बस्ती। जिले के लोग और मीडिया प्रशासन से बार-बार जागने को कह रहा है, लेकिन प्रशासन है, कि जागने का नाम ही नहीं ले रहा, लखनऊ अग्निकांड का हवाला देकर कहा जा रहा है, कि अब तो जाग जाइए, नहीं तो जिले में लखनऊ से भी बड़ी घटना हो सकती है, क्यों कि मैरिज हाल और होटलों में सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है? हर पल बारातियों और होटलों में रहने वालों को यह डर सताता रहता है, कि कब उन्हें आग की लपटों का सामना करना पड़े। शासन और प्रशासन वाले तभी जागते हैं, जब कोई बड़ी दुर्घटना होती है। उससे पहले मीडिया और जनता कितना भी चिल्लाए लेकिन इन लोगों के कान में जूं तक नहीं रेगंता। सालों से मीडिया कहती और लिखती आ रही कि साहब उन मैरिज हाल और होटल की जांच करवा लीजिए, जहां पर फायर बिग्रेड की गाड़ी तक नहीं पहुंच सकती, जिले में एक फीसद भी मैरिज हाल और होटल मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, फिर भी यह धड़ल्ले से चल रहे है। शहर में ही अनगिनत ऐसे मैरिज हाल और होटल हैं, जो सुरक्षा के मानकों की धज्जियां उड़ा रहें हैं। किसी दिन जब लखनऊ जैसी बड़ी घटना हो जाएगी, तो आनन-फानन में गलती निकाली जाएगी। तब होटल एवं मैरिज हाल के मालिक को हिरासत में लिया जाएगा। हैरानी होती है, कि इतने सालों में भी प्रशासन सराय एक्ट के तहत न तो मैरिज हाल और न होटल का ही पूरी तरह पंजीकरण करा पाया। बार-बार यह कहा जा रहा है, कि प्रशासन उस समय कोई जबाव नहीं दे पाएगा, जब कोई घटना हो जाएगी। कहा भी जाता है, कि जब तक सराय एक्ट के तहत मैरिज हाल और होटल का पंजीयन नहीं हो जाता, तब तक असुरक्षा की भावना रहेगी।
फारमेल्टी निभाने के लिए सराय एक्ट के तहत एडीएम कार्यालय से पंजीकरण कराने के लिए नोटिस तो जारी कर दिया जाता है, लेकिन यह नहीं देखा जाता कि कितने लोगों ने आवेदन किया और कितने का पंजीकरण हुआ। पिछले कई सालों से नोटिस भेजने का खेल देखा जा रहा है। फायर बिग्रेड से लेकर एडीएम कार्यालय तक पंजीकरण के नाम पर मैरिज हाल और होटल वालों का षोषण कर रहें हैं। जो पंजीयन कराना भी चाहते, उनका भी नहीं कर रहें। मैरिज हाल और होटलों का संचालन करने वालों को यह समझना होगा, कि सबसे पहले उन्हीं के खिलाफ प्रशासन मुकदमा दर्ज कराएगा और जेल भेजेगा। इस लिए जिन लोगों का पंजीकरण नहीं हैं, उन सभी को अगर जेल जाने से बचना है, तो प्रशासन पर पंजीकरण करने का दबाव बनाना होगा, क्यों कि एडीएम कार्यालय पंजीकरण न करने का आरोप बार-बार लग रहा है। सच जो यह है, कि किसी को भी कोई परवाह नहीं चाहें कोई जिए या मरे, कोई मतलब नहीं, अगर मतलब होता तो सबसे अधिक संवेदनशील मैरिज हाल और होटल जहां पर हूजूम रहता है, में सुरक्षा की व्यवस्था कराते, और यह तभी होगा जब सराय एक्ट के तहत पंजीकरण होगा, और पंजीकरण तभी होगा, जब एडीएम और उनका कार्यालय चाहेगा। एडीएम कार्यालय को तो सिर्फ नोटिस के नाम पर दोहन करना आता है, पंजीकरण करना नहीं, बड़ेबन के पास तीन ऐसे मैरिज हाल है, जिनकी दूरी एक दूसरे मैरिज हाल से मात्र 10 फीटर भी नहीं, और इन तीनों मैरिज हाल तक जाने के लिए 15 फीट का भी रास्ता नहीं हैं, अब जरा अंदाजा लगाइए कि एक ही साथ तीन बारात की अगुवानी होती है, और अगर कहीं पटाखा जलाते समय कोई आगजनी की घटना हो गई तो कोई भाग भी नहीं पाएगा। यह तीनों मैरिज हाल बीडीए के मानक के विपरीत है। इन तीनों मैरिज हाल की फोटो भी कई डीएम और एडीएम मीडिया दिखा चुकी है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीडीए वाले अलग से पैसा लेकर किनारे हो गए, फायर बिग्रेड वालों ने अलग से अपनी जेबें भरी, रही बात एडीएम कार्यालय की तो सबका केंद्र यही है। यहीं पर पंजीकरण होता और यहीं पर सौदा भी होता है। यह सौदेबाजी इंसानों की जान की कीमत पर होती है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है, कि जितने भी मानक विहीन मैरिज हाल और होटल का संचालन हो रहा है, उन लोगों के खिलाफ प्रशासन और फायर बिग्रेड ने आज तक क्या कार्रवाई की, अगर की तो क्यों नहीं उसे सार्वजनिक किया? अगर नहीं की तो उसकी जबावदेही तय होना चाहिए। लगभग छह माह पहले सीओ सिटी ने आधा दर्जन से अधिक बदनाम होटलों पर छापा मारा, लगभग सभी में गैरकानूनी कार्य करते मिला, कार्रवाई करने के लिए रिपोर्ट डीएम को की गई, डीएम ने एडीएम को थमा दिया, जानकर हैरानी होगी कि आज तक उन बदनाम होटलों के संचालकों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई हुई, और न एक भी होटल को सील किया गया, नतीजा पहले से अधिक बदनाम होटलों में गैरकानूनी काम होने लगें। जानकर हैरानी होगी कि बलात्कार की षिकार लड़कियों ने कोर्ट के सामने उन होटलों का नाम बताया, जहां पर उनसे गलत काम करवाया जाता है, इनमें सबसे अधिक बयान रोडवेज स्थिति एक नेताजी के होटल का भी नाम है। अब आप समझ गए कि जब प्रषासन ही नहीं चाहेगा तो कैसे गैरकानूनी काम रुकेगा? और कैसे मैरिज हाल एवं होटलों का पंजीकरण होगा? प्रशासन के सामने अभी भी अपंजीकृत मैरिज हाल और होटलों का पंजीकरण कराने का समय है। हो सकता है, कि प्रशासन के प्रयास से कईयों की जान बच जाए। कहने का मतलब आम जन की जान बचाना प्रशासन और फायर बिग्रेड के हाथ में है। भगवान इन दोनों को जितना जल्दी हो सके सदबुद्वि दे। इसी में हम सब की भलाई है।
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