बस्ती। वैसे तो नगर पंचायत बभनान में घोटाला ही घोटाला हुआ, लेकिन रोड लाइट के नाम पर सबसे बड़ा घोटाला होने के दावा किया जा रहा है। अगर कोई नगर पंचायत आरटीआई के तहत मांगी गई, जानकारी को नहीं देती तो माना जाता है, कि उस नगर पंचायत में बहुत बड़ा घोटाला हुआ। ईओ 25 हजार का जुर्माना वेतन से भर देगें, लेकिन जानकारी नहीं देगें, क्यों कि इन्हें अच्छी तरह मालूम हैं, कि जैसे ही जानकारी दिया, उन पर हमला होने लगेगा, इसी लिए सबसे अधिक जुर्माना नगर पंचायत बभनान के ईओ पर अब तक लग चुका हैं। नगर पंचायत बभनान के भ्रष्टाचार के खिलाफ निरंतर आवाज उठाने वाले विवेक तिवारी को आज तक लाइट के बारे में मांगी गई जानकारी नहीं दी गई। जानकारी न देने का मतलब भ्रष्टाचार को छिपाना माना जाता है। अगर चेयरमैन प्रबल मलानी इतने ही ईमानदार होते तो ईओ से कहते कि जानकारी उपलब्ध कराइए। फिर कहा जा रहा है, कि जो नगर पंचायतें आरटीआई के तहत मंागी गई जानकारी नहीं देते, उन नगर पंचायतों को सबसे अधिक भ्रष्ट माना जाता है। कहा भी जाता है, कि नगर पंचायतों को भ्रष्टाचार की आग में झोकने के लिए चेयरमैन को ही जिम्मेदार माना जाता है। क्यों कि भुगतान पर इनके भी हस्ताक्षर होते है। अगर नगर पंचायत बभनान में रोड लाइट के नाम पर घोटाला हुआ तो उसके लिए चेयरमैन भी उतना दोषी हैं, जितना ईओ। नगर पंचायत का चेयरमैन बनते ही इनका सबो पहले हमला रोड लाइट पर ही होता है, क्यों कि इसमें 50 फीसद से अधिक कमीशन मिलता है, कमीशन के चलते जो रोड लाइट पांच साल तक जलनी चाहिए, वह दो साल में ही उसकर रोषनी गायब हो जाती है, फिर होता हैं, मरम्मत के नाम पर खेल, यह नगर पंचायतों की जिम्मेदारी हैं, कि पांच साल तक लाइट जलती रहें। विवेक तिवारी की ओर से आईजीआरएस में की गई शिकायत में कहा गया है, कि वार्ड तीन पटेल नगर में बभनान गौर के किनारे लगे रोड लाइट लगे हुए अभी दो साल भी नहीं हुए कि जलना बंद हो गया, कहते हैं, कि ऐसे रोड लाइट पर लाखों खर्च करने से क्या फायदा जो रोशनी ही न दे, लिखा कि ईओ और चेयरमैन ने मिलकर रोड लाइट में बड़ा घोटाला किया है, जिसकी जांच होनी चाहिए। फिर कह रहा हूं, अगर एक रोड लाइट के नाम पर 55-60 हजार खर्चा हुआ तो जनता को रोशनी भी मिलनी चाहिए, नगर पंचायत ने न सिर्फ रोड लाइट के नाम पर घोटाला किया बल्कि इसके मरम्मत के नाम पर भी घोटाला किया, क्षेत्र के लोगों का कहना है, कि इसकी जानकारी कई बार नगर पंचायत बभनान के कर्मियों को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, यह लोग आईजीआरएस को निस्तारित भी नहीं कर रहे है। प्रबल मलानी को पत्रकार की तरह उन लोगों को भी मारना पीटना चाहिए, जो लोग शिकायत करते है।
सीआरओ’ साहब देखिए ‘बभनान’ में ‘लूट’ मची ‘हुई’
जब स्थानीय नगर निकाय का प्रभार सीआरओ कीर्तिप्रकाश भारती को मिला तो लोगों को लगा कि अब नगर पंचायतों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, लेकिन ऐसरा कुछ भी नहीं हुआ, जिसकी उाम्मीद की जा रही है। मैडम ने अधिकारी तो बदल दिए, लेकिन अधिकारी वह परिणाम नहीं दे सके, जिसकी उम्मीद थी, नगर पंचायत के एक जिम्मेदार का कहना है, कि न तो क्रांति आई और न व्यवस्था ही सुधरी, पहले की तरह व्यवस्था चल रही है, कहते हैं, कि तो फिर व्यवस्था बदलने से क्या लाभ हुआ? मीडिया पहले ही बता चुकी है, कि कूबत हो तो व्यवस्था बदलिए, अधिकारी नहीं। डीएम मैडम को यह समझना होगा कि चेयरमैन के रहते कोई सुधार हो ही नहीं सकता है, ईओ वही करते हैं, जो चेयरमैन चाहते हैं, और चेयरमैन सबसे पहले अपना हित देखेगें। अगर मैडम को सच देखना हो तो बभनान आ जाइए, और क्षेत्रीय लोगों से विकास के बारे में पूछिए, तब आप को पता चलेगा, कि चेयरमैनों को सुधारना कठिन ही नहीं नामुमकिन सा है। नगर पंचायत बभनान को अकेले चेयरमैन और ईओ ही नहीं लूट रहे हैं, बल्कि इस लूट में गनेशपुर के ठेकेदार आशुतोष श्रीवास्तव भी षामिल है। 50 फीसद से अधिक ठेका पटटी का काम यही ठेकेदार साहब अकेले करते है, और सबसे अधिक सवाल इन्हीं के द्वारा कराए गए कार्यो पर उठ रहा है।
0 Comment