बस्ती। संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में आउंटसोर्सिगं के नाम पर बहुत बड़ा खेल का खुलासा हुआ। जब इस बात का पता चला तो कमिश्नर ने आदेश को निरस्त करते हुए जांच कमेटी का गठन किया। जांच कमेटी ने भी इसके लिए जेडीई को ही जिम्मेदार माना। जांच टीम द्वारा दिनांक 18 फरवरी को मुख्य कोशाधिकारी बस्ती संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा बस्ती मंडल के साथ शिकायतकर्ता की शिकायत को सुनते हुए जांच की गई है। इस संबंध में जांच समिति द्वारा पत्र संख्या 825 दिनांक 19 मार्च 2026 के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। जांच टीम ने पहली नजर में गड़बड़ी निकाली। स्पष्ट कहा गया कि बिड में शिकायत करता के साथ-साथ अन्य फर्म अंतिम रूप से प्रचलित बिड के शर्तों के अनुसार तकनीकी रूप से योग्य नहीं पाई गई। निविदा में कई बिंदुओं पर अनियमितता किये जाने की पुष्टि हुई। जिससे स्पष्ट पता चल रहा है कि जो निविदा विभाग द्वारा आमंत्रित की गई थी उसमें पारदर्षिता नहीं बरती गई है। इसलिए कमिश्नर ने संयुक्त शिक्षा निदेशक बस्ती मंडल को यह निर्देशित किया है कि पूर्व में की गई निविदा को निरस्त करते हुए दोबारा फिर नियमानुसार निविदा आमंत्रित करते हुए अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित कराये और इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए हैं कि दोशी के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए कृत कार्रवाई से उन्हें भी अवगत कराया जाए।गौरतलब है कि अग्रिम निविदा कार्रवाई पूर्ण होने तक जो मानदेय को लेकर लड़ाई चल रही थी उन बच्चों को मानदेय नियमानुसार दिए जाने का भी निर्देश आयुक्त ने दिया है। इसके अलावा जांच आख्या में जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें फर्म द्वारा धरोहर राशि की मूल प्रति कार्यालय में जमा नहीं की गई। इस दौरान जांच में पता चला कि फर्म द्वारा चेक संख्या 001571 दिनांक 19 नवंबर 2025 के द्वारा 536000 516 रुपए का डीडी बैंक द्वारा प्रिंटेड स्कैन कॉपी पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इसके अलावा तीन अन्य सेवा प्रदाता फॉर्म का भी डीडी बैंक द्वारा प्रिंटेड स्कैन कॉपी को समिति ने जांच करते हुए उसे भी तकनीकी निविदा फाइनेंशियल निविदा में ऑटो रन हेतु योग्य पाया। मूल पत्रावली के अवलोकन में पाया गया कि विभागीय बीट ने जेम पोर्टल बी 6869901 की एकाउंट के अनुसार अर्नेस्ट मनी की धनराशि मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के पक्ष में एफडीआर अथवा डीडी के रूप में होनी चाहिए परंतु संबंधित फार्म द्वारा चेक संख्या 001571 दिनांक 19 नवंबर 2025 के माध्यम से अर्नेस्ट मनी की स्कैन कॉपी बेड के साथ अपलोड की गई थी। परंतु हार्ट कॉपी बिड में निर्धारित समय अंतर्गत प्रस्तुत नहीं कार्य किया गया। इसलिए विभाग की की शर्तों के अनुसार उक्त फॉर्म तकनीकी रूप से फर्म यानी महिश इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ तकनीकी रूप से योग्य नहीं पाई गई। इसके अलावा जांच बिंदु संख्या तीन में फर्म का टर्नओवर भी फर्जी पाया गया।