बस्ती। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को इस लिए सूबे के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि व्यवस्था बिगड़ने न पाए, और मरीजों का समुचित इलाज हो, लेकिन यहां पर तो डिप्टी सीएम के विभाग की व्यवस्था ही चरमरा गई। पहले दिन जब महानिदेषक स्वास्थ्य के निर्देष पर आनलाइन यह पता करने का प्रयास किया कि कौन अधीक्षक सुबह आठ बजे अस्पताल में मौजूद, किसने साढ़े आठ बजे राउंड लिया, 8.30 बजे तक अस्पतालों की साफसफाई हुई कि नहीं, क्या अस्पताल में सभी स्टाफ समय से आ गए, क्या ओपीडी में डाक्टर आठ बजे बैठ गए, क्या सभी चादर 8.30 बजे तक बदले गए, क्या अस्पतालों में डस्टबिन की समुचित व्यवस्था है, क्या अस्पतालों में आठ बजे पर्चे बननें लगे, क्या अस्पतालों में पर्याप्त स्टेचर एवं व्हील चेयर उपलब्ध है और क्या अस्पतालों में अधीक्षकों कें द्वारा साइन बोर्ड लगवा दिए गए है।

अब जरा उस डिप्टी सीएम के विभाग का सच देखिए। जब सूबे के 104 अस्पतालों का सच जाना गया तो जानकर हैरानी होगी कि मात्र 21 अधीक्षक ऐसे मिले जो सुबह आठ बजे तक मिले, 59 अधीक्षक तो मिले ही नहीं, रही बात साढे़ आठ बजे अस्पताल का राउंड लगाने वाले अधीक्षकों की तो उनमें 12 ईमानदार मिले, और 83 दायित्वों के प्रति बेईमान निकले, साफ-सफाई के मामले में 92 अस्पतालों में 8.30 बजे तक सफाई हो चुकी थी, एक अस्पताल में नहीं हुई, सबसे खराब स्थित डाक्टरों के आठ बजे ओपीडी में बैठने की तो 14 बैठे थे, और 73 घर पर आराम कर रहे थे, 40 अस्पतालों में सभी स्टाफ समय से पहुंच गए थे, और 57 लेटलतीफ वाले मिले, 61 अस्पतालों में 8.30 बजे तक बेड की चादरे बदली जा चुकी, और 28 में नहीं, 89 अस्पतालों में डस्टबिन की समुचित व्यवस्था मिली और पांच में नहीं, 84 अस्पतालों में आठ बजे से पर्चा बनना पाया गया, और चार में नहीं, सभी 92 अस्पतालों में पर्याप्त स्टेचर एवं व्हील चेयर की व्यवस्था पाई गई, 62 अस्पतालों में अधीक्षक ने साइन बोर्ड लगवाने में रुचि ली और 25 ने तो बोर्ड ही अब तक नहीं लगवाया। बस्ती के जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल रडार पर रहे। दोनों अस्पतालों के अधीक्षक आठ बजे मौजूद रहने, 8.30 पर राउंड लगाने, 8.30 बजे तक साफसफाई होने, 8.30 तक बेड के चादर बदलने, डस्टबिन की व्यवस्था होने, आठ बजे से पर्चा काटने और स्टेचर एवं व्हील चेयर की व्यवस्था होने में नंबर वन पाए गए। लेकिन दोनों अस्पतालों के अधीक्षक साइन बोर्ड लगावाने में चूक गए। ओपीडी में डाक्टरों के बैठने के मामले में जिला अस्पताल में एक और महिला अस्पताल में चार डाक्टर मौजूद मिले। नई व्यवस्था के तहत अब सभी डाक्टर्स को आठ बजे ओपीडी में बैठ जाना होगा। दिक्कत यह है, कि जिन डाक्टर्स की आदत ही खराब हो गई, उनके आदतों को सुधारना मुस्किल है। दबाव में यह लोग एक दो दिन समय से आ जाएगें, लेकिन अगर एसआईसी यह चाहें कि इन्हें परमानेंट समय से बैठा दे तो, संभव नही, यह तब तक संभव नहीं जब तक इन लोगों के भीतर कर्त्तव्यों का बोध नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत एसआईसी और महिला अस्पताल के अधीक्षक को खुद पहले आठ बजे अस्पताल पहुंचना होगा। एक दिन पहले तक साढ़े आठ बजे तक अपने कार्यालय में सभी की हाजीरी लगाने की व्यवस्था थी, लेकिन अब खुद एसआईसी साहब आठ बजे सभी डाक्टरों के पास जाएगें और उनका फोटो खिचेगें और उसी क्षण लखनउ भेज देगें।