बस्ती। कहना गलत नहीं होगा कि नगर पंचायत हर्रैया भाजपा के लिए एक प्रयोगषाला बनकर रह गया है। इसी प्रयोगशाला से मनोनीत सभासद गांजा/स्मैक तस्कर दीपक चौहान, रवि गुप्त और गीता वर्मा निकली है। जिस तरह भाजपा के लोगों ने गांजा और स्मैक के क्षेत्र में विशेषज्ञ माने जाने वाले और बाहरी लोगों को सभासद मनोनीत कराया, वह नगर पंचायत हर्रैया के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा। यह भी लिखा जाएगा कि किस तरह बहुरुपिया मनोनीत सभासद रवि गुप्त को बेआरु होकर शपथ ग्रहण सामारोह से निकलना पड़ा। इन्हें इस लिए षपथ नहीं दिलाया गया, क्यों कि यह बहुरुपिया है, और इनका नाम दो वोटर लिस्ट में अलग-अलग है। मनोनीत हुए रवि गुप्त पु़त्र आशाराम के नाम से और वोटर लिस्ट में षनि कुमार पुत्र आषाराम से। मीडिया की खबरों को संज्ञान में लेकर जब इनके असली नाम की पड़ताल की गई तो दो नाम सामने आया। जिसके चलते एसडीएम सत्येंद्र कुमार सिंह ने षपथ नहीं दिलाया, और शासन को लिखने का निर्देष दिया। दीपक चौहान और रवि गुप्त के बारे में कौन नहीं जानता कि यह किस क्षेत्र के विषेषज्ञ है। रही बात तीसरे मनोनीत सभासद गीता वर्मा की तो इनका भी मनोनय गलत हुआ, क्यों कि यह नगर पंचायत हर्रैया क्षेत्र की निवासी ही नहीं है। यह हर्रैया में एक डेढ़ साल से मकान बनवाकर अपने टीचर पति के साथ रहती है। इनका मूल निवास थाना परसरामपुर के ग्राम सिंकदरपुर है। इस तरह देखा जाए तो तीनों मनोनीत सभासद का मनोनयन संदेह के घेरे में हैं, और इसके लिए पूरी तरह जिलाध्यक्ष और कोर कमेटी के सदस्यों को जिम्मेदार माना जा रहा है। जरा अंदाजा लगाइए कि मनोनयन की सूची जिले से होते हुए शासन तक चली गई, राज्यपाल और सीएम की संतुष्टि भी हो गई, लेकिन किसी ने नाम, पता और चरित्र का सत्यापन करना जरुरी नहीं समझा। उन्हीं सभासदों को मनोनीत करने का प्राविधान हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ होतें हैं, ताकि उसका लाभ नगर पंचायत/पालिका को अनुभव के रुप में मिल सके। सोचकर देखिए कि गांजा और स्मैक तस्करों से नगर पंचायत हर्रैया को क्या लाभ होगा? क्या यह लोग नशे के बारे में बताएगें कि किस तरह और किसका नशा करने से मजा आता है, या घर बर्बाद होता हैं? या फिर गांजा और स्मैक की तस्करी करने से कितना और क्या-क्या लाभ होता? जो इस क्षेत्र की महिला ही नहीं और जिसके पास कोई विशेषता नहीं, वह क्या अपना अनुभव साझा करेगी। एक बहुरुपिया मनोनीत सभासद से आखिर नगर पंचायत हर्रैया को क्या लाभ हो सकता है? इनसे लाभ यह हो सकता है, कि किस तरह बहुरुपिया बनकर फ्राड किया जा सकता। हर्रैया के मामले में पूरी तरह जिलाध्यक्ष और इनके आका के साथ हुड़वा कुंवर के बाबू साहब को जिम्मेदार माना जा रहा है। कहना गलत नहीं होगा, कि इन लोगों ने मिलकर नगर पंचायत हर्रैया के बोर्ड को मजाक बनाकर रख दिया है। यह मजाक 2027 में कितना भारी पड़ सकता है, इसका अंदाजा शायद मनोनीत करने में अहम भूमिका निभाने वाले को भी नहीं होगा। मनोनीत सभासदों को लेकर भाजपा की जग हंसाई हो रही है। इतिहास में पहली बार मनोनीत सभासद को शपथ ग्रहण समारोह से बिना शपथ लिए वापस जाना पड़ा। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम होगी। रवि गुप्त के बारे में जब छानबीन हुई तो पता चला कि नगर पंचायत हर्रैया के वोटर लिस्ट में वार्ड नंबर दो मनोरमा नगर के वोटर लिस्ट के क्रम संख्या 998 पर रवि कुमार पुत्र आशाराम उम्र 19 साल और वार्ड नंबर सात के हनुमानगढ़ी नगर के मतदाता सूची के क्रम संख्या 629 पर षनि कुमार पुत्र आशाराम उम्र 31 साल का नाम दर्ज है। दोनों वार्डो के बीच की दूरी मात्र 100 मीटर है। भाजपा ने एक ऐसे समर्पित कार्यकर्त्ता को सभासद मनोनीत कर दिया, जो भाजपा प्रत्याशी धमेंद्र कुमार के खिलाफ 2017 में सभासदी का चुनाव लड़ा, और जिसके चलते भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह ने मिलकर अगर एक ऐसे व्यक्ति को सभासद मनोनीत करवाने में सहयोग किया, जो पार्टी का विरोधी रहा, और जिसके चलते पार्टी का प्रत्याशी हार गया, अगर इन लोगों को वाकई पार्टी के प्रति वफादारी दिखानी थी, तो हारे हुए और कर्मठी कार्यकर्त्ता धमेंद्र कुमार को मनोनीत कराते, तब पार्टी और कार्यकर्त्ता के प्रति इन लोगों की ईमानदारी दिखाई देती, लेकिन यहां पर तो किसी ने भी कार्यकर्त्ता के प्रति ईमानदारी ही नहीं दिखाया, बल्कि ऐसे के प्रति ईमानदारी दिखाया, जिसका नाम गांजा और स्मैक के कारोबार से जुड़ रहा है। भाजपा के लोगों ने ऐसे को सभासद मनोनीत कराने में उर्जा लगा दिया, जो बहुरुपिया हैं, और जिसने नाम बदल कर मतदाता सूची में कभी रवि कुमार तो कभी शनि कुमार दर्ज करवाया। अब तो इनके पास दो-दो आधार कार्ड के होने की संभावना जताई जा रही है, क्यों कि अगर इनके पास दो आधार कार्ड नहीं होता तो इनका नाम अलग-अलग पते से दो स्थानों पर दर्ज नहीं होता। एसडीएम के सामने यह बात आई कि नगर पंचायत हर्रैया जब इनके यात्रा भत्ता के नाम पर मिलने वाला एक हजार रुपया भेजेगा तो किसके खाते में भेजेगा, रवि कुमार या फिर षनि कुमार?