बस्ती। बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा, कि अगर किसी प्राइवेट अस्पताल का डाक्टर मरीज के उपचार में कोई लापरवाही करता है, तो उसकी शिकायत सिर्फ मरीज के ‘पति-पत्नी’, ‘माता-पिता’, ‘पुत्र-पुत्री’ ‘भाई-बहन’ कानूनी अभिभावक, मरीज के द्वारा अधिकृत व्यक्ति या मरीज की मृत्यु की स्थित में उसके निकट संबधी ही कर सकते हैं, अगर कोई बाहर का यानि जीजा-साला, साली, सरहज, सास-ससुर या फिर कोई सगा संबधी करता हैं, तो उस षिकायत की कोई विधिक मान्यता नहीं होती। यह जानकारी तब प्रकाश में आई जब ‘अयोध्या प्रसाद पांडेय’ की ओर से बहन के ससुर ‘सुरेंद्र प्रसाद मिश्र’ के इलाज में ‘नवयुग मेडिकल सेंटर’ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसकी जांच विशेषज्ञ चिकित्सीय टीम से कराने, अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करने, विधिक कार्रवाई करने, अस्पताल की मान्यता, लाइसेंस, अस्पताल में चिकित्सकों की योग्यता एवं पंजीकरण, उपलब्ध सुविधाओं एवं उपचार संबधी मानकों की जांच और पीड़ित मरीज को हुई स्थाई शारीरिक क्षति आर्थिक को देखते हुए उचित प्रतिकर यानि कंपनसेशन दिए जाने की मांग की गई है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल सहित डीएम से की गई।

इसके बारे में जो स्पष्टीकरण नवयुग मेडिकल सेंटर के एमडी डा. नवीन कुमार ने साक्ष्य के साथ में दिया, उसी से पता चला कि शिकायत कौन-कौन दर्ज करवा सकता है। कहा गया कि मरीज को 12 मई 2026 को अस्पताल में गंभीर अवस्था में लाया गया, परीक्षण के उपरांत और चिकित्सीय प्रोटोकाल का पालन करते हुए उपचार किया गया। उपराच में किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई। स्पष्ट कहा गया है, कि शिकायतकर्त्ता स्वंय मरीज का प्रत्यक्ष अभिभावक अथवा विधिक प्रतिनिधि नहीं है, शिकायतकर्त्ता मरीज का निकटता वैधानिक परिजन नहीं है, बहन के ससुर शिकायतकर्त्ता इस श्रेणी में नहीं आते। अगर शिकायतकर्त्ता को नवयुग मेडिकल सेंटर से कोई शिकायत है, तो अपनी शिकायत बयान हल्फी के साथ प्रस्तुत करे, ताकि स्पष्ट हो सके, कि शिकायतकर्त्ता को शिकायत करने का अधिकार प्राप्त हैं, कि नहीं? लिखा कि अगर शिकायतकर्त्ता के पास शिकायत से संबधित कोई वीडियो की जानकारी हो तो उसे एफएसएल/सीएफएसएल से प्रमाणित कराके प्रस्तुत करे, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं किया गया। कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य एवं स्पष्ट नहीं हैं, किसी भी कथित चिकित्सकीय लापरवाही के समर्थन में कोई विशेषज्ञ चिकित्सा राय मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट अथवा अन्य विष्वनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। 50 हजार जमा करने पर ही उपचार करने संबधी आरोप को असत्य एवं मनगढ़त एवं साक्ष्यविहीन बताया गया। कहा गया कि मरीज को भर्ती के समय बीमारी संबधित सभी खतरों से अवगत करा दिया गया था, लिखित सहमति मिलने के बाद ही उपचार किया गया। इलाज करने वाले डा. अभिजात कुमार एमबीबीएस का कहना है, कि मरीज की उम्र 70 साल, जो सड़क दुर्घटना के बाद रात्रि 9.30 पर अस्पताल लाया गया, मरीज का पैर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त था, और बहुत ही खून बह रहा था, मरीज को जिला अस्पताल बस्ती से हायर सेंटर रिेफर किया गया था, मरीज शराब के नषे में था, और मुंह से शराब की महक आ रही थी, मरीज का वजन 120 किलो से अधिक था, जो अपने आप में एक एक गंभीर रोग की कैटगरी में आता है। रात्रि को आपरेशन कर पैर को जोड़ दिया गया था, तीन दिन तक मरीज आईसीयू में रहा, न्यूरो सर्जन और सर्जन की देखरेख में मरीज की मानिटरिगं हो रही थी। 16 मई 26 को मरीज होष में था, और मुंह से पानी भी पी रहा था। चेहरे के चोट के लिए मरीज लखनउ ले जाना चाह रहा था। डाक्टरों का कहना है, कि अगर इसी तरह की विधिकविहीन षिकायतें होती रही तो फिर सड़क दुर्घटना में न जाने कितने मरीज की जान सड़क पर ही हो जाया करेगी।