बनकटी/बस्ती। कोई पत्रकार मलाई खाकर है, तो कोई पत्रकार कूकर के स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे हैं, तो किसी पत्रकार को लाइन हाजिर दरोगा गली इस लिए दे रहा है, कि पत्रकार ने दरोगा की चोरी को उजागर कर दिया था, और जिसके चलते इन्हें लाइन हाजिर होना पड़ा। दरोगा की हिम्म्त तो देखिए लाइन हाजिर होने के बाद भी थाने पर आते हैं, और जो भी आता, उसके सामने पत्रकार को गंदी-गंदी गाली देते और कहते हैं, कि जाकर पत्रकार को अवष्य बता दीजिएगा कि अब उनकी खैर नहीं। एक लाइन हाजिर दरोगा अगर थाने आकर पत्रकार को गाली देता है, तो यह गंभीर विषय है। जिस दरोगा को लाइन में होना चाहिए, वह सारे नियम कानून को तोड़कर थाने आता है, और लोगों को यह एहसास दिलाने का प्रयास करता है, कि अभी भी मेरा सिक्का थाने में चलता है। लाइन हाजिर होने वाले दरोगा का नाम शेलेंद्र सिंह हैं, जो लालगंज थाने में तैनात हैं, और सच्चाई को उजागर कर दरोगा की गाली खाने वाले का नाम राजेश कुमार शुक्ल है। इसे लेकर पत्रकार ने अपनी पीड़ा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) सहित पुलिस के उच्चाधिकारियों पुलिस अधीक्षक बस्ती, उप महानिदेशक (डीआईजी) बस्ती परिक्षेत्र एवं पुलिस महानिदेशक बस्ती जोन को पत्रों के जरिए व्यक्त करते हुए दारोगा के खिलाफ जांच करने और कार्रवाई करने की मांग की है। कहा कि अगर इसकी जांच हो गई तो थाने में लगे सीसीटीवी कैमरा दरोगा की सच्चाई बयां कर देगा।
शिकायत में कहा गया है कि दरोगा शैलेन्द्र सिंह को 19 अप्रैल को अनुशासनहीनता के कारण लाइन हाजिर किया गया था, इसके बावजूद वह थाना परिसर में अनधिकृत रूप से उपस्थित पाए जा रहे हैं। प्रार्थना-पत्र में एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि एक बालक गन्ने का जूस बेच रहा था। उसी दौरान दरोगा द्वारा अपनी सरकारी गाड़ी ठेले के सामने खड़ी कर दी गई, जिससे बाद में वाहन पर पान थूकने जैसी घटना हो गई। इसके बाद कथित रूप से बालक के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस घटना पर प्रकाशित समाचार के बाद दरोगा द्वारा प्रार्थी के प्रति रंजिश रखी गई और थाना परिसर सहित चौराहों, पान की गुमटियों व चाय की दुकानों पर धमकी एवं गाली-गलौज की जाती रही। दरोगा स्वयं को राजनीतिक संरक्षण से जुड़ा बताते हैं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बनता है।
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