बस्ती। रुड़की से मैकेनिकल में आईआईटी की डिग्री हासिल करने वाला अभिषेक मिश्र नामक युवक भी उन ढ़ोगी बाबाओं में शामिल हो गया, जो भगवान के नाम पर भोलेभाले लोगों को ठगते है। महिलाओं और युवतियों को अपना शिकार बनाते हैं, उन्हें अपने वष में करके उनका अष्लील वीडियो बनाते हैं, और बाद ब्लैक मेल करते हैं। ब्लैक मेलिगं के जरिए यह इतना पैसा कमा लेते हैं, कि इनके पास कुछ ही दिनों में शानदार गाड़ी और बगंला हो जाता है। इस तरह के ढ़ोगी बाबाओं के चंगुल में खासतौर पर महिलाएं बड़ी आसानी से फंस जाती है। लेकिन जब इनके पाप का घढ़ा भरता है, तो यह बगलों से सीधे जेल के सलाखों के पीछे पहुंच जाते है। जब कोई अभिषेक जैसा पढ़ा लिखा ढ़ोगी बाबा बनता है, तो वह अन्य बाबाओं को पीछे छोड़ देता है। आजतक अधिकांश नौजवान बाबाओं की असलियत कोई नहीं जानता, इनके चिकने चेहरे और मीठे बोल से युवतियां, महिलाएं और लड़कियां इनका दीवाना हो जाती है। इनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाती है, जितनी सेवा महिलाएं पति की नहीं करती, उससे अधिक सेवा बाबाओं की करती है। तन, मन और धन सब सौंप देती है।  लोगों का बाबा बनकर जितना सुख और आराम मिलता है, उतना इन्हें नौकरी करने में नहीं मिलता, क्यों नौकरी में तो सिर्फ वेतन मिलता है, लेकिन बाबा बनने में सबकुछ मिलता। नौकरी करने वाले पति को एक ही पत्नी का सुख मिलता है, लेकिन बाबाओं को न जाने कितने पत्नियों का सुख मिलता है। पति जीवन भर एक पत्नी के सहारे रह जाता है, लेकिन बाबाओं के अगल-बगल, आगे और पीछे महिलाओं की लाइन लगी रहती है। अब आप समझ गए होगें कि क्यों लोग बाबा बनते जा रहे है? बाबा बनकर दर्जनों महिलाओं का सुख भोगने की चाहत ने ही अभिषेक मिश्र को 20 लाख की नौकरी को छोडना पड़ा। इस ढ़ोगी बाबा अगर राधे-राधे करके महिलाओं को जाल में न फंसाते और उनका अष्लील वीडियो न बनाते तो यह जेल में न होते, बल्कि अपनी डिग्री का इस्तेमाल करके देष की तरक्की में योगदान देते है। मथुरा में फर्जी बाबा अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास ने इंजीनियर के दिमाग का खूब लाभ उठाया, वरना पैसा कमाने और युवतियों का सुख भोगने के लिए गंधर्व विवाह का फारमूला न अपनाते।

धर्म की आड़ में जिस तरह घिनौना अपराध करने वाले फर्जी और ढ़ोगी बाबाओं का का पर्दाफाश हो रहा है, उसके बाद भी महिलाओं का ढ़ोगी बाबाओं का मोह भंग नहीं हो रहा है। इसी मोह में न जाने कितने महिलाओं का घर बर्बाद हो गया। कहा भी जाता है, कि जब तक महिलाओं का मोह ढ़ोगी और फर्जी बाबाओं से भंग नहीं होगा, तब तक आषाराम बाबू, राम रहिम और अभिषेक मिश्र जैसे लोगों की दुकाने चलती रहेगी। अनेक परिवारों को बर्बाद करने वाले ढ़ोगी बाबाओं का एक ही स्थान है, और वह है, जेल। आज हम आपको को नाम अभिषेक मिश्र के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इस समय जेल में राधे-राधे कर रहे है। रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद इन्हें 20 लाख के पैकेज की नौकरी मिली। नौकरी छोड़कर यह तीन साल पहले मथुरा आ गए। धार्मिक संस्था से जुड़कर किराए के घर में ऑनलाइन प्रवचन शुरू किए। नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रख लिया।

पढ़े-लिखे बाबा के नाम पर पढ़े-लिखे नौजवानों को फंसाने लगा। युवक-युवतियों को मथुरा बुलाकर बिना परिवार की सहमति गंधर्व विवाह करवाता था। शादी के बाद जोड़े को कुछ दिन अपने कमरे पर रखता। प्रसाद के नाम पर लड़कियों को नशीला दूध पिलाकर बेहोश करता, आपत्तिजनक तस्वीरें खींचता और फिर ब्लैकमेल कर लाखों रुपए वसूलता था। इन्हीं अपराध के पैसों से अभिषेक मिश्रा ने मथुरा में अपना खुद का घर खरीद लिया। पुलिस जांच में इसके मोबाइल से करीब 12 लड़कियों के साथ आपत्तिजनक फोटो मिले हैं। एक दिन पहले इन्हें जेल भेजा गया। कहते हैं, कि ये धर्म नहीं, अधर्म है। ये बाबा नहीं, अपराधी है, रुड़की जैसी संस्था से पढ़कर निकला शख्स जब धर्म के नाम पर बेटियों की इज्जत लूटे, नशा देकर ब्लैकमेल करे, तो ऐसे लोग समाज के लिए सबसे बड़ा कलंक है। गंधर्व विवाह के नाम पर माता-पिता की मर्जी के बिना युवाओं को फंसाना और फिर उनकी जिंदगी बर्बाद करना, ये सोची-समझी साजिश है।