बस्ती। मदरसा अहले सुन्नत फैजुन्नबी कप्तानगंज के प्रबंधक हाजी मुनीर अली के पाचों दामाद जिसमें मोहम्मद बहार शाह, अब्दुल मुक्तादिर, अब्बास अली, साजिद अली बरकती एवं मोहम्मद अकरम की नौकरी खतरे में पड़ गई, कभी भी अनियमित रुप से किए पाचों दामादों की नौकरी जा सकती है। हाजी मुनीर अली देश के पहले ऐसे मैनेजर होगें, जिन्होंने सारे नियम कानून को ताक पर अपने पांच सगे दामादों की नियुक्ति अधिकारियों की मिली भगत से कर ली, अगर इनका बस चलता तो छठें दामाद की भी नियुक्ति कर देते। कहना गलत नहीं होगा कि हाजी मुनीर ने मदरसे को दामादुल मदरसा यानि दामादों का मदरसा बना दिया। पाचों दामादों की नौकरी इस लिए खतरे में हैं, क्यों कि इसकी बृहत्त जांच हो रही हैं, इनके आलावा प्रदेश के चार और मदरसे हैं, जहां के मैनेजरों ने साले, बहु, लड़के और रिष्तेदारों को नियम विरुद्व टीचर बना दिया, जबकि नियमानुसार किसी भी मदरसे के प्रबंधक का कोई भी करीबी टीचर नहीं बन सकता है। मगर कहीं ससुर के बाद पांच दामादों की नियुक्ति तो कहीं बहू और बेटे को टीचर बना दिया। दरअसल यूपी के सहायता प्राप्त मदरसों में सरकारी फंड पर चल रही परिवार भर्ती का कुछ ऐसा ही खुलासा हुआ है। नियमों को चकमा देने के लिए पहले प्रबंधक इस्तीफा देता है, फिर पत्नी बेटे दामाद और रिश्तेदारों की नियुक्ति कर दोबारा कुर्सी संभाल लेता है।

1100 करोड़ के सरकारी अनुदान पर कुछ परिवारों का कब्जा होने के आरोप जिसकी शिकायत शिकायतकर्ता तल्हा अंसारी ने एनएचआरसी से किया जिसके बाद एनएचआरसी ने यूपी चीफ सेक्रेटरी को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा, जिसके बाद खुलासा हुआ कि बस्ती, बाराबंकी जौनपुर और कुशीनगर के मदरसों में एक ही परिवार के कई सदस्य सरकारी वेतन लेते मिले। ब्रिटेन और दुबई में रहने वाले लोगों तक को ड्यूटी पर दिखाकर वेतन निकालने का दावा। यह खुलासा अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़े भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की तरफ इशारा करता है। उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त मदरसों में भाई-भतीजावाद और वंशवाद चरम पर है। मदरसा विनियमावली 2016 में स्पष्ट प्रावधान है कि मदरसा प्रबंधन अपने परिवार के सदस्यों की नियुक्ति नहीं करेगा। इसके बावजूद संबंधित प्रबंधक नियमों को दरकिनार करने के लिए पहले औपचारिक रूप से इस्तीफा दे देता हैए अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर देता है और परिवार के सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद पुनः स्वयं प्रबंधक बन जाता है। इस प्रकार मदरसा विनियमावली के प्रावधानों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन को गुमराह कर भाई-भतीजावाद एवं वंशवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त मदरसों में प्रबंधन से लेकर सरकारी शिक्षक और कर्मचारी तक एक ही परिवार की सीमाओं में सिमट गए हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार सहायता प्राप्त मदरसों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 1100 करोड़ रुपये का अनुदान देती है, लेकिन यह राशि कुछ चुनिंदा परिवारों के बीच ही बंटकर रह जाती है। यह प्रदेश की पांच करोड़ से अधिक अल्पसंख्यक आबादी के मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। अब जरा उस रिपोर्ट को देखिए जिसमें मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम रसौली जनपद बाराबंकी में प्रबंधक अयाज अहमद ने अपनी पत्नी जेबा बानो, साले मोहम्मद शब्बीर को टीचर बना दिया। इस मामले में हुआ ये कि अपनी पत्नी जेबा बानो और रिश्तेदार मोहम्मद शब्बीर की नियुक्ति के समय प्रबंधक अयाज अहमद ने अपने चाचा इसरार अहमद को प्रबंधक बना दिया। नियुक्तियां पूरी होते ही वह पुनः स्वयं प्रबंधक बन गए। मदरसा रियाजुल उलूम मछलीशहर जनपद जौनपुर में पूर्व प्रबंधक एवं वर्तमान में टीचर बकहरदू खान उर्फ इमरान की प्रधानाचार्या पत्नी मजहबी बेगम, प्रधानाचार्य का पुत्र फैजान अहमद, दूसरा पुत्र रिजवान अहमद, प्रधानाचार्य का रिष्तेदार क्लर्क महमूद आलम, रिष्तेदार तहसील बानो, खास बात यह है, कि इसमें प्रधानाचार्य महजबी बेगम तथा उनके दोनों पुत्र फैजान अहमद और रिजवान अहमद की नियुक्ति एक ही दिन हुई। मदरसा अहले सुन्नत फैजुन्नबी कप्तानगंज बस्ती, प्रबंधक मुनीर अली ससुर ने पांच दामादों को नियुक्ति किया, यहां अपने पांच दामादों की नियुक्ति के समय प्रबंधक मुनीर अली ने पद से इस्तीफा दे दिया था। नियुक्तियां पूरी होने के बाद वह पुनः प्रबंधक बन गए। इस प्रकार नियमों में हेरफेर कर प्रशासन को गुमराह किया गया और सरकारी धन की खुली लूट की गई। इसी तरह मदरसा अब्रे रहमत मझगवां कला जनपद जौनपुर के प्रबंधक बाबर कुरैशी ससुर ने अपने बहु अफसू बानो को क्लर्क बना दिया।

मदरसा जामियतुल फलाह बदमपुरम अलियाबाद जनपद बाराबंकी के प्रबंधक अफसरी फहीम माता ने पुत्र मोहम्मद कासिफ उमैर को टीचर, दूसरे पुत्र मोहम्मद आमिर को भी टीचर बना दिया। इस मामले में आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा अशरफिया में शिक्षक रहे शम्सुल हुडा खान वर्ष 2007 से ब्रिटेन में रह रहे थे और वहां की नागरिकता भी ले चुके थे। इसके बावजूद भारत में वर्ष 2017 तक उनका वेतन और वेतनवृद्धि जारी रही।

अप्रैल 2026 में कुशीनगर के श्मदरसा मोहम्मदिया फैजे रसूलश् में एक बड़ा घोटाला सामने आया। यहां शिक्षिका तालीमुन निशा दो महीने तक दुबई में थींए लेकिन कागजों में उन्हें श्ड्यूटी परश् दिखाकर सरकारी वेतन निकाला जाता रहा। उक्त शिक्षिका मदरसा के प्रबंधक की पुत्री हैं। मदरसा में एक ही परिवार के छह सदस्य नियुक्त हैं।

मदरसा बोर्ड डिप्टी डायरेक्टर सोन कुमार के मुताबिक इस मामले में जांच की जा रही है। इसमें कई ऐसे मदरसा हैं जिनके प्रबंधक इस्तीफा देने के बाद दूसरा प्रबंधन उनके रिश्तेदारों को रख लेता है। इस टेक्निकल ग्राउंड पर नियुक्ति की जाती है। 2024 की नियमावली के बाद कोई भी नई नियुक्ति नहीं की गई है। 2016 नियमावली में ब्लड रिलेशन और 24 की नियुक्ति में साफ तौर से ब्लड रिलेशन को मनाही है। इसके इसके बावजूद अगर इस तरीके से हैं तो जो भी एनएचआरसी के लेटर आते हैं उन पर जांच होती है और टीम गठित करके डीएम स्तर पर भी कार्रवाई की जाती है। इस पूरे मामले की शिकायतकर्ता जिन्होंने एनएचआरसी् में शिकायत दर्ज करवाई है। तल्हा अंसारी ने बताया कि उन्होंने एनएचआरसी से शिकायत की जिसमें सभी मदरसों को डिटेल में भेजा गया। उसके बाद एनएचआरसी ने चीफ सेक्रेटरी को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा है। कहते हैं, कि मदरसे काफी समय से चला रहे है और अपने रिश्तेदारों को ब्लड रिलेशन को आगे बढ़ा रहे है और इस्तीफा देकर फिर ज्वाइन कर लेते ताकि टेक्निकल ग्राउंड मजबूत रहे।