बस्ती। भ्रष्ट नेताओं जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन व सरकार की पूंजीवादी नीति व उद्योगपतियों से सांठगांठ के चलते बस्ती के विकास पर ग्रहण लगा बस्ती के रुलिंग पार्टी के नेताओं ने परोक्ष अपरोक्ष रूप से नीजि लाभ स्वार्थ में सैकड़ों सैकड़ों कर्मचारियों के हितों और जिले के विकास को तिलांजलि दे दी। बस्ती जनपद के वाल्टरगंज चीनी मिल बिना किसी नोटिस सूचना के नियम विपरीत गैर कानूनी तरीके से बंद कर दी गई। हजारों हजारों किसान और लगभग 400-500 कर्मचारियों का रोजी रोजगार चला गया वर्ष 2018 से कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं दिया जा रहा है मिल श्रमिकों का धरना जारी है और मांग निस्तारण होने तक जारी रहेगा। बड़े दुःख की बात है कि सत्ता के पदासीन धन लोभी विकास, रोजगार विरोधी तथाकथित नेता व प्रशासन में बैठे उद्योगपति पूंजीपति हितैषी बेरोजगार हुए कर्मचारियों के अंतिम निवाले को निगलने में लगे हैं। यह धमकी नहीं चेतावनी भी है यदि कोई नेता दलाल धरना हटाने व हटवाने को सपने में भी सोचा तो वह गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहे। जायज मांगों को जायज तरीके से हल करो बकाया भुगतान करो मिल चलाओ।

चीनी मिल वाल्टरगंज के धरनारत मौसमी कर्मचारियों ने सरकार शासन प्रशासन की कटु निंदा करते हुए उद्योगपतियों पूंजीपतियों की दलाली करने वाले जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों को अगाह करते हुए कहा कि यदि किसी ने चीनी मिल कटवाने के लिए व बिना मौसमी कर्मचारियों के बकाया देयक सहित का हल निकले चीनी मिल की तरफ कदम बढ़ाया तो उनका पैर फिर कदम बढ़ाने लायक नहीं रहेगा।मनीष चौधरी मिल श्रमिक ने कहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी मिल कटवा कर बेचवाने में लगे हैं ऐ अपने आदत से बाज नहीं आए तो इनको मकबूल जवाब दिया जाएगा। रोस्टर के हिसाब से आज धरने पर विकास सिंह, सुनील विष्णु राव, प्रदीप राव, संजय सिंह, मुकेश श्रीवास्तव, चंद्रिका प्रसाद यादव, ददन सिंह, योगेन्द्र यादव, सहित तमाम किसान, व्यापारी व चीनी मिल बचाओ मुक्ति मोर्चा के लोग धरना रत रहे।