बस्ती। चीनी मिल वाल्टरगंज को चालू कराने की मांग को लेकर चल रहा धरना आज ’326वें दिन’ में प्रवेश कर गया। किसानों, मौसमी कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टरों का धैर्य टूट रहा है, पर सरकार की चुप्पी बरकरार। आज ’एसडीएम सदर शत्रुघ्न पाठक’, ’नायब तहसीलदार कमलेन्द्र प्रताप सिंह’, ’जीएम टेक्निकल सहकारी गन्ना मिल मुंडेरवा’, ’राजकीय पॉलीटेक्निक बस्ती’ और ’राजकीय आईटीआई बस्ती’ की संयुक्त टीम मिल परिसर पहुंची। धरने पर बैठे लोगों की उम्मीद थी कि टीम बंदी के कारणों की जांच कर, मिल चालू कराने की कोई ठोस रिपोर्ट देगी। पर टीम ने ’क्या किया, क्या जांचा, क्या रिपोर्ट बनाई कुछ नहीं बताया। सिर्फ मौसमी कर्मचारियों को इतना कहकर टाल दिया गया कि ’“मिल प्रबंधन मिल नहीं चलाएगा, सरकार केवल कुर्की कर बकाया देयक का भुगतान करेगी। ’टीम के जाते ही आया श्रम विभाग का आश्वासन’ टीम के जाने के तुरंत बाद ’आयुक्त बस्ती मंडल’ के आदेश पर ’उप श्रमायुक्त बस्ती मंडल’ के निर्देश पर ’सहायक श्रमायुक्त बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर’ धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि ’“बिना क्लोजर के बंद पड़ी चीनी मिल, आपको एक-एक पाई का भुगतान करेगी। ’सवाल वही कब?’ आठ साल से बंद मिल, 250 मौसमी कर्मचारी, 400 डेली वेजअप्रेंटिस और करोड़ों का गन्ना बकाया। प्रशासन की टीमें आती हैं, आश्वासन देकर चली जाती हैं, पर मिल का गेट नहीं खुलता। धरनारत किसान चंद्रेश प्रताप सिंह ने कहा ’“326 दिन हो गए। अब हमें रिपोर्ट नहीं, मिल चाहिए। अगर सरकार नहीं चलाएगी तो बताए कि मिल को बेचा किसे जाएगा और हमारा हक कौन देगा।”’