बस्ती। अगर किसी आम व्यक्ति को न्याय पाने के लिए आत्मदाह करने जैसा निर्णय लेना पड़े, तो उसे किसी भी दषा में भाजपा की सरकार न तो मानी जाएगी, और न कही ही जाएगी। अगर जिले की जनता को आत्मदाह करना पड़े तो इस सरकार के जिम्मेदार लोगों को चुल्लूभर पानी में डूब मरना चाहिए। आत्मदाह जैसा निर्णय आदमी यूंही नहीं लेता? जब उसे लगता कि उसकी कहीं नहीं सुनवाई हो रही है, और वह भ्रष्टाचारियों से नहीं लड़ सकता, और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए, उसे ही झूठे मुकदमें में फंसा दिया जाता है, तो वह आत्मदाह करने जैसा निर्णय लेता। वैसे आत्मदाह करना गैर कानूनी और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता।

विकास खंड बनकटी के बेहिल गांव का गंगाराम यादव जैसा भ्रष्टाचार के खिलाफ बस्ती में लड़ने वाला और शायद ही कोई होगा। दुर्भाग्य यह है, कि ऐसे लोगों की मदद करने को कौन कहे, समर्थन तक करने को तैयार नही। एैसा जगता है, कि मानो हर कोई भ्रष्टाचार में डुबा हुआ है। यह वही व्यक्ति हैं, जिसने अपनी लड़ाई से गांव के 450 से अधिक फर्जी मनरेगा जाब कार्ड को निरस्त करा चुका है, यह वही व्यक्ति है, जिसने तालाब पर से कब्जा हटाने के लिए डीएम कार्यालय पर दो बार आत्मदाह करने का प्रयास किया, एक बार तो शरीर पर किरोसिन आयल डाल चुका था, लेकिन जैसे ही माचिस जलाने का प्रयास किया, पुलिस वाले पकड़ लिए, इलाज करवाया, उसके बाद भी जब कब्जा नहीं हटा तो फिर इसने डीएम कार्यालय के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया, फिर पुलिस ने इसे बचा लिया, लेकिन इस बार इसे जेल जाना पड़ा, उसके बाद सदर तहसील वालों की नींद खुली और आनन-ॅफानन में कब्जा हटवाया। यह व्यक्ति अपने के लिए नहीं बार-बार आत्मदाह करने का प्रयास कर रहा है, बल्कि सरकारी क्षति को नुकसान होने से बचाने के लिए कर रहा हैं, अब तीसरी बार करने जा रहा है। जिले में गंगाराम यादव जैसे कितने जूनूनी लोग हैं, जो भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने के लिए इस हद तक जा सकते है। इसके जुझारुपन को देखते हुए बनकटी के एक बीडीओ ने इसे दो-तीन आवास और शोचालय का आफर दिया था, लेकिन इसने बीडीओ से कहा कि साहब हम्हें नहीं चाहिए, अगर हो सके तो जिनके पास आवास और शोचालय नहीं हैं, उन्हें दे दीजिए। इस ईमानदार व्यक्ति को भ्रष्ट प्रधान ने इतना परेषान और प्रताड़ित किया कि इसे गांव छोड़कर मुंबई जाना पड़ा। लेकिन यह मुंबई में रहकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लडता रहा। हाल ही में जब इसने निर्मित्त आगनबाड़ी केंद्र में फर्जी मनरेगा मस्टरोल निकालने का विरोध किया तो प्रधान ने एक साजिष के तहत इसे फंसाने के लिए भवन के दीवाल को गिरा दिया, और आरोप गंगाराम यादव पर मढ़ दिया, मुंडेरवा पुलिस बिना छानबीन किए मुकदमा दर्ज कर दिया, इससे पहले प्रशासक प्रधान अपने साथियों के साथ नौ जून 26 को बेहिल बाग तिराहे पर लाडी और चाकू लेकर घेर लिया, मारा भी, चोटे भी आई, जब मन नहीं भरा तो फर्जी मुकदमा लिखवा दिया। उसके बाद गंगाराम यादव अधिकारियों का चक्कर लगाता रहा, लेकिन कहीं पर भी इसकी यह कहकर सुनवाई नहीं हुए, कि यह सोषल मीडिया पर नियमित भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखता रहता है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि साहब मैं हमेशा देशहित में आवाज उठाता हूं, कई कब्जे को हटवाया भी, फर्जी मस्टरोल को निरस्त भी करवाया, कहा कि मेहनत मजदूरी करके मैं भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ रहा हूं, मेहनत के पैसे से सामाजिक कार्य करता रहता हूं, उसके बाद भी प्रधान ने हमारे खिलाफ सरकारी संपत्ति को तोड़कर नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज करवा दिया। मुंडेरवा थाने के एसआई जावेद खान प्रधान के प्रभाव में आकर जनसुनवाई पोर्टल पर की गई, शिकायत को निराधार और असत्य बताकर रिपोर्ट लगवा दिया, कहा कि मुंडेरवा पुलिस भी भ्रष्ट प्रधान की सुनती है, और हमारे जैसे ईमानदार को बेईमान बताती है। कहा कि जब एसआई की षिकायत एसपी से की तो इन्होंने प्रधान के साथ मिलकर झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया। मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि इसकी जांच करा ली जाए, और अगर मैं गलत पाया जाता हूं, तो मेरे घर पर बुलडोजर चलवा दिया, अगर सही हूं तो प्रधान के घर पर बुलडोजर चलवाया जाए। चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक माह में कोई कार्रवाई नहीं हुई, और झूठे मुकदमें को वापस नहीं लिया गया तो डीएम कार्यालय परिसर पर आत्मदाह करुंगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी आपकी होगी।
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