बस्ती। अब तो ठगी का षिकार जज साहब के टाइप बाबू भी होने लगें। जिस टाइप बाबू ने कभी ठगबाज को देखा नहीं सिर्फ वाट्सअप से बात किया, उसके झांसें में आकर टाइप बाबू ने आनलाइन टेडिगं में पैसा कमाने के चक्कर में 20.25 लाख दे दिया। यह पहला ऐसा एफआईआर होगा, जिसमें ठगबाज का नाम नहीं, अज्ञात के नाम से एफआईआर हुआ। यह एफआईआर सीतापुर रोड ़निराला नगर लखनऊ निवासी और जनपद न्यायालय में कार्यरत टाइप बाबू विधेय मिश्र पुत्र बृजेश कुमार मिश्र ने साइबर थाने में दर्ज कराया।

मीडिया सचेत करते-करते थक जा रही है, लेकिन कोई सजेत ही नहीं हो रहा है। ठगबाजों के हाथ लूटते चले जा रहे हैं, लेकिन सजग नहीं हो रहे है। अब तो आनलाइन टेडिगं के नाम पर ठगने का कारोबार शुरु हो गया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि एक टाइप बाबू हजार दो हजार भी नहीं 20 लाख से अधिक ऐसे व्यक्ति के हवाले कर देतें हैं, जिन्होंने कभी उसे देखा तक नहीं, अगर कोई किसी को वाट्सअप के जरिए बात करके 20.25 लाख ऐंठ लेता है, तो बेवकूफ कौन हुआ, ठगने वाला या फिर पैसा देने वाला। भले ही चाहें मिश्राजी से सात बार में कलिता इंटरप्राइजेज के विभिन्न बैंकों के खाते में पैसा भेजा, लेकिन भेजा तो, टाइप बाबू ने न जाने कैसे-कैसे करके पैसा जमा किया और ठगबाज वाट्सअप से बात करके 20.25 लाख ले उड़ा। पैसा मिलेगा कि नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं। साइबर वाले भी परेशान हैं, कि आखिर क्यों लोग इस तरह जीवनभर की कमाई को लालच में आकर लुटा दे रहे है। ठगबाज ने पहले फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा, फिर बातचीत के दौरान आनलाइन टेडिगं के जरिए पैसा कमाने का लालच दिया, वर्षा मिश्रा ने उसका आईडी भी बनाया। सात बार में जो आनलाइन पैसा दिया गया, वह 17 मार्च 26 और सात अप्रैल 26 के बीच दिया गया। भाई मेरे अब तो सचेत हो जाओ। अपने आस पास के लोगों के बारे में जानिए, और किसी के भी बहकावे या फिर लालच में मत आइए, वरना जिंदगी भर की वैध/अवैध कमाई को कोई ठगबाज मिनटों में ले उड़ेगा। फिर कहा जा रहा है, कि कभी भी दो गुना-तीन गुना के लालच में पड़कर जमापूंजी मत लगाना। जो लोग अपना बनकर ठगते हैं, उन्हें अच्छी तरह मालूम रहता है, कि जिसे हम लालच देकर ठग रहे हैं, उसका दो नंबर का पैसा हैं, कभी बात भी बिगड़ जाएगी तो वह पुलिस के पास नहीं जाएगा, इसी का षिकार एक डाक्टर साहब के पुत्र भी हैं, इनका लगभग दो करोड़ एक नामचीन बस्ती का ठग ने ठग लिया, अब बेचारे डाक्टर साहब न तो एफआईआर दर्ज करवा पा रहें और न न्यायालय में ही जा पा रहे है।  बस्ती में ऐसे भी ठगबाज हैं, जिनका पेशा ही अपने लोगों को ठगना। इतनी ठगी और बेईमानी करने के बाद भी यह लोग कैसे लक्जरी लाइफ बीता रहे है, सोचने वाली बात है। ऐसे लोगों के चेहरे और आव भाव से लगता ही नहीं कि यह लोग इतने बड़े ठगबाज होगें, ऐसे लोगों के ठगी का शिकार अब तक बड़े-बड़े लोग हो चुके है। चौकिएं मत, ज्ञान देने वाले पत्रकार भी ऐसे लोगों के झांसे में आ चुके है। लोगों का कहना है, कि अगर बस्ती के ठगबाज अपने कारोबार पर उतना ध्यान दे जितना ठगी में देते हैं, तो कारोबार भी बढ़ेगा और कोई ठगबाज भी नहीं कहेगा। लेकिन जिसकी फिदरत ही लोगों को ठगने की हो, वह कैसे एक अच्छा नागरिक बन सकता है।