बस्ती। शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कसीदे पढ़ने वाले निर्वतमान रामनगर के प्रमुख यशकांत सिंह को यह नहीं भूलना चाहिए, कि यह वही धमेंद्र प्रधान हैं, जिन्हें यूजीसी जैसा काला कानून लाने के लिए हमेशा याद किया जाएगा, यह वही शिक्षा मंत्री है, जिनके कार्यकाल में नीट का पेपर लीक हुआ, और जिसके चलते 22 छात्र/छात्राएं आत्महत्या कर चुके है। क्या ऐसे मंत्री को देश का युवा कभी भूल पाएगा? आप जंतर मंतर पर लाडियां खाने वाले बच्चों और लड़कियों का कपड़ा फाड़ने और उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला बोलने वाले पुलिस कर्मियों के बारे में क्यों नहीं कुछ बोले? क्यों नहीं पेपर लीक पर कुछ बोले? क्यों अब बोले जब धमेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, आपने भी वही गलती की जो पूर्व सांसद ने की थी, और आपके बारे में भी वही कमेंट आ रहे हैं, जो पूर्व सांसद की टिपणी करने के बाद आया था। सोचिए जरा, देश का युवा धमेंद्र प्रधान को किस लिए याद करेगें, आपका यह कहना कि प्रधानजी का शिक्षा मंत्री के रुप में कार्यकाल एक ऐसे जनप्रतिनिधि की पहचान बनकर सामने आया, जिसकी जड़े छात्र आंदोलन से जुड़ी रही, और जिसकी सोच हमेशा युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्रीय रही, यशंकातजी युवाओं के भविष्य के प्रति अगर इनकी सोच यही रही होती तो लाखों युवाओं का भविष्य न बर्बाद होता, और न 22 छात्र/छात्राएं आत्महत्या ही करती। जिस मंत्री को इतनी बड़ी घटना के बाद नैतिकता के नाते इस्तीफा दे देना चाहिए था, उससे इस्तीफा लेने के लिए बच्चों को लाडियां खानी पड़ी और वांगचुक जैसे को अपनी जिंदगी को दांव पर लगाना पड़ा। यशंकांतजी आप इनके शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को भले ही सम्मानपूर्वक याद कीजिए, लेकिन देश का युवा इन्हें कभी याद नहीं करेगा।
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