बस्ती। योगीजी के मंत्रियों को न तो बात करने का सलीका मालूम और न जनता के प्रति इनका नजरिया ही ठीक रहता। रही बात मीडिया की तो इनका बस चले तो यह सवाल पूछने वाले पत्रकारों को जेल में डाल दें। जो मंत्री सवाल न पूछने के लिए पत्रकार को लालच दे, वह मंत्री अगर किसान नेताओं को फ्राड और मक्कार कहता तो समझ सकते हैं, कि योगीजी के मंत्रीजी योगीजी की नैया डूबोने कोई कसद नहीं छोड़ रहे है। इन्हीं में पहले नंबर पर ओमप्रकाश राजभर, दूसरे नंबर पर सूर्य प्रताप शाही और तीसरे नंबर पर संजय निषाद और भी न जाने कितने मंत्री है, जिनका एजेंडा ही भाजपा और योगीजी को कमजोर करने का है। भाकियू के जिला उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी जब जिला कृषि अधिकारी के भ्रष्टाचार का मामला लेकर पहुंचा और कार्रवाई करने की मांग की तो मंत्रीजी ने कहा कि जितने भी किसान नेता है, सब फ्राड और मक्कार है। मंत्रीजी से जब उमेश से उसका का नंबर मांगा तो उमेश ने कहा कि षिकायत पत्र में नंबर लिखा हुआ है, तो मंत्रीजी ने कहा कि बहुत तेज हो, इसपर उमेश गोस्वामी ने कहा कि हम्हें भी मंत्री बनना है। बहरहाल, मंत्रीजी ने जिला कृषि अधिकारी को फोन मिलाया, लेकिन पता चला कि डीओ परीक्षा में व्यस्त है। तब मंत्रीजी ने कहा कि जाओ जिला कृषि अधिकारी आप को फोन करेगें। जब मंत्रीजी ने कहा खाद तो इफराद है, तो उमेश ने कहा कि जब सारा खाद जिला कृषि अधिकारी ब्लैक कर ले रहे हैं, तो किसानों को कहां से खाद मिलेगा? कहा कि साहब के संरक्षण में 266 रुपया का यूरिया किसानों को 300 से 320 रुपये में मिल रहा है। कहा कि डीएपी का भी यही हाल है। कहा कि मंत्रीजी जिस जिला कृषि अधिकारी का तबादला आप ने ईमानदार बताकर रोक और बाबूओं को बेईमान बताकर कर दिया, वह अधिकारी 100 रुपया बोरी कमीशन ले रहा। जिसके चलते दुकानों पर 500 रुपया तक यूरिया बिक रहा है। कहा कि मंत्रीजी खाद तो गुंडों, नेताओं  और प्रधानों में बांट दिया जाता है। कहा कि मंत्रीजी इस बात की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, कि क्यों प्राइवेट के दुकानों पर यूरिया 500 रुपया में बिक रहा है, और इसमें जिला कृषि अधिकारी कितना कमीशन लेते है। जोर देकर कहा कि जब तक जिला कृषि अधिकारी बाबूराम मौर्य जिले में रहेगें, तब तक किसानों को उचित दर पर खाद नहीं मिल सकता है। कहा कि अधिकारी तो यहां तक कहते हैं, कि जब कमीशन उपर तक पहुंचाना पड़ता है, तो खाद मंहगी बिकेगी ही। जिला कृषि अधिकारी को जिले से हटाने और खाद का ब्लैक करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। खाद की कालाबाजारी और जिला कृषि अधिकारी के भ्रष्टाचार का मामला किसान नेता ‘दिषा’ की बैठक में भी उठा चुके हैं, जहां पर सीडीओ को भ्रष्ट अधिकारियों का बचाव करते देखा गया। अब आप लोग समझ ही गएं होगें कि मंत्रीजी क्यों जिला कृषि अधिकारी पर इतना मेहरबान हैं? प्रदेश का यह पहला ऐसा विभाग होगा, जहां के चपरासी से लेकर वाहन चालक और बाबू से लेकर साहब तक भ्रष्टाचार में लिप्त रहते है, और इन सबके लिए कृषि मंत्री और योगीजी के खास सूर्य प्रताप षाही के संरक्षण में हो रहा है।