बस्ती। विधुत कटौती के चलते पूरा जिला परेशान है। कुछ तो विधुत आपूर्ति के चलते लोगों को समय से बिजली नहीं मिल पा रही है, और कुछ लोकल फाल्ट के चलते उपभोक्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उपभोक्ता जाए तो कहां जाए। अगर किसी को हफतों बिजली नहीं मिलेगा तो लोग सड़क पर उतरेगें ही। धरना प्रदर्षन भी करेगें, अधिकारियों का घेराव भी करेगें। अधिकारियों का उपभोक्ताओं का फोन न उठाना सबसे बड़ी समस्या बनी हुई, अगर किसी उपभोक्ता को यह पता चल जाए कि बिजली किस समय आएगी, आएगी भी कि नहीं, तो भी उपभोक्ता उतना नाराज नहीं होगा। जो सरकार अपने उपभोक्ताओं की बिजली नहीं दे सकती तो ऐसी सरकार के होने और न होने से क्या लाभ? सरकार को अच्छी तरह मालूम रहता है, कि गर्मी के दिनों में बिजली की खपत अधिक हो जाती है, और लोकल फाल्ट के साथ टासंफारमर भी जलते, फिर भी सरकार की ओर से कोई रणनीति नहीं बनाई जाती। उपभोक्ता तो बिजली का बिल देने को तैयार हैं, लेकिन सरकार बिजली देने को नहीं तैयार।

एक तरफ प्रदेश सरकार गांव-शहरों में बेहतर बिजली व्यवस्था के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जनपद का रुधौली क्षेत्र अघोशित विद्युत कटौती से कराह रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि रातभर बिजली के इंतजार में जाग रही जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गई है। लगातार दो-तीन दिनों से घंटों बिजली गुल रहने, अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने और रात्रि निवास न करने से नाराज सैकड़ों उपभोक्ताओं ने रुधौली विद्युत उपकेंद्र पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उपकेंद्र परिसर “जेई-एसडीओ की मनमानी नहीं चलेगी” और “जनता को जवाब दो” जैसे नारों से गूंज उठा। धरना दे रहे लोगों का आरोप है कि भीषण गर्मी में छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं पूरी रात तड़पते रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलना तक उचित नहीं समझते। उपभोक्ताओं ने साफ कहा कि “जब खुद एसी से बाहर निकलेंगे तब जनता का दर्द समझ आएगा। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि विभाग को पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी की जानकारी थी। अधिशाशी अधिकारी कार्यालय द्वारा 16 अप्रैल 2026 और 17 अप्रैल 2026 को ग्रुप हटने के बाद कुशल लाइनमैनों की मांग की गई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने व्यवस्था सुधारने की बजाय फाइलों में मामला दबाकर छोड़ दिया। एसडीओ ने खुद स्वीकार किया कि शहरी क्षेत्र में केवल 2 लाइनमैन और 4 श्रमिक तहसील व टाउन की व्यवस्था संभाल रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 3 लाइनमैन और 6 श्रमिक पूरे 7 फीडरों का भार उठाने को मजबूर हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग को पहले से संसाधनों की कमी का पता था तो आखिर जनता को अंधेरे में क्यों धकेला गया? धरना प्रदर्शन के दौरान उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी समस्या उठाई तो उन्हें जेल भेजवाने और “फिंकवा देने” जैसी बातें कही गईं। इससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिकारी जनता की आवाज सुनने के बजाय डराने का प्रयास कर रहे हैं। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब बढ़ती नारेबाजी और आक्रोश के बीच एसडीओ और जेई उपकेंद्र से गायब हो गए। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जनता के सवालों का जवाब देने की बजाय अधिकारी मौके से हट गए और उच्च अधिकारियों को बुलाने की मांग लगातार अनसुनी की जाती रही। धरने में राजकुमार सोनी, दिनेश, विनोद, आदित्य विजय तिवारी, सुजीत सोनी, पंकज सिंह समेत सैकड़ों लोग शामिल रहे। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और बड़ा होगा तथा इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह विद्युत विभाग की होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जनता समय से बिल जमा करे, भीषण गर्मी में परेशान भी रहे और ऊपर से अधिकारियों की मनमानी भी सहे आखिर कब तक?