सरकारें जागो,
दूध का उत्पादन 14 करोड़ लीटर जबकि खपत 64 करोड़ लीटर
देश में 68.7% मिलावटी दूध और दूध से बने प्रोडक्ट फैला रहे कैंसर
ओमप्रकाश गौतम
यूं तो बाजार में कोई भी खाने पीने का सभी सामान शुद्ध मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। देश में जिस दूध को अमृत कहा जाता था आज वह दूध नहीं जनता को जहर परोसा जा रहा है । गरीब परिवारों का पशु पालन जीवन यापन का जरिया था मंहगाई के चलते दुधारू पशु पालन लगातार घट रहा है। देश में दूध का उत्पादन 14 करोड़ लीटर तथा खपत 64 करोड़ लीटर है। ऐसे में जनता को मिलावटी दूध से पूर्ति की जा रही है। मिलावटी दूध तथा दूध से बनने वाले प्रॉडक्ट जनता को परोसे जा रहे है जो कैंसर को खुला न्यौता हैं। डब्ल्यू एच ओ की मानें तो देश में मिलावटी दूध और दूध से बने सभी प्रोडक्ट पर रोक नहीं लगाई गई तो कैंसर के मरीजों की भरमार होगी। डब्ल्यू एच ओ की रिपोर्ट आने के बाबजूद सरकार और सिस्टम गंभीर नहीं है।आला अधिकारियों सहित खाद्य सुरक्षा विभाग को मालूम होने के बाद भी औपचारिक छापेमारी कर नमूने लिए जाते है।
68%मिलावटी दूध...
एनिमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के मुताबिक देश में 68.7% दूध और दूध से बने प्रोडक्ट मिलावटी हैं।
दुधारू पशुओं के पालन में लगातार गिरावट आने के बाद भी देश में अनेक त्यौहार,शादी बारात,में जितना दूध चाहिए होता है आसानी से मिल जाता है। सबको मालूम है अतिरिक्त दूध मिलावटी बनाकर मांग पूरी की जाती है। जिम्मेदार और सिस्टम दिन रात धनवान हो रहे है जो खुला भ्रष्टाचार है।
नहीं चेते तो होंगे गंभीर नतीजे
डब्ल्यू एच ओ के मुताबिक इंडिया में दूध का उत्पादन 14 करोड़ लीटर तथा खपत 64 करोड़ लीटर है। दूध की मिलावट बंद नहीं हुई तो 2035 तक कैंसर के मरीजों की बेतहाशा बढ़ोतरी होगी।
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