बस्ती। दो दिन पहले एक खबर आई थी, जो ‘दस दिन बाद पैदल हो जाएगें संजय चौधरी’ शीर्षक नाम से प्रकाशित हुई थी। इसे लेकर लोगों ने सोषल मीडिया पर एक हजार से अधिक कमेंट लिखें। किसी ने लिखा कि दस दिन क्यों पांच दिन में ही पैदल हो जाए। किसी ने इन्हें अब तक सबसे ईमानदार जिला पंचायत अध्यक्ष कहा, किसी ने कहा कि यह पैदल क्यों होगें इनके लिए तमाम सवांरियां है। किसी ने लिखा कि बिल्कुल सटीक टिपणी, आजकल बहुत कम मीडिया संस्थानों को ऐसी बेबाकी से टिपणी करने की हिम्मत होती है। किसी ने कहा कि पैदल चलेगें तो सेहत भी अच्छी रहेगी। किसी ने यहां तक लिखा कि इनके पास चलने के लिए हाथी और साइकिल दोनों विकल्प...रुधौली से अभी भी कमल पर बैठकर तैरने की सोच रहे है। किसर ने लिखा कि आप क्यों परेषान हैं, साइकिल पर बैठकर लखनउ निकल लगें, अवसरवादी लोग हैं ये। पहली बार किसी नेता के बारे में इतने कमेंट आए होगें। अगर सभी कमेंट को लिख दिया जाए तो पूरा अखबार भर जाएगा।

सत्यवीर चौधरी लिखते हैं, कि इन्हें तो पैदल होना ही था। राजेंद्र प्रजापति कहते हैं, कि पूरे प्रदेश के अध्यक्ष 12 जुलाई 26 से पैदल हो जाएगें। भक्कू प्रधान लिखते हैं, ऐसे अध्यक्ष को दस दिन नहीं पांच दिन पहले पैदल हो जाना चाहिए। षिवकेषरी वर्मा कहते हैं, कि अरे भाई खमरिया चौराहें पर जो परसरामपुर में स्थित हैं, वहां भी अध्यक्षजी आए थे, रोड के दोनों तरफ जिला पंचायत से एक करोड़ का बजट दे गए, बिदाई का समय आ गया लेकिन आज तक नाली का निर्माण नहीं हुआ। राजू तिवारी बादषाह लिखते हैं, कि इनका भी चुनाव आम जनता से हो जाए भूत और भविष्य सबपता चल जाएगा। संजय चौधरी लिखते हैं, कि जब आदरणीय पैदल हो जाएगें तो हमे बताना हम उन्हें साइकिल से रिसीव करके फारचूनर पर बैठाकर देगें, अब तो खुश। ओमप्रकाश धर द्विवेदी लिखते हैं, कि बिल्कुल सही कहा, इन्होंने अपने परिवार और जाति का विकास किया, बस्ती को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ा, ईष्वर इनकी आत्मा को शांति दे। दिनेश भारती लिखते हैं, कि इसी लिए ये सपा के नेताओं के साथ है। रक्षाराम चौधरी लिखते हैं, कि यह तो समय का तकाजा है, कभी कोई पैदल चलता, तो कभी फारचूनर से, जनता जब चाहेगी जनप्रतिनिधि रहेगें नहीं चाहेगें तो नहीं रहेगें। राम तीरथ चौधरी लिखते हैं, कि संजय चौधरी जैसे थे, वैसे रहेगें, वह बेदाग और ईमानदार छवि के अध्यक्ष है। सुनील कुमार ़ित्रपाठी लिखते हैं, यही नहीं बहुत लोग पैदल हो जाएगें, तानाषाह लोग भी पैदल होगें। विजय वर्मा लिखते हैं, यह सभी के बीच रहते हैं, वक्ती नेता है, चेयरमैनी तो इन्हें बाई लक मिला। कौशल उपाध्याय, संजय चौधरी को रुधौली का भावी विधायक बताया। आशीश कुमार लिखते हैं, कि इससे पहले बहुत जिला पंचायत अध्यक्ष आए और चले गए, लेकिन संजय चौधरी जितना बेहतरीन और ईमानदार कोई नहीं आया, इन्हें बस्ती में कोने-काने के लोग जानते हैं, और जितने गए, उन्हें कोई नहीं जानता, अब इनको विधानसभा का टिकट मिलना चाहिए। विवेक चौधरी लिखते हैं, कि इनसे अच्छा अध्यक्ष आज तक कोई नहीं आया, मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूं, रही बात संजय के ताकत की और वोहदा की तो उसमें कोई कमी नहीं, यह तलवे चाटकर गुलामी नहीं करते, जो भी किया अपने दम पर किया, इन्होंने ऐसे लोगों को उनकी औकात को दिखाया जो पार्टी में धुरंधर माने जाते थे। अष्वनी पांडेय लिखते हैं, और दावा करते हैं, कि संजय चौधरी जिले के दूसरे रामप्रसाद चौधरी बनना चाहते हैं, परंतु कुर्मी बिरादरी इनको सीरिएस नहीं लेती, मुझे नहीं लगता कि भाजपा इन्हें टिकट देगी। ग्राम प्रधान संगठन जो सही कमेंट करने के लिए जाने जाते हैं, ने कहा कि इनके पास चलने के लिए हाथी और साइकिल दोनों विकल्प है...रुधौली से अभी भी कमल पर बैठकर तैरने की सोच रहे है। अंकुर कुमार शुक्ल लिखते हैं, कि आप क्यों परेशान हैं, साइकिल पर बैछकर निकल लेगें लखनउ अवसरवादी लोग है। सूर्य बलि सिंह कहते हैं, कि एक बार की बात हैं, भाजपा की बैठक चल रही थी, राजेंद्रनाथ तिवारी महामंत्री थे, शीतला प्रसाद सिंह अध्यक्ष थे, कोई प्रकरण आया तो संजय चौधरी ने कहा कि डीएम तो हमको बहुत मानतें हैं, जब कि डीएम राजेंद्रनाथ तिवारी का विरोध कर रहे थे, इससे नाखुष होकर अध्यक्ष ने संजय से कहा कि तुरंत मीटिगं से बाहर निकल जाओ, बाहर चले गए।]