बस्ती। जो मंत्री मीडिया से झूठ बोले और यह कहे, कि कुछ ले लो लेकिन सवाल मत करो, क्या ऐसा व्यक्ति मंत्री बनने लायक है? तभी तो कृषि मंत्री के शहर के एक पत्रकार ने कहा था, कि क्या आप मंत्री बनने लायक है। वाकई शाहीजी मंत्री बनने के लायक नहीं है। जिनके दस साल के कार्यकाल में विभाग में भ्रष्टाचार का रिकार्ड बनाया, उस विभाग में ऐसे मंत्री के होने का मतलब किसानों की बर्बादी और उनके नाम पर आई योजनाओं में लूट करना माना जाता है। बस्ती में मीडिया के सामने कहा था, कि दस जून के बाद कोई तबादला नहीं होगा, और न किसी का रुकेगा। 10 जून को कौन कहे, 30 जून तक तबादला हुआ। अब आप सोच सकते हैं, कि ऐसे मंत्री का क्या भरोसा जो मीडिया के सामने झूठ बोलता हो। मीडिया ने पहले भी आरोप लगाया था, और आज भी लगा रहा है, कि तबादले के नाम पर विभाग में लूट मची, खुले आम तबादला नीति की धज्ज्यिां उड़ाकर करोड़ों कमाया गया। अगर ऐसा नहीं होता तो मंत्रीजी यह क्यों पत्रकार से कहते कि कुछ ले लो लेकिन सवाल मत करो, मंत्रीजी ने यह बात किसी से नहीं कहीं, बल्कि कैमरे के सामने कहा। 30 जून को जो तबादले की सूची जारी की गई, उनमें सबसे अधिक कमाउपूत भूमि सरंक्षण अधिकारियों का है। छह अधिकारियों का तबादला आफलाइन किया गया, जबकि आफलाइन पर रोक लगी है। जिले के किसानों का यह दुभार्ग्य हैं, कि ऐसा मंत्री जिले का प्रभारी बना है। जो भ्रष्ट अधिकारियों से मोटी रकम लेकर उनका बचाव करे और जो बाबू पैसा नहीं दे पाए उनका तबादला करे, तो समझ लेना चाहिए कि मंत्रीजी किस नेचर के होगें। इन्हीं मंत्रीजी के कार्यकाल में इनके गृह जनपद में किसानों को खाद के लिए लाठियां खानी पड़ी। कहा भी जाता है, कि जो मंत्री अपने गृह जनपद में किसानों को खाद न उपलब्ध करा सके, वह प्रदेश भर के किसानों को कैसे उपलब्ध कराएगा?
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