते है। बहरहाल, आरोप तो प्रिंट और इलेक्टानिक्स मीडिया पर भी लग रहे है। इसका मतलब यह नहीं कि लोग अपना काम करना बंद कर दें। पत्रकार चाहें प्रिंट के हों चाहेें इलेटानिक्स या भी यूटृयबर वाले ही क्यों न हो, सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, समाज उन्हें देख रहा है, उनकी हर गतिविधियों पर समाज की नजर है। ऐसा कोई भी काम पत्रकारों को नहीं करना चाहिए, जिससे पत्रकार ही सवालों के घेरे में आ जाए। अगर किसी घटना का वीडियो बना लिया, तो उसे चलाना भी नहीं चाहिए, नहीं चलाएगें तो सवाल तो उठेगा ही, इसी तरह अगर किसी ने कोई खबर दे दिया तो खबर देने को दूसरे खबर पढ़ने को मिलनी भी चाहिए, खबर रुकने का मतलब आप समझ सकते है। एक दिन पर पहले आरामषीन के मालिक मुहमद शमीम पुत्र मुकादम अली सा0 दानो कुइया थाना रुधौली
ने ब्रम्हदेव पाण्डेय पत्रकार ग्राम डडवा खुर्द थाना रुधौली के खिलाफ एक मुकदमा लिखाया, जिसमें कहा गया कि प्रार्थी आरा मशीन लगाया है, जो वर्तमान समय में संचालित है तथा उसका कागजात पूर्ण रुप से सत्य है, फिर भी ब्रम्हदेव पाण्डेय पत्रकार ग्राम डडवा खुर्द थाना रुधौली जनपद बस्ती के द्वारा रुपया हड़पने की नियत से बार-बार आरा मशीन के खिलाफ झूठा विडियो बनाते रहतें हैं, हमेशा रुपये की मांग करते रहते है। मेरे कहने के बाद भी कि जब आरामशीन नियम से संचालित हो रहा है, तो फिर क्याों बार-बार वीडियो बनाने चले आते हो, और धमकरी देते हो कि अगर पैसा नहीं दिया तो वीडियो चला दूंगा। अगर कोई पत्रकार वीडियो चलाने और न चलाने के नाम पर पैसा मांगता है, तो इसका मतलब वह पत्रकार नहीं है, उसने पत्रकारिता को कमाई का हथियार बना लिया है। ऐसे पत्रकारों को तो पूरे पत्रकार बिरादरी की बदनामी करे, उसका सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए, और ऐसे लोगों को कभी बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
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