बस्ती। अगर ‘दिशा’ की बैठक में एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह मामले को न उठाए होते तो किसी को वन विभाग के डीएफओ डा. सीरीन सिद्वीकी, एसडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह और महिला रेंजर सोनल वर्मा के इतने बड़े घोटाले का पता ही नहीं चलता। दो महिला और एक पुरुष अधिकारी ने सरकार को ऐसा चूना लगाया कि सभी चकित रह गए। न जाने क्यों महिला अधिकारी इतनी भ्रष्ट होती जा रही है, इन भ्रष्ट महिलाओं अधिकारियों को अपनी महिला होने का भी एहसास नहीं रहा। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी इस महा घोटाले का सूत्रधार और तीनों अधिकारियों के कमाउपूत जयशंकर नामक एक ऐसा दैनिक भोगी कर्मचारी हैं, जिसे अधिकारियों ने अपने फायदे के लिए रेंजर क्लर्क बना दिया, इस कथित रेंजर क्लर्क ने ऐसा 50 लाख के घोटाले का खेल खेला, जिसे देख सभी दंग रह गए। तीनों अधिकारियों और कथित रेंजर क्लर्क ने मिलकर रामनगर क्षेत्र के एक दर्जन वन रक्षक और वन दरोगा के नाम लगभग 50 लाख हड़पने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किया। इन लोगों ने फील्ड में तैनात वन रक्षक एवं वन दरोगा के क्षेत्र के अंदर जो भी पौधे लगाए जाते हैं, या उगाह जाते हैं, उन पौधों की सुरक्षा और पौधषाला में मिटटी पटान, लोडिगं अनलोडिगं के नाम पर फर्जी बिल बनवाया। जब कि इसका बजट नहीं आता, धन का बंदरबांट करने के लिए बड़ी मात्रा में धन का डाईवर्जन किया। देखा जाए तो इन लोगों ने पूरे जिले में डेढ़ करोड़ से अधिक का फर्जी बिल बनवाकर बंदरबांट करने की जानकारी मिल रही। अब जरा अंदाजा लगाइए कि रामनगर क्षेत्र में कथित रेंजर क्लर्क ने वन रक्षकों और वन दरोगाओं का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर रोपे गए पौधों की सुरक्षा किनारे-किनारे कटीलेदार तार के नाम पर 50 लाख से अधिक का फर्जी बिल बनाकर भुगतान भी ले लिया। जिसकी भनक क्षेत्र के वन दरोगा और वन रक्षक तक नहीं लगी। जिन लोगों के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए, वे या तो रेंजर या फिर एसडीओ या फिर कथित रेंजर क्लर्क के करीबी रहे। अगर करीबी न होते तो इन लोगों के खातों में इतनी बड़ी रकम कैसे भेजते? रकम भेजा भी और रकम निकाला भी, और जिसके नाम बिल बना था, उसे दो से लेकर पांच फीसद लाभ देकर सारा का सारा माल डीएफओ, एसडीओ और रेंजर सहित कथित रेंजर र्क्लक ने बंदरबांट कर लिया। चूंकि यह विभाग प्रषासन के चहेते विभागों में रहा है, इस लिए षिकायत होने के बाद भी इनके खिलाफ न तो कोई कार्रवाई होती है, और न कोई जांच ही होती। यह तो भला हो हरीष सिंह जिन्होंने इतने बड़े घोटाले का पर्दाफास किया। यह दैनिक वेतन भोगी व्यक्ति अपने आप को इतना बड़ा व्यक्ति समझता है, कि इसने एक माह पहले एक जमीन के विवाद में रामनगर के ब्लॉक प्रमुख को इतना तक कह दिया कि आप जैसे न जाने कितने प्रमुख देखें। चूंकि ब्लॉक प्रमुख कभी वन विभाग की समीक्षा नहीं करते, नहीं तो इन लोगों की इतनी हिम्मत नहीं पड़ती, कि रामनगर जैसे क्षेत्र में पौध की सुरक्षा और पौधषाला में मिटटी पटान के नाम पर 50 लाख से अधिक का बंदरबांट करते। एक-एक व्यक्ति के छह और सात बार फर्जी बिल बनाए गए, ताकि भुगतान लेने में आसानी हो।

एक-एक ‘व्यक्ति’ के ‘नाम’ बनाए गए ‘सात-सात’ फर्जी ‘बिल’

जिन लोगों के नाम पौधे लगाए जाते हैं, या उगाह जाते हैं, उन पौधों की सुरक्षा और पौधशाला में मिटटी पटान, लोडिगं अनलोडिगं के नाम पर फर्जी बिल बनवाए गएं, उनमें दिव्यांशु यादव पुत्र काशीराम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 13376 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 11632 रुपया, रामबृक्ष पुत्र तुलसीराम 19035 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 19035 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 6697 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 11985 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 19035 रुपया, देवेंद्र कुमार पुत्र लाल बिहारी 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 10575 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 14452 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 18682 रुपया, पंकज कुमार चौधरी पुत्र भौमिक 19035 रुपया, फिर इन्हीं के नाम 15510 रुपया। यह फर्जी बिल तो एक बानगी है। जब कथित रेंजर क्लर्क का विरोध हुआ और उसे बर्खास्त करने का दबाव बनाया गया तो मेैडम ने उसे बर्खास्त नहीं किया, बल्कि कागतों में रामनगर रेंज से मुख्यालय तबादला कर दिया, लेकिन काम वह रामनगर में पहले की तरह कर रहा है।

‘मैडम’ ने तो ‘लूटने’ की ‘फुलप्रुफ’ योजना ‘बनाई’

अगर कोई महिला अधिकारी पांचों समय की नमाज पढ़ती है, तो उसे ईमानदार अधिकारी माना जाता है। लेकिन इस परिभाषा को डीएफओ डा. सीरीन सिद्वीकी ने झूठा साबित करते हुए यह बताने का प्रयास किया है, कि नमाज पढ़ने या फिर मंदिर का पुजारी जरुरी नहीं कि वह ईमानदार हो। मैडम की टीम ने सिर्फ सात वित्तीय स्वीकृति में ही लगभग 26 लाख हड़पने की साजिश रची। वित्तीय स्वीकृति संख्या 983/25-26 में 200492 रुपया, 983/25-26 में 100056 रुपया, 1103/25-26 में 300035 रुपया, 1237/25-26 में 558195 रुपया, 1168/25-26 में 376110 रुपया, 1099/25-26 में 702470 रुपया एवं 1280/25-26 में 352500 सहित कुल 25 लाख 89 हजार 858 रुपया निकाला गया।