बस्ती। इमिलिया निवासी राम आशीष सिंह की रिट याचिका पर जो 43 फर्जी वोटर पाए गए, उसमें गोंडा जनपद के फर्जी मतदाताओं का नाम भी शामिल है। अगर याविका न दासर होती तो फर्जी वोटरों का नाम भी नहीं कटता, और इन्हीं फर्जी वोटरों के जरिए चुनाव जीता जा सकता। गोलू पुत्र भानू प्रसाद नाबालिग, राम प्रकाश पुत्र राम सेवक गोंडा निवासी, कुसुम देवी पत्नी राम प्रकाश गोंडा निवासी, आशुतोष नरायन पुत्र गिरिजा शंकर बाहर का, चंदन पुत्र कृष्णाराम निवासी पचवस, गीता पत्नी आषाराम बाहर की, अर्चना प़त्नी अमरनाथ विवाहित, दिव्यांश पुत्र विजय बहादुर फर्जी, रामवती पुत्र नरेंद्र मृतक, अमित पुत्र कटिया सिंह फर्जी, पूनम पत्नी मधुर फर्जी, कीर्ति पत्नी राजकुमार विवाहित, सीमा सिंह पत्नी उमाबहादुर सिंह विवाहित, धमेंद्र पुत्र भगवानदास डबल, रजकला पत्नी रामलाल मृतक, सादिरा पत्नी रोजन अली मृतक, नितिन पुत्र सरजू प्रसाद नाबालिग, अनीता पत्नी बजरंग बिहारी मृतक, मो. अफजल पुत्र मो. अली नाबालिग, लक्ष्मी पत्नी रामसरन नाबालिग, सुभावता पत्नी छंगालाल विवाहित, शिदा पत्नी रामतेज फर्जी, रामकिशोर पुत्र राम स्वरुप मृतक, अंशु देवी पत्नी रामजस फर्जी, शिवशंकर पुत्र हरिराम फर्जी, साहिद अली पुत्र मो. अली नाबालिग, पूनम पत्नी अशोक फर्जी, सृजल सिंह पत्नी प्रभाकर सिंह डबल, राधा पत्नी उमेंद्र प्रताप डबल, राम सहाय पुत्र नरेश फर्जी, निहारिका पत्नी डब्लू फर्जी, नीलम सिंह पत्नी अंगद सिंह विवाहित, आरती पत्नी पवन डबल, ज्योति पत्नी अवधेष फर्जी, राम मूरत पुत्र दयाराम फर्जी, सबीता पत्नी राम तीरथ डबल, अंजना देवी पत्नी राजेश कुमार डबल, राना पत्नी रामकिशुन फर्जी, हसीना पत्नी सलीम विवाहित, शैली पत्नी शुभन सिंह डबल का नाम। जांच में लिखा गया गया कि ग्राम पंचायत इमिलिया के मतदान केंद्र संख्या 36 कम्पोजिट विधालय इमिलिया की मतदाता सूची में 200 में से 43 फर्जी है। आप लोगों को याद होगा कि चिलवनिया में भी इसी तरह फर्जीवाड़ा निकला था, मामला जब हाईकोर्ट में पहुंचा तो किसी तरह तत्कालीन एसडीएम बच गए, लेकिन बीएलओ और सुपरवाइजर को बर्खास्त होना पड़ा, तत्कालीन डीएम अनिल दमेले को व्यक्तिगत रुप से हाईकोर्ट में हाजिर होना पड़ा, तब भी मामला राजनैतिक दबाव का था। जो भी अधिकारी नेताओं के दबाव में आया, उसे उसका खामियाजा भुगतना ही पड़ा हो सकता है, कि इमिलियिा के मामले में हर्रैया के एसडीएम को खामियाजा भुगतना पड़े। जिले में आधे अधिक प्रधान का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी सबसे पहले अपनी पसंद का बीएलओ लाना चाहते है। अगर किसी को इमिलिया के बीएलओ अमरजीत जैसा मिल गया तो फिर क्या कहना?