विधायक के फार्म हाउस पर जाने के लिए गंदे जल भराव में जन समस्या सुनाना पड़ा भारी

गंगा की बाढ़ हर साल आती है,नालों को नहीं हुई सफाई

ओमप्रकाश गौतम

गढ़मुक्तेश्वर: समय रहते सिस्टम और जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाते और गंदे नालों की सफाई होती तो हर साल खादर क्षेत्र क्यों डूबे। गंगा के बाढ़ में खादर क्षेत्र डूब गया तो जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। किसान की फसल बर्बाद हो गई। बतादें की बारिश के मौसम में हर साल गंगा अपने रौद्र रूप में आती है तो नालों की सफाई नहीं होने पर गंगा की बाढ़ में त्राहिमाम के हालत बनते है।  इस साल भी खादर के दो दर्जन गांवों के जंगल डूब गया कई गांवों की आबादी में पानी घुस गया तो जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। हजारों बीघे किसान की लौकी, तुरई,चारे की फसल गंगा बाढ़ की भेंट चढ़ गई। 
डबल इंजन की सरकार में आखिर किसान की इस तबाही का जिम्मेदार कौन है? खादर की करीब बीस लाख की आबादी की बरबादी का कोई जिम्मेदार होता तो किसान की फसल के नुकसान की भरपाई कराई जाती मगर ऐसा नहीं होता है। जबकि सरकार किसान की फसल के नुकसान की भरपाई का हर साल प्रदेश स्तर पर दावा करती है। 

सिस्टम की अनदेखी 

दैनिक तेजयुग न्यूज़

नक्का कुआं के पास गंदा नाला में कचरा

जनपदीय आला अधिकारियों को समय पर चेताया जाता है।   गत वर्ष तो तत्कालीन जिला अधिकारी अभिषेक पांडे ने बाढ़ ग्रस्त इलाके में गंदे पानी में घुसकर किसान की दुर्दशा को देखा था। जंगल में बरसाती नालों और नगर सहित आबादी के नालों की सफाई के लिए चेताया गंगा के रौद्र रूप कहकर टाल दिया गया। 

क्या कहते है किसान

बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों ने बताया कि खादर के किसानों का करोड़ों की फसल का नुकसान हो गया। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को हर साल बताया जाता है। ग्राम प्रधान, एमएलए और एमपी को किसानों की दुर्दशा नजर नहीं आती है। चुनाव के समय जात,धर्म में फंसा कर जीत जाते है और अपनी जिम्मेदारी से दूर हो जाते है। 

विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया और धनौरा विधायक राजीव तरारा ने अपने अपने विधान सभा क्षेत्र की समीक्षा बैठक में गंगा पुल का निर्माण कराए जाने को उठाया तो मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को स्वयं का बताया गया मगर हर साल होने वाली किसानों की परेशानी कम नहीं हुई।