बस्ती। रुधौली तहसील एवं विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़ाडीहा उर्फ भोपालपुर में बने सामुदायिक शौचालय की स्थिति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर ग्रामीणों द्वारा शौचालय की बदहाल स्थिति, साफ-सफाई में लापरवाही और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम प्रधान पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे आपसी विवाद का परिणाम बताया है।

मीडिया टीम ऑनलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए प्रवीण कुमार चौधरी ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत में बने सामुदायिक शौचालय की नियमित साफ-सफाई नहीं की जाती। उनका कहना है कि शौचालय में न तो पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही नियमित रूप से सफाई कराई जाती है। शिकायतकर्ता के अनुसार शौचालय परिसर में गंदगी फैली रहती है तथा उसका उपयोग सार्वजनिक सुविधा के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। प्रवीण कुमार चौधरी ने आरोप लगाया कि शौचालय के रखरखाव और साफ-सफाई के नाम पर सरकारी धन का व्यय दिखाया जा रहा है, जबकि धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा अब तक हुए खर्च का लेखा-जोखा सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। वहीं, इस मामले में प्रधान का कामकाज देखने वाले अवधेश यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए जा रहे आरोप व्यक्तिगत और आपसी विवाद से प्रेरित हैं। अवधेश यादव के अनुसार शिकायतकर्ता का मनरेगा जॉब कार्ड लगाया गया था और उसके खाते में मजदूरी का भुगतान भी पहुंचा था। उनका आरोप है कि भुगतान से संबंधित विवाद के बाद ही इस प्रकार की शिकायतें की जा रही हैं। कहा कि ग्राम पंचायत में विकास कार्य नियमित रूप से कराए जा रहे हैं और सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था भी बेहतर बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से भ्रामक जानकारी फैलायी जा रही है।

इधर शिकायतकर्ता ने प्रधान पक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए शौचालय परिसर में जल्दबाजी में डेंटिंग-पेंटिंग कराई गई है। उनका कहना है कि यदि सब कुछ ठीक था तो शिकायत के बाद अचानक मरम्मत और रंगाई-पुताई कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराने की मांग की है। मामले को लेकर गांव में चर्चा का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोप और प्रत्यारोप के बीच सच्चाई सामने लाने के लिए प्रशासन को स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और विकास विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामुदायिक शौचालय की बदहाली के पीछे लापरवाही है या फिर यह मामला आपसी विवाद का परिणाम है।