बस्ती। जनपद सिद्वार्थनगर का सिचांई विभाग प्रदेश का पहला ऐसा विभाग बना जहां पर एआई के जरिए बड़ा घोटाला किया गया। एआई के जरिए तटबंधों को चमका दिया गया। इस विभाग के साहबों ने ऐसा घोटाला किया, जिसे पकड़ पाना मुस्किल था, अगर भाजपा के मंडल महामंत्री अमर बहादुर सिंह ने इसकी शिकायत न किया होता तो किसी को एआई घोटाले के तरीके का पता ही नहीं चलता। सरकारी विभागों में बजट को ठिकाने लगाने के लिए कैसे-कैसे फॉर्मूले ईजाद किए जाते हैं, इसका एक नायाब नमूना उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में देखने को मिला। इंजीनियरों ने घोटाले को अंजाम देने के लिए इस बार एआई का सहारा लिया है, बिना कार्य कराए एआई की मदद से फोटो लगाई गई और भुगतान करा लिया गया। बाणगंगा एफलेक्स तटबंध की सुरक्षा और मरम्मत, नहरों की सफाई, सड़क निर्माण के नाम पर ड्रेनेज खंड 4 (सिंचाई विभाग) ने कागजों पर एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसे देखकर खुद सत्ताधारी दल के नेता भी दंग हैं। आरोप है कि विभाग ने पूरे जिले के तटबंधों को दरकिनार करते हुए, महज 7 फीसदी हिस्से पर कुल बजट का 26 प्रतिशत से ज्यादा यानी 1 करोड़ 3 लाख 81 हजार 62 रुपये पानी की तरह बहा दिए उसके बावजूद धरातल पर काम नहीं किया गया जिसकी शिकायत अब शासन तक पहुंच गई है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री अमर बहादुर सिंह ने सीधे प्रशासनिक अमले और सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए मंडलायुक्त बस्ती अखिलेश सिंह को शिकायती पत्र भेजा है। इसके बाद से ही सिंचाई विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। शिकायत के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शासन से भारी-भरकम बजट स्वीकृत हुआ था। यह धनराशि जिले के विभिन्न उपखंडों में तटबंध मरम्मत और बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए थी लेकिन विभागीय अधिकारियों और चुनिंदा ठेकेदारों के कथित मिलीभगत से इस बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल चतुर्थ उपखंड के खाते में डाल दिया गया। आरोप है कि 19 अगस्त 2025 से 24 नवंबर 2025 के बीच, जब बाढ़ का खतरा टल रहा था, तब अलग-अलग वाउचरों के माध्यम से लाखों रुपये धड़ाधड़ निकाल लिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां पैसे पानी की तरह बहे, वहां जमीन पर काम संतोषजनक नहीं है। वहीं दूसरी ओर प्रथम, द्वितीय और तृतीय उपखंड के अंतर्गत आने वाले कई प्रमुख तटबंध आज भी बदहाल स्थिति में हैं, जिससे आने वाले मानसून में दर्जनों गांवों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है।
मामले को उजागर करने वाले भाजपा नेता अमर बहादुर सिंह का कहना है कि, सिर्फ एक उपखंड के बिलों को प्राथमिकता के आधार पर पास किया गया ताकि चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके। भुगतान प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई। अगर इस घोटाले की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो आने वाली वर्षा ऋतु में यह कागजी मरम्मत ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस बड़े वित्तीय उलटफेर के आरोपों पर ड्रेनेज विभाग बैकफुट पर तो है, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता कृपाशंकर भारती पहले तो सिर पर कुछ भी कहने से इनका कर दिया और मुंह छिपाकर भागने लगे, मगर जब इनसे सवाल किया गया तो म्Ûमद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, सभी आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। मुख्यालय के निर्देश पर एक जांच टीम पहले ही गठित की जा चुकी है। कुछ दिन पहले टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की टीम भी मौके का निरीक्षण कर चुकी है। सभी कार्य मानकों और नियमानुसार ही कराए गए हैं। वही मुख्य अभियंता विकास सिंह गंडक सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने इस प्रकरण को कहा जांच के लिए टीम बनाई गई है, अगर बिना काम भुगतान हुआ है तो वे खुद मौके पर निरीक्षण करने जाएंगे, वही बस्ती मंडल के अधिक्षण अभियंता गंडक बाढ़ सुरेन्द्र मोहन वर्मा ने कहा मामला गंभीर है, जांच के लिए उनके स्तर से भी एक टीम गठित की गई है जो जांच करके मामले की जानकारी देगी। मंडल के आयुक्त अखिलेश सिंह ने भी इस घोटाले के लिए डीएम सिद्धार्थनगर को जांच के लिए आदेशित किया है।
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