बस्ती। विपिन शुक्ल पुत्र स्व. कंहैया प्रसाद जैसा नेता और कारोबारी अगर पांच करोड़ के ठगी का षिकार होतें हैं, तो इसे बहुत ही गंभीर माना जा सकता है। सवाल उठ रहा है, कि यह अब तक के सबसे बड़े ठगी के षिकार कैसे हो गए? जिस व्यक्ति के पास पूरी फौज रहती हो, अगर वह ठगी का षिकार होता है, तो पुलिस के लिए ठगबाज दंपत्ति को तलाशना एक चुनौती होगा, क्यों कि जो दंपत्ति एक व्यक्ति को पांच करोड़ का चूना लगा सकता है, उसने न जाने कितने को जमीन के नाम पर चूना लगाया होगा, और जिसके पास करोड़ों रुपया होगा, वह इस समय किस दुनिया में होगा, खबर लगाना कठिन होगा। जिस व्यक्ति को एक कुशल राजनीतिज्ञ और सफल कारोबारी माना जाता हैं, और जो एक बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुका हो, और दूसरी बार लड़ने की तैयारी कर रहा हो, अगर ऐसे व्यक्ति को ऐसा दंपत्ति लूटकर चला जाता है, जिसका नाम तो मालूम हैं, लेकिन पिता और कहां का रहने वाला हैं, नहीं मालूम, तो समझा जा सकता है, कि वह दंपत्ति कितना बड़ा ठगबाज और धोखेबाज हो सकता है। न जाने इस दंपत्ति ने कितनों को ठगा होगा। जमीन के मामले में तो रोज धोखाधड़ी का मुकदमा कायम होता है, लेकिन जिस तरह इस मामले में जहीर अहमद पुत्र और पता अज्ञात एवं शारदा कौसर पत्नी जहीर अहमद पता अज्ञात ने मिलकर नेताजी को ठगा वह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। ठगी का शिकार हो जाने के बाद जमीन के बारे में नेताजी को यह पता चलना कि जिस जमीन का सौदा फाइनल हो चुका है, और जिसका पांच करोड़ दिया जा चुका हो, सिर्फ बैनामा करना बाकी है, वह जमीन तो पहले ही बिक चुकी है, से लगता है, कि इस मामले में नेताजी से या तो कहीं बहुत बड़ी चूक हुई है, या फिर दंपत्ति अधिक चालाक निकला। वैसे भी मीडिया बार-बार जमीन के मामले में धोखाधड़ी से अवगत कराती आ रही है, और जागरुक कर रही हैं, कि बिना सोचे समझे और लालच में आकर सबकुछ मत गवांइए है।

विपिन शुक्ल पुत्र स्व. कंहैया प्रसाद की ओर से पुरानी बस्ती थाने में लिखाई गई एफआईआर में कहा गया कि ‘जेड स्क्वायर’ के निदेशक जहीर अहमद की पत्नी शारदा कौसर ने मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी किया। कहा कि दोनों मेरे घर पर कई बार आए और बताया कि शहर में व्यवसायिक जमीन है, इसमें निवेश करने पर बहुत फायदा होगा। जमीन का पेपर भी दिखाया, और जमीन का बैनामा करने के नाम पर पांच करोड़ नकद और आरटीजीएस से लिया। जब पैसा खाते में पहुंच गया तो बैनामा करने को कहा गया, आज कल करने के नाम पर टालते रहे। लिखा कि जब पेपर चेक किया तो पता चला कि जमीन पहले ही बिक चुकी है। जब यह बात उसके कार्यालय में जाकर बताया गया तो कहने लगे कि उसके बदले दूसरी जमीन बैनामा कर देगें, मेरे पास बहुत जमीन है। दूसरी जमीन भी नहीं दिया और पांच करोड़ लेकर चला गया। जमीन सहित अन्य का कारोबार करने वाले विपिन शुक्ल को अगर कोई ठगता है, इसका मतलब यह हुआ कि जिले में ठगों का गिरोह काम कर रहा है, जो उन्हीं लोगों को अधिक निशाना बना रहा है, जिनके पास पैसा है, और जो निवेश के जरिए पैसा कमाना चाहते है। एक पुलिस अधिकारी का कहना है, कि इस तरह ठगी करने वाले ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं, जिनके पास नैतिक/अनैतिक पैसा होता है। क्यों कि अधिकांश लोग ठगने के बाद भी इस लिए पुलिस के पास नहीं आते, क्यों कि उन्होंने जो पैसा दिया, वह दो नंबर का दिया, नकद दिया, जिसका कोई कानूनी वैधता नहीं होती। कहते हैं, कि षहर में ही अनेक लोग ऐसे हैं, जिनसे करोड़ो तो ले लिया, लेकिन वापस नहीं किया, ऐसे लोग न तो कोर्ट और न पुलिस के पास जा सकतें है। कहते हैं, कि अक्सर वही लोग ठगी का शिकार होते हैं, जिन्हें शार्ट कट के जरिए पैसा कमाने की जल्दबाजी रहती है, ऐसे लोग कहीं के भी नहीं रहते, या तो ऐसे लोग डिप्रेशन में चले जात हैं, या फिर आत्महत्या कर लेते है।