बस्ती। सभासदों को मनोनीत कराने में सहयोग करने वाले भाजपा के नेता फंसते जा रहे हैं, पहले यह लोग गांजा और स्मैक तस्कर एवं कार्यकर्त्ता का हक मारने वाले को मनोनीत कराने में फंसे और अब एक ऐसे बहरूपिया को सभासद मनोतीन कराने के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं, जिसका नाम वोटर लिस्ट में अलग-अलग है। कहीं शनि कुमार है, तो कहीं रवि कुमार। असली कौन है, इसका पता नहीं चला। नगर पंचायत हर्रैया के वोटर लिस्ट में वार्ड नंबर दो मनोरमा नगर के वोटर लिस्ट के क्रम संख्या 998 पर रवि कुमार पुत्र आशाराम उम्र 19 साल और वार्ड नंबर सात के हनुमानगढ़ी नगर के मतदाता सूची के क्रम संख्या 629 पर शनि कुमार पुत्र आशाराम उम्र 31 साल का नाम दर्ज है। दोनों वार्डो के बीच की दूरी मात्र 100 मीटर है। भाजपा ने एक ऐसे समर्पित कार्यकर्त्ता को सभासद मनोनीत कर दिया, जो भाजपा प्रत्याशी धमेंद्र कुमार के खिलाफ 2017 में सभासदी का चुनाव लड़ा, और जिसके चलते भाजपा प्रत्याषी को हार का मुंह देखना पड़ा। पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह ने मिलकर अगर एक ऐसे व्यक्ति को सभासद मनोनीत करवाने में सहयोग किया, जो पार्टी का विरोधी रहा, और जिसके चलते पार्टी का प्रत्याशी हार गया, अगर इन लोगों को वाकई पार्टी के प्रति वफादारी दिखानी थी, तो हारे हुए और कर्मठी कार्यकर्त्ता धमेंद्र कुमार को मनोनीत कराते, तब पार्टी और कार्यकर्त्ता के प्रति इन लोगों की ईमानदारी दिखाई देती, लेकिन यहां पर तो किसी ने भी कार्यकर्त्ता के प्रति ईमानदारी ही नहीं दिखाया, बल्कि ऐसे के प्रति ईमानदारी दिखाया, जिसका नाम गांजा और स्मैक के कारोबार में जुड़ रहा है। भाजपा के लोगों ने ऐसे को सभासद मनोनीत कराने में उर्जा लगा दिया, जो बहरूपिया हैं, और जिसने नाम बदल कर मतदाता सूची में कभी रवि कुमार तो कभी शनि कुमार दर्ज करवाया। अब तो इनके पास दो-दो आधार कार्ड के होने की संभावना जताई जा रही है, क्यों कि अगर इनके पास दो आधार कार्ड नहीं होता तो इनका नाम अलग-अलग पते से दो स्थानों पर दर्ज नहीं होता। सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, कि क्या भाजपा जिलाध्यक्ष पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएगें कि बहरूपिया के खिलाफ? एक बात और हैरान करने वाली हैं, 2017 के चुनाव में मनोनीत सभासद रवि कुमार मनोरमा नगर से शनि कुमार के नाम से चुनाव लड़े थे, और इन्हें 63 एवं भाजपा प्रत्याशी धमेंद्र कुमार को 87 वोट मिला था, यानि धमेंद्र कुमार को शनि कुमार से 24 वोट अधिक मिले, फिर भी रवि कुमार/शनि कुमार के आकाओं ने अधिक वोट पाने वाले और स्नातक प्रत्याशी धमेंद्र कुमार को सभासद न मनोनीत करवाकर कम वोट पाने और जूनियर हाई तक की शेक्षिक योग्यता रखने वाले रवि गुप्त को सभासद मनोनीत करवा दिया। अब सवाल उठ रहा है, कि नगर पंचायत हर्रैया जब इनके यात्रा भत्ता के नाम पर मिलने वाला एक हजार रुपया, किसके खाते में भेजेगा, रवि कुमार या फिर शनि कुमार? जाहिर सी बात हैं, कि अगर दो नाम हैं, तो खाता भी अलग-अलग नाम से होगा। पार्टी को धोखा देने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ तो पार्टी को मुकदमा दर्ज करवाना चाहिए। मनोनीत हुए रवि कुमार के नाम से और पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़े शनि कुमार के नाम से।
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