बस्ती। ठगबाजों का न तो कोई जाति होता है, और न उनका कोई क्षेत्र होता है। यह लोग इतने चालाक होते हैं, कि ठगने से पहले बचने का रास्ता निकाल लेते है। इसी लिए सयाइबर क्राइम ब्रंाच वाले उतने सफल नहीं होते, जितना ठगबाज सफल रहते है। इसका सबसे बढ़िया उपाय जागरुकता ही है। साइबर क्राइम ब्रांच वाले भी कहते हैं, कि जब तक लोग जाग$क नहीं होगें, तब तक ठगने वाले ठगते रहेगें। इस लिए जागरुक होना उतना ही आवष्यक हैं, जितना भोजन करना। बहरहाल, अभी तक लोग आनलाइन टेंडिगं और दोगुना तीन गुना करने के नाम पर ठगी का शिकार होते रहे हैं, लेकिन अब तो स्कूटी की भी ठगी होने लगी है। इसे देखते हुए अब तो किसी पड़ोसी या फिर अपनों को स्कूटी या मोटरसाइकिल देने से पहले यह सोचना होगा कि दें या न दें। कम से कम इस घटना के बाद से तो स्कूटी देने वालों को भी सावधान होना पड़ेगा। लिखा कि 20 नवंबर .2025 को प्रार्थिनी के घर प्रतिवादी ओमकार तिवारी आये और प्रार्थनी से बोले की अपनी स्कूटी मुझे देदो मै अपना काम करने के बाद तुमको लौटा दूंगा। प्रतिवादी प्रार्थिनी का जानने वाला था। इसलिये प्रार्थिनी ने अपनी स्कूटी प्रतिवादी को दे दिया। मांगने पर देने से ही इंकार कर दिया। स्कूटी वापस देने के बजाए जान से मारने की धमकी देने लगा।