बस्ती। भाकियू भानूगुट के मंडल प्रवक्ता ‘चंद्रेशप्रताप सिंह’ ने ‘भ्रष्टाचार’ पर बड़ा ‘हमला’ किया है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार का नमूना बिंदुवार देते हुए लिखा कि जब तक शिव और राम बनकर भ्रष्टाचारियों को बचाने वाले अफसर-नेता कुर्सी पर हैं, तब तक जनता को न्याय नहीं मिलेगा। अगर 25 साल से जमे इन अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई तो समझा जाएगा कि जीरो टॉलरेंस सिर्फ नारा है, हकीकत में भ्रष्टाचार को 100 फीसद लाइसेंस है। इस भ्रष्टाचार नाशक महायज्ञ में आपकी कठोर कार्रवाई ही आहुति बनेगी। त्वरित संज्ञान लेकर दोशियों को जेल भेजें।
बस्ती मंडल में व्याप्त चरम भ्रष्टाचार, सीएमओ कार्यालय में 25 वर्षों से जमे भ्रष्ट अफसरों की निरंकुशता एवं जीरो टॉलरेंस नीति की पूर्ण विफलता पर कठोर कार्रवाई हेतु प्रार्थना-पत्र विश्वस्त सूत्रों, जनता, मीडिया एवं भ्रमण के दौरान लगातार बस्ती मंडल में सरकारी लूट, अनाचार और निरंकुश अफसरशाही-नौकरशाही के कारनामे सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार अब व्यवस्था नहीं, महामारी बन चुका है। तीन जून 26 को जिला बस्ती की सदर तहसील में कानूनगो को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। हर महीने पूरे मंडल में राजस्व विभाग के कर्मचारी एंटीकरप्शन के हत्थे चढ़ रहे हैं। पर यह तो सिर्फ झांकी है। ’स्वास्थ्य विभाग सीएमओ कार्यालय बस्ती भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। ’उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार चौधरी’ बस्ती में 24-25 साल से जमे हुए हैं। प्रमुख सचिव, निदेशक स्तर तक मामला संज्ञान में होने के बावजूद ट्रांसफर नीति इनके आगे बौनी साबित हो रही है। 25 साल से एक ही जगह लूट का साम्राज्य। ’सीएमएसडी स्टोर इंचार्ज गजटेड अधिकारी अजय कुमार मिश्र’ जिनकी सर्विस बुक, मानव संपदा पोर्टल पर एडी हेल्थ की जांच में उम्र तक संदेहास्पद है। ये 29-30 वर्ष से सीएमओ ऑफिस के बॉस बने बैठे हैं। सीएमओ से लेकर एडी तक इनसे हिलते हैं। इनके कदाचार के विपरीत सब महाभ्रष्टाचारियों में नाम है, लेकिन इनके रक्षक शिव और राम बने बैठे हैं। कोई माई का लाल नहीं जो इनको हिला दे, इनपर कार्रवाई कर दे। जिस विभागध्पटल के ये मुखिया हैं, उसी का ठेकेदार इनका पुत्र है। आखिर ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या भ्रष्टाचार नाशक महायज्ञ है?’ट्रांसफर-पोस्टिंग पूरी तरह बिक चुकी है।’ जिसकी सेटिंग है, वो 25-30 वर्षों से एक ही जिले-मंडल में खुली लूट कर रहा है। पटल तक नहीं बदले जाते। सीएमओ कार्यालय के बाबू से फार्मासिस्ट तक की पोस्टिंग करोड़ों में नीलाम हो रही है। ’स्वास्थ्य विभाग में हालात सबसे भयावह हैं।’ जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, दिव्यांग प्रमाणपत्र, दवा-उपकरण खरीद, संविदा भर्ती, आशा भुगतान-हर फाइल पर रेट फिक्स है। गरीब मरीज बिना रिश्वत इलाज के लिए तड़प रहा है, दलालों का राज है। जीरो टॉलरेंस की नीति ही भ्रष्टाचार करने वाली नीति बन गई है। पैराशूट से उतरे मंत्री और जुगाड़-सेटिंग से कुर्सी पाने वाले अफसरशाह अपनी रिकवरी जनता को लूटकर कर रहे हैं। जिस दल ने ईमानदारी का दंभ भरकर सरकार बनाई, उसी के राज में ब्रिटिश काल से बड़ी लूट चल रही है। ’डॉ. अशोक कुमार चौधरी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी’ एवं ’अजय कुमार मिश्र, सीएमएसडी स्टोर इंचार्ज’ को तत्काल निलंबित कर इनके विरुद्ध विजिलेंस जांच बैठाई जाए। इनकी व इनके परिवार की 25 साल की संपत्ति की जांच हो। बस्ती मंडल में 20 वर्ष से अधिक समय से एक ही पटल जिले में जमे सभी अफसरों-बाबुओं का तत्काल पटल परिवर्तन व जिले से बाहर स्थानांतरण किया जाए। ’सीएमओ कार्यालय बस्ती एवं स्वास्थ्य विभाग’ में ट्रांसफर-पोस्टिंग, दवा खरीद, भर्ती घोटाले की जांच कराई जाए। अजय कुमार मिश्र की सर्विस बुक, उम्र, नियुक्ति की उच्चस्तरीय जांच कर फर्जी पाए जाने पर बर्खास्त कर जेल भेजा जाए। हर विभाग में कैमरे के सामने काम, तीन वर्ष में अनिवार्य पटल परिवर्तन व दलालों पर रासुका लगाया जाए। जिन अफसरों के रिश्तेदार उसी विभाग में ठेकेदार हैं, उन सबको तत्काल पद से हटाया जाए।
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