बस्ती। 34 अवैध कालोनियों के नाम पर जिस तरह खेल हुआ, उसे सभी ने देखा, हर बैठक में कमिष्नर चिल्लाते रहे कि अवैध कालोनियों को ध्वस्त किया जाए, लेकिन एक भी अवैध कालोनी ध्वस्त नहीं हुई, अलबत्ता ध्वस्तीकरण के नाम पर नोटिस भेज कर धन उगाही की गई, जिस तरह धन की उगाही की गई उसे बीडीए के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा, यह भी लिखा जाएगा, कि कमिष्नर और डीएम एवं एडीएम के रहते धन उगाही की गई, साथ में बीडीए के उन तीन सदस्यों का नाम भी काले अक्षरों में लिखा जाएगा, जिन्होंने इतने बड़े भ्रष्टाचार के मामले में आखंे बंद किए रहे। कहना गलत नहीं होगा, कि बीडीए की बर्बादी और उसके बदहाली के लिए कमिष्नर, डीएम और एडीएम के साथ में तीनों सदस्य भी जिम्मेदार है। यह लोग अपने निजी लाभ के लिए बीडीए को बर्बाद होते देखते रहे, भवन स्वामियों का शोषण होते देखते रहे। 34 अवैध कालोनी के तर्ज पर बीडीए ने अब 36 अवैध प्लाटिगं के नाम पर धन उगाही करने की जो योजना बनी है, उसके सफल होने की गारंटी इस लिए दी जा रही है, क्यों कि बीडीए के तीनों सदस्य पूर्व की भांति बैठक में चाय और समोसा खाकर चले आएगें, अभी तक एक भी सदस्य ने यह विरोध नहीं जताया और न सवाल ही उठाया कि क्यों आप लोगों ने 34 अवैध कालोनी को बसने दिया, और क्यों नहीं कमिष्नर के आदेश का पालन किया, और क्यों अब 36 अवैध प्लाटिगं हो गई? इसका मतलब यह हैं, कि कमिष्नर साहब को भी अपने आदेश की चिंता नहीं रही, अगर रही होती तो एक दर्जन बैठक हो गए, लेकिन एक भी अवैध कालोनी को बसाने वाले कालोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुआ, सरकार का खजाना भरने के बजाए बीडीए वालों ने अपनी जेबें भरी और अब फिर अवैध प्लाटिगं के नाम पर जेबें भरने की साजिश रची गई। अवैध प्लाटिगं में ऐसे-ऐसे नामचीन लोगों का नाम शामिल कर दिया, जिन्होंने अवैध प्लाटिगं का कारोबार कभी किया ही नहीं, इसी में एक नाम हैं, विपिन शुक्ल का, इनका कहना है, कि हमने अपना विरोध सचिव साहब से दर्ज करवा दिया, उन्होंने कहा कि इसका स्पष्टीकरण चला जाएगा। ऐसे-ऐसे लोगों का नाम भी शामिल कर दिया, जो अवैध प्लाटिगं का कारोबार करके चले गए, सवाल उठ रहा है, कि बीडीए किस पर कार्रवाई करेगा, जब पार्टी ही नहीं है। बेचारे अब प्लाट खरीदने वाले बचे हैं, बीडीए उन्हें ही अपना निशाना बनाएगी, और जितना हो सकेगा, दोहन करेगी, क्यों कि कोई नहीं चाहेगा कि उसका मकान ध्वस्त हो। अब जरा अंदाजा लगाइए कि घरसोहिया नांरग रोड, पुलिस लाइन, हरदिया खास, देवरी एवं कृष्णा मिशन हास्पिटल के पीछे किसने अवैध प्लाटिगं किया, और किसके खिलाफ कार्रवाई करेगें, जब उनका नाम ही नहीं, सवाल उठ रहा है, कि क्या बीडीए अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। सूची को बीडीए ने मजाक बनाकर रख दिया। यह सूची तीनों सदस्यों को भी उपलब्ध कराई गई, लेकिन सूची को लेकर अभी तक एक भी सदस्य ने कोई विरोध नहीं जताया। यूंही नहीं मीडिया सदस्यों की लापरवाही के बारे लिखती आ रही है। इन लोगों की लापरवाही का नतीजा है, कि बस्ती से एक्सईएन करोड़पति होकर चले गए, और यह लोग चाय समोसा में मस्त रहे। क्या यही इन लोगों का दायित्व हैं? क्या इसी लिए सरकार ने इन्हें सदस्य बनाया? बीडीए को कमजोर करने और भ्रष्टाचार में ढ़केलने के लिए अधिकारियों के साथ इसके सदस्य को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। एक भी सदस्य अभी तक किसी भ्रष्टाचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करा पाए। पहले बीडीए वाले अवैध कालोनी या अवैध प्लाटिगं करवाएगं, पैसा लेगें, और फिर बाद में ध्वस्तीकरण के नाम पर नोटिस भेजकर धन उगाही करते है। बीडीए का कोई भी ऐसा जिम्मेदार नहीं जिसे यह नहीं मालूम कि बीडीए में कौन-कौन और किस-किसके नाम पर खेल होता है। सड़कों के निर्माण कार्य से लेकर खरीदफरोख्त और भवन निर्माण एवं मानचित्र स्वीकृति में खेल होता है।
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