बस्ती। विधुत सामान बनाने वाली ‘एंकर कंपनी’ अपने ग्राहकों के जीवन के साथ खिलवाड़ रही है। ग्राहकों की सुरक्षा करने को कौन कहे, बल्कि उन्हें असुरक्षित कर दे रही है। क्वालिटी कंटोल करने के नाम पर इसके अधिकारी हर माह कंपनी से लाखों रुपया वेतन तो ले रहें हैं, लेकिन यह क्वालिटी कंटोल वाले बाजार में यह तक देखने नहीं आते हैं, कि उनकी कंपनी के नाम पर डुप्लीकेट वायर और स्वीच सहित सामान क्यों बिक रहा है? और जिसका इस्तेमाल करके ग्राहक का शार्ट सर्किट के कारण प्रतिष्ठान जल रहा हैं, या फिर डुप्लीकेट स्वीच के चलते बड़े और बच्चों को बिजली का करंट लग रहा है। कंपनी के क्वालिटी कंटोल की टीम के कारण जहां कंपनी का सेल कम हो रहा है, वहीं जीएसटी की चोरी भी हो रही है। डुप्लीकेसी के चलते करोड़ों रुपया लगाने वाला डिस्टीब्यूटर रो रहा है। उसके खर्चे नहीं निकल रहे हैं, बैंक से लिए गए कर्ज की अदायगी कौन कहे, ब्याज भरते-भरते पूंजी टूट जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर बिजली के दुकानों पर एंकर कंपनी का डुप्लीकेट सामान मिल रहा है। चूंकि एंकर के ओरिजनल और डुप्लीकेट सामानों के रेट में दुगने का अंतर रहता है, इस लिए डुप्लीकेट सामान बेचने में डीलर को फायदा होता और डिस्टीब्यूटर का सेल कम होता है। जब सेल कम होगा तो टारगेट पूरा नहीं होगा, और जब टारेगेट पूरा नहीं होगा, तो डिस्टीब्यूटर का नुकसान होगा। अगर कंपनी और डिस्टीब्यूटर के लाभ और हानि को छोड़ भी दिया जाए तो सबसे बड़ा नुकसान ग्राहकों का होता है, चूंकि आजकल अंडरग्राउंड ही वायरिगं हो रहा हैं, और ग्राहक यह सोचकर एंकर कंपनी का वायर और स्वीच लेता है, कि इसकी क्वालिटी अन्य की अपेक्षा ठीक रहती है, इसी लिए ग्राहकों को अधिक दाम देने में भी कोई संकट नहीं होता, क्यों कि सवाल परिवार और करोड़ों के मकान की सुरक्षा का जो रहता है। मगर, ग्राहकों को क्या मालूम कि वह जिस एंकर कंपनी का समझ कर सामान खरीद रहा है, वह डुप्लीकेट एंकर कंपनी का है। जिसका खामियाजा उसे षार्ट सर्किट से होने वाले नुकसान के रुप में भुगतना पड़ता हैं, इसी नुकसान के चक्कर कभी-कभी जनहानि भी हो जाती हैं, और यह सबकुछ एंकर का डुप्लीकेट सामान खरीदने के कारण होता हैं, और जिसकी सारी जिम्मेदारी कंपनी और उसके क्वालिटी कंटोल टीम की होती है, जो एसी से बाहर निकलती ही नहीं है, यह तभी एसी से बाहर निकलते हैं, जब इनका सेल कम हो जाता है, या फिर कोई शिकायत करता है। एक दिन पहले बस्ती जिले के महसों में जिस तरह एंकर कंपनी का बड़ी मात्रा में डुप्लीकेट सामान पकड़ा गया, उससे लगता है, कि कंपनी का क्वालिटी कंटोल सो रहा है।
एक अनुमान के अनुसार बस्ती जिले में एंकर कंपनी का वायर और अन्य सामान लगभग 48-50 करोड़ का कारोबार होता है। सरकार को इससे जीएसटी के रुप में लगभग 9 करोड़ मिलना चाहिए। इसमें लगभग 10 करोड़ का डुप्लीकेट सामान बिकता है, जिसमें जीएसटी के रुप में सरकार को लगभग दो करोड़ का नुकसान हुआ। जनपद सिद्धार्थनगर का डुमरियांगज और बंासी एवं जनपद गोंडा का नवाबगंज क्षेत्र डुप्लीकेट एंकर कंपनी की विक्री का केंद्र बना हुआ है। न जाने क्यों कंपनी के क्वालिटी कंटोल वालों की नजर इन क्षेत्रों पर नहीं पड़ती? फिर कहा जा रहा है, कि बात डुप्लीकेट सामानों की विक्री नहीं हैं, बात हैं, शार्ट सर्किट से होने वाले सामान और जनहानि की। अब सवाल उठ रहा है, कि जब एंकर कंपनी का ओरिजनल स्वीच का दाम 37-40 रुपया है, और डुप्लीकेट का 15-19 रुपया, तो डीलर क्यों एंकर का ओरिजनल स्वीच बेचेगा, वह तो वही स्वीच बेचेगा जिसमें उसे अधिक लाभ होगा। इसी तरह एकंर कंपनी का वायर एक एमएम का दो हजार रुपया बंडल हैं, और वहीं पर डुप्लीकेट का एक हजार। बतातें हैं, कि रा मैटेरिएल का दाम बढ़ने से सामानों के दाम भी बढ़ रहे है। जिसका लाभ डुप्लीकेट सामान बनाने वाले उठा रहें है। एक आम ग्राहक कभी ओरिजनल और डुप्लीकेट सामान का अंतर ही नहीं समझ पाएगा। इसकी समझ उसे तब होती, जब षार्ट सर्किट से घर में आग लगती हैं, या फिर स्वीच से बच्चों को करंट मारता। कहा जाता है, कि जब तक क्वालिटी कंटोल टीम की छापेमारी नहीं होगी, और एफआईआर दर्ज नहीं होगा, तब तक डुप्लीकेट सामान बिकते रहेगें। चंूकि सबसे अधिक एंकर कंपनी के सामानों की डुप्लीकेसी हो रही है, और सबसे अधिक इसी कंपनी के ग्राहक प्रभावित हो रहे हैं, इस लिए जिम्मेदारी भी सबसे अधिक एंकर कंपनी की ही बनती है। एंकर कंपनी के टेरीटरी मैनेजर सेल अंकित मिश्र, ग्राहकों को सलाह दे रहे हैं, कि आप लोग तब भी एंकर कंपनी का वायर या स्विीच सहित अन्य सामान खरीदते हैं, प्रोडक्ट के बाक्स पर लगे कंपनी के स्कैनर को मोबाइल से स्कैन कर ले, उसमें मानक का विवरण मिल जाएगा, लेकिन अगर एंकर का डुप्लीकेट सामान हुआ तो स्कैन करने के बाद भी वह स्कैन नहीं करेगा।
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