गढ़मुक्तेश्वर नगर की बीच आबादी में भारतीय सेना के अस्तबल के अवैध बैनामे कर,बनाने लगे भवन

दैनिक तेजयुग न्यूज़

भारतीय सेना की जमीन खरीदी या बेची नहीं जा सकती है

ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी आपका बुलडोजर कहा छुपा दिया गया है। तीर्थ नगरी गढ़मुक्तेश्वर में भारतीय सेना की जमीन पर अवैध रूप से कब्जे किए जा रहे है। भारतीय सेना के अस्तबल की जमीन खरीदी या बेची नहीं जा सकती है। फिर भी दबंगों ने अवैध रूप से बैनामे कर बेचा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन सेना की जमीन को भी बचा नहीं पाया है। सेना की जमीन पर चुपके चुपके मिलीभगत कर भवन बना रहे है। 

मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद से ही तीर्थ नगरी गढ़ मुक्तेश्वर के विकास की गति दी और साढ़े पांच हजार प्राचीन गंगा मेला को राजकीय मानचित्र पर पहचान दी मेला को राजकीय घोषित किया। गढ़मुक्तेश्वर से विशेष लगाव रहा मगर स्थानीय प्रशासन आपके वसूलों,दावों की हवा निकाल रहा है।

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गढ़मुक्तेश्वर में भारतीय सेना के अस्तबल की जमीन पर देखते ही देखते कब्जे हो गए। सिस्टम और जिम्मेदार सेना की जमीन पर हो रहे कब्जों के खिलाफ आंख,कान मुंह बंद कर देख रहे है। मुख्यमंत्री योगी जी आपने प्रदेश को भय मुक्त समाज और भूमाफियों को सफाया करने का दावा किया था। बड़ी बात हैं कि भारतीय सेना के अस्तबल की सरकारी जमीन बिकती रही और कब्जे  होते रहे सिस्टम आंख मूंदकर बैठा हुआ है। सेना की जमीन पर बिना मानचित्र भवनों का निर्माण हो रहा है।  

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गढ़मुक्तेश्वर नगर की बीच आबादी में भारतीय सेना के अस्तबल को घोड़ा फॉर्म के नाम से जाना जाता है। हापुड़ रोड पर भारतीय सेना का अस्तबल था जिसमें विभिन्न नस्ल के घोड़े तैयार किए जाते थे। भारतीय सेना के अस्तबल की जमीन पर दबंगों की निगाह रही और जमीन पर प्लाटिंग कर बेचने शुरू कर दिए गए। देखते ही देखते भवन बनाए जाने शुरू कर दिए गए, मगर सेना की सरकारी जमीन को बचाने में सिस्टम की लापरवाही साफ तौर पर उजागर हो रही है, जो बाबा योगी के बुलडोजर और भूमाफियों के सफाए की हवा निकाल रहा है।

क्या कहते है अधिकारी=

गढ़मुक्तेश्वर में घोड़ा फॉर्म जिस विभाग का है वहीं सोया हुआ है क्या कर सकते है। अवैध निर्माण कार्य की जांच कराकर कठोर कार्रवाई की जाएगी। 
अमित कात्यान,सचिव एचपीडीए हापुड़