बस्ती। प्रेमबहादुर सिंह के परिवार वाले कभी सोचे भी नहीं होगें, उनका बेटा पेंशन स्वीकृति के नाम पर ऐसी महिला से घूस मांगेगा, जिसका पति अब इस दुनिया में नहीं रहा, और जिसका जीवन यापन गांव वालों के रहमोकरम पर हो रहा है। अगर किसी भी इंसान के भीतर इतनी भी संवेदना नहीं हैं, तो उसे चूल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए, लेकिन प्रेमबहादुर सिंह और प्रमोद कुमार मिश्र जैेसे लोगों को विधवाओं से घूस मांगते हुए शर्म नहीं आती, इस तरह के लोग घूस को भगवान का प्रसाद और आरर्शिवाद समझकर ग्रहण करते है। प्रेमबहादुर सिंह जैसे लोगों की संवेदना उसी दिर मर जाती है, जब यह लोग पारिवारिक पेंशन के नाम पर पैसा मांगते है, और जब इन्हें पैसा नहीं मिलता तो यह मामले को ऐसे वित्त विभाग में भेज देते हैं, जिससे कोई सरोकार नही। यह लोग कभी बर्दास्त ही नहीं कर सकते कि कोई इन्हें घूस देने से इंकार करें। ऐसा लगता है, कि मानो इनके परिवार का भरण-पोषण इनके वेतन से नहीं बल्कि घूस के पैसे से होता हो। मामला पीएचसी बहादुरपुर में सफाई कर्मी के रुप में कार्य करने वाले स्व. तबारक अली की पत्नी लतीफुल का है। यह विधवा पेंशन के लिए लगभग एक साल से प्रेमबहादुर सिंह के पास परिवार रजिस्टर की नकल, वारिश प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, परिवार नकल भाग-3 और भाग दो एवं बैंक पासबुक लेकर भटक रही है। लेकिन प्रेमबहादुर सिंह यह कहते हैं, कि हम कैसे मान लें कि तुम ही तबारक अली की विधवा पत्नी हो, क्यों कि मुसलिम वर्ग में कई शादियां होती है, महिला ने बाबू को बहुत समझाया और चिल्ला-चिल्ला कर कहा कि वह ही लीगल पत्नी हैं, अगर वह लीगल पत्नी न होती तो डीएम साहब प्रमाण-पत्र नहीं देते, लेकिन प्रेम बहादुर सिंह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं, इन्हें इस बात का भी एहसास नहीं हुआ कि अगर महिला को पेंशन नहीं मिलेगी तो इसकी बाकी की जिंदगी कैसे कटेगी? महिला सेवा निवृत्ति कर्मचारी एवं पेषनर्स एसोसिएशन के कार्यालय भी गई, और इसके अध्यक्ष नरेद्रनाथ उपाध्याय से मिलकर अपनी व्यथा भी कही, अध्यक्ष की ओर से सीएमओ को पत्र भी लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं, जब फोन से बात किया तो प्रेमबहादुर सिंह ने कहा कि मामले को वित्त विभाग को भेज दिया गया, जब पूछा गया कि मामला तो सीएमओ कार्यालय का है, तो क्यों वित्त विभाग को भेज दिया? कोई जबाव नहीं दिया, फिर अध्यक्ष ने डीएम को लिखा है। इससे पहले महिला सीडीओ की अध्यक्षता में आयोजित पेंशनर दिवस में भी अर्जी लगाया, फिर भी कुछ नहीं हुआ, अब जबकि मामले को वित्त विभाग भेज दिया गया तो भगवान ही मालिक है। प्रेम बहादुर सिंह अगर यही मामला आपके घर या परिवार का होता तो भी आप परिवार से घूस मांगते? या फिर मामले को वित्त विभाग भेज देते। कुछ तो शर्म कीजिए, कहीं ऐसा न हो कि इसका खामियाजा आप को या फिर आपके परिवार को भुगतना पड़े। अब सवाल उठ रहा है, कि क्या लतीफुल के जीते जी पेंशन मिल पाएगा? महिला के पति की मृत्यु 25 मार्च 25 को हुई।
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