बस्ती। बस्ती जिले के स्वास्थ्य विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी के खिलाफ व्यापक भ्रष्टाचार, फर्जी रिपोर्टिंग और करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों वाला एक शिकायत पत्र सामने आया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बस्ती को संबोधित इस पत्र में आरोपी अधिकारी के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कराने और उन्हें बस्ती मंडल से बाहर भेजने की मांग की गई है। क्या हैं मुख्य आरोप?

शिकायतकर्ता द्वारा पत्र में डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी पर कई गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। फर्जी जांच और रिश्वतखोरी का आरोप आरोप है कि कुदरहा के उजीयनपुर स्थित प्रकाश नर्सिंग होम की जांच के दौरान डॉ. चौधरी ने दो बार पैसे लेकर गलत रिपोर्ट लगाई और शिकायत को निराधार बताया। हालांकि, बाद में जब नोडल अधिकारी एसबी सिंह द्वारा जांच की गई, तो उक्त अस्पताल बिना डॉक्टर और स्टाफ नर्स के बेसमेंट में अवैध रूप से संचालित पाया गया, जिसे बाद में सील कर दिया गया।

फर्जी अल्ट्रासाउंड केंद्रों और झोलाछाप डॉक्टरों को संरक्षणरू शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. चौधरी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के नोडल अधिकारी हैं और वे अवैध व फर्जी सेंटरों से मासिक वसूली करते हैं। इसके अलावा, उन पर झोलाछाप डॉक्टरों को संरक्षण देने का भी आरोप है। पत्र में दावा किया गया है कि उनके पिता रमापति चौधरी स्वयं तिलौली में एक मेडिकल सेंटर चलाते हैं और वह भी कथित रूप से बिना उचित योग्यता के हैं।

आईजीआरएस पोर्टल पर गलत रिपोर्टिंगं डॉ. अशोक चौधरी आईजीआरएस के भी नोडल अधिकारी हैं। आरोप है कि वे पद का दुरुपयोग करते हुए इस सरकारी पोर्टल पर कूट रचित (फर्जी) रिपोर्ट प्रेषित करते हैं ताकि भ्रष्टाचार को छुपाया जा सके। करोड़ों की बेनामी संपत्ति का ब्योरा शिकायत पत्र में डॉ. अशोक चौधरी और उनके परिवार के नाम दर्ज कई अचल संपत्तियों और जमीनों के गाटा नंबरों का खुलासा किया गया है। दावा है कि यह संपत्ति भ्रष्टाचार के पैसों से खरीदी गई है।