बस्ती। किटी पार्टी की शौकीन सदर ब्लॉक की एपीओ नेहा गोलहानी के आंतक से ब्लॉक कर्मी ही नहीं, ब्लॉक आवास में रहने वाले भी त्रस्त है। इन पर बीडीओ साहब इतने मेहरबान है, कि इन्हें आवास कालोनी में आवास एलाट कर दिया, जब कि यह मानदेय वाली कर्मी है, इस लिए इन्हें सरकारी आवास देने का कोई प्राविधान नहीं है। फिर भी महिला होने के नाते यह जबरिया सरकारी आवास में रह रही है। यह वही एपीओ हैं, जिन्होंने स्थानांतरित ग्राम विकास अधिकारी समाज कल्याण पूनम चौधरी के मकान का ताला तोड़कर जबरिया कब्जा कर लिया। ऐसा लगता है, कि मानो यह अपने आप को फूलन देवी से कम नहीं समझती, जब चाहती है, महिला आपरेटर फरहत जहां को अपमानित कर देती है, और जब चाहती है, प्रधानों पर पत्रावली पर हस्ताक्षर करने के नाम पर कमीषन मांगने का दबाव बनाती है, जो नहीं देता, उसकी पत्रावली को डस्टबिन में डाल देती। फरहत जहां को इन्होंने इस लिए अपमानित किया, क्यों कि प्रधान और रोजगार सेवक सीधे इनके पास मनरेगा की पत्रावली लेकर चले जाते थे, जिससे मैडम का कमीषन मारा जाता। इसी लिए इन्होंने प्रधानों और रोजगार सेवकों को आदेष दिया कि अगर कोई भी प्रधान या रोजगार सेवक बिना मेरी अनुमति के फरहत जहां के चेंबर में चला गया तो उसकी खैर नही। सदर ब्लॉक में वैसे ही कमीषन को लेकर रह-रहकर बवाल होता रहता है, यह ऐसा ब्लॉक है, जहां के प्रमुख को गंगाजल लेकर यह कसम खानी पड़ी कि वह कोई कमीषन नहीं लेते। यह वही ब्लॉक हैं, जहां पर बीडीओ के आवास पर डीडीओ ने कब्जा कर रखा है। यह वही ब्लाक हैं, जहां पर एक आईएएस मैडम बीडीओ का प्रभार लेने जब गई तो बीडीओ ने कुर्सी छोड़ने से ही मना कर दिया, और कहा कि जब तक उन्हें कुर्सी छोड़ने का आदेष नहीं मिलेगा, तब तक आप को कुर्सी नहीं दूंगा। यह ब्लॉक और इस ब्लॉक के बीडीओ से लेकर सचिव तक जितना अपने काम के लिए नहीं जाने जाते हैं, उतना विवाद के लिए जाने जाते है। जिस ब्लॉक पर कमीषन के विरोध में प्रधान धरना प्रदर्षन करे, उस ब्लॉक में अगर एपीओ नेहा गोलहानी मनमानी करती है, तो कोई नया नहीं करती, यह ब्लॉक मनमानी और कमीषनबाजी के कारण ही चर्चा में रहता है।