बस्ती। घरेलू गैस की कालाबाजारी के मामले में गैस एजेंसियों की पोल खुल गई है। गैस उपलब्धता के मामले में इन लोगों ने प्रशासन, डीएसओ एवं खुद को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया। संत कुमार पुत्र रामकृपाल निवासी बड़ेबन सल्लू कबाड़ी के पास व संतोष पुत्र जयराम निवासी मरवटिया साउघाट टोल प्लाजा स्थित ‘सन इंडेन गैस एजेंसी’ से सिलेंडर खरीदकर कालाबाजारी करते पकड़े गए, इससे गैस एजेंसी के प्रोपराइर्ट की कलई खुल गई। सवाल उठ रहा है, कि क्यों नहीं डीएसओ ने गैस एजेंसी के प्रोपराइटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाकर जेल भेजवाया? क्यों दो हाकर को बलि का बकरा बनाया? जब डीएसओ से यह पूछा गया कि क्या कालाबाजारी के लिए सिर्फ दो हाकर ही जिम्मेदार हैं? क्या गेैस एजेंसी के प्रोपराइटर की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? इस सवाल पर डीएसओ साहब बगले झांकने लगें। इससे पता चलता है, कि विभाग ने गैस एजेंसी के प्रोपराइटर के खिलाफ मुकदमा न दर्ज करवाकर, गैस की कालाबाजारी को बढ़ावा दिया है। यह तो वही बात हुई, कि ‘मलाई खाए मालिक और जेल जाए नौकर’। डीएसओ के अनुसार अगर प्रोपराइटर कालाबाजारी के लिए गैस ले जाते पकड़े जाते, तब उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होता और उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ती। डीएसओ साहब से यह भी पूछा गया, कि क्या आप के अब तक के कैरियर में कोई प्रोपराटर खुद गेैस की कालाबाजारी करने के लिए सिलेंडर ले जाते पकड़ा गया, पर चुप रहे। डीएसओ साहब से यह भी कहा कि सर छोटी-छोटी मछली को पकड़ने और उन्हें जेल भेजने से कालाबाजारी रुकने वाली नहीं हैं, जबतक कि बड़ी मछली को जेल नहीं भेजेगें, तब तक आपकी उपलब्धि नहीं मानी जाएगी। चूंकि जितनी भी बड़ी मछली है, वे सभी जिंदा रहने के लिए साहबों को चारा खिलाते है। अब जरा अंदाजा लगाइए, कि एक तरफ एडीएम और डीएसओ एचएमवी की तरह रिकार्ड बजा रहे हैं, कि जिले में न तो गैस और न तेल की कोई कमी है, दूसरी तरफ कहना गलत नहीं होगा गैस की कालाबाजारी गैस एजेंसी के प्रोपराइटर ही करवा रहे हैं। आपदा के अवसर का लाभ उठा रहे है। जो लोग अवसर का लाभ उठा रहें हैं, उन लोगों के पास दौलत का भंडार हैं। नामीगिरामी लोग है। इन्हें ऐसे अवसर पर एक आइडिएल बनना चाहिए था, लेकिन चोर बन गए। गैस की चोरी करवा रहे है। बड़ा सवाल उठ रहा है, कि आखिर ब्लैक में कैसे इनका हाकर दो हजार में बेच रहा है, और यह भी कहता है, कि जितना गैस चाहिएगा, फोन कर दीजिएगा, हिम्मत तो देखिए फोन नंबर भी देता है। लाइन लगाने वालों को नहीं मिलता लेकिन ब्लैक में मिल जाता है। एक तरह से जिले में दो प्रकार के वितरण की व्यवस्था चल रही है, पहला ब्लैक जो कि सुलभ हैं, दूसरा लाइन जो दुलर्भ। दोनों व्यवस्था का संचालन करने वाले प्रोपराइटर ही होते है। जिस तरह पकड़े गए दोनों ने यह कहा कि हम लोग सभी गैस एजेंसियों ने जब भी और जितना भी चाहते हैं, सिलेंडर ले लेतें हैं, अगर एक सिलेंडर पर एक हजार का भी लाभ हुआ तो एक दिन में कितना होता होगा इसका अंदाजा लगाना कठिन होगा। कहा भी जाता है, कि जिस दिन प्रोपराइट ईमानदार हो जाएगें, उस दिन न तो कोई लाइन लगेगी और न ब्लैक ही होगा। अगर यह लोग सरकार और समाज के प्रति आज ईमानदार नहीं दिखाएगें तो कब दिखाएगें? ईमानदारी प्रशासन और डीएसओ को भी दिखानी होगी, तभी अधिकारियों का जयजयकार होगा, वरना उपभोक्ता इसी तरह योगी और मोदी को गाली देते रहेगें। गैस वितरण के मामले में एक भी प्रोपराइटर ने आइडिएल बनने का प्रयास नहीं किया। जोर देकर कहा जा रहा है, कि जब तक बड़ी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गैस की कालाबाजारी होती रहेगी। चंूकि यह लोग आर्थिक और राजनैतिक रुप से इतने मजबूत होते हैं, कि गुनहगार होते हुए भी इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती, न जाने क्यों ऐसे समाज और सरकार के दुष्मनों के खिलाफ कार्रवाई करने में स्थानीय प्रशासन और विभाग के हाथ पैर फूलने लगते है। दर्ज कराए गए एफआईआर में स्पष्ट कहा गया कि वह लोग आज से नहीं बल्कि 10-12 सालों से गैस एजेंसी की मिलीभगत से गैस की कालाबाजारी कर रहे है। इसका मतलब यह हुआ कि यह गोरखधंधा पिछले 12 सालों से चल रहा है, क्या ऐसा हो सकता है, कि यह अवैध कारोबार बिना प्रोपराइटर की जानकारी और लाभ के हो रहा होगा। 12 साल बाद विभाग अगर कोई कार्रवाई करता है, तो यह माना जाता है, कि इस अवैध कारोबार में विभाग के लोगों की भी मिली भगत होगी। सन इंडेन गैस एजेंसी पटेल चौक के हाकर पारसनाथ चौधरी निवासी लहिलवारा, ने कप्तानंगज से 14.2 किलो का एलपीजी रिफिल 16 सौ में खरीदा और उसे दो हजार में बेच दिया। मौके पर हाकर ने बयान दिया कि उसने 15 सौ के दर से 19 सिलेंडर पटेल चौक की एजेंसी से खरीदा। उसे दो हजार में बेचना था। ध्यान देने वाली बात यह है, कि 19 सिलेंडर से लदी जो वाहन पकड़ा गया वह इंडेन का था। मतलब सिलेंडर भी एजेंसी का और वाहन भी एजेंसी का। इन लोगों के पास कोई वैध पहचान पत्र भी नहीं था। जब एजेंसी से ही गैस की कालाबाजारी होगी तो, उपभोक्ताओं का प्रशासन और विभाग नहीं बल्कि भगवान ही मालिक होगा।
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