बस्ती। चार दिन पहले एमएलसी देवेद्र प्रताप सिंह ने सदन में शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए खलबली मचा दी थी। एमएलसी साहब का सच देवरिया के बीएसए में तैनात गोरखपुर- सहाबाजगंज निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड करते हुए लिखा कि “मैं मरना नहीं चाहता था, मैं अपने बच्चों के लिए जीना चाहता था, लेकिन मुझे मरने के लिए मजबूर कर दिया गया”। कहा भी जाता है, कि सरकारी व्यवस्था और सूदखोरों में कोई अंतर नहीं दिख रहा। कृष्ण मोहन सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे ,एक शिक्षक जो बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का रास्ता दिखाता था, आज खुद अपने ही जीवन की लड़ाई हार गया, देवरिया से जुड़े इस शिक्षक ने गोरखपुर में अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली, लेकिन जाने से पहले एक वीडियो और शब्दों में अपना दर्द छोड़ गए “मैं मरना नहीं चाहता था मैं अपने बच्चों के लिए जीना चाहता था लेकिन मुझे मजबूर कर दिया गया”
सोचिए, उस पिता के दिल पर क्या बीती होगी, जब पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े होंगे, बैंक से कर्ज लेना पड़ा होगा, हर दिन उम्मीद की होगी कि अब सब ठीक होगा। लेकिन जब मेहनत की कमाई भी बेबसी हो जाए, जब इंसान न्याय के लिए दर-दर भटके, जब सम्मान बार-बार ठुकराया जाए तो दिल टूटता नहीं, बिखर जाता है। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने 16 लाखों रुपये की मांग और मानसिक दबाव का जिक्र किया, अपनी इज्जत, अपना घर, अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया फिर भी उन्हें सिर्फ इंतजार और अपमान मिला,
सबसे बड़ा सवाल व्यवस्था पर है। बीएसए कार्यालय के ‘सिस्टम’ की संवेदनहीनता ने एक शिक्षक की जान ले ली, आज एक पत्नी की दुनिया उजड़ गई, बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया३ एक परिवार की रोशनी बुझ गई। एक शिक्षक चला गया, पर व्यवस्था पर सवाल छोड़ गया, क्या हालात इतने कठोर हो सकते हैं कि एक ईमानदार इंसान की जीने की उम्मीद ही छीन लें?
0 Comment