सिंभावली चीनी को डुबोने वाले कोई और नहीं, जिम्मेदार सिस्टम ने किया बर्बाद
गन्ने से चीनी बनाने पर चौतरफा लाभ,एक चीनी मिल से बनाई तीन मिल,किया बर्बाद
ओमप्रकाश गौतम
गढ़मुक्तेश्वर: गन्ने से चीनी बनाने में निकले शीरे से शराब,खोई से गत्ता बनाने के अलावा बिजली बनाई जाने के बाद भी कर्ज में चीनी मिल डूब गई। किसानों के नाम पर गलत तरीके से बैंकों से लिए लोन का कर्ज बढ़ता रहा इतना ही नहीं किसान के गन्ने का बकाया भी नहीं दिया गया जिससे चीनी मिल डिफाल्टर हो गई। सिंभावली चीनी मिल खरीदने के लिए धनाढ्य फैक्ट्री में आकर जायजा ले रहे है। किसान के गन्ने का बकाया भुगतान 200 करोड़ से ज्यादा तथा बैंकों के लोन का कर्ज देने के बाद भी बची धनराशि फैक्ट्री के मालिक को मिल पाएगी।
एक से तीन फैक्ट्री बनी=
सिंभावली चीनी मिल से चिलबरिया तथा हापुड़ के बृजनाथ पूर चीनी मिल यूं ही नहीं बनी। गन्ने की हर वेस्ट भी कारगर लाभकारी है। सिंभावली चीनी मिल देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी नामचीन रही है। सिंभावली चीनी क्वालिटी के लिए जानी मानी जाती है।
धरना प्रदर्शन होते रहे मुश्किल बढ़ती रही=
चीनी मिल और गन्ना किसान एक दूसरे के पूरक है। दो दशक पहले की बात करें तो किसान अपना गन्ना मिल में डालने के लिए गन्ना पर्ची के लिए भटकता रहा। प्रबंध तंत्र गंगा पार के गैर इलाके बाहर से गन्ना लेता रहा। किसान संगठन धरना प्रदर्शन करते थे तो प्रबंध तंत्र प्रदर्शनकारियों को चंदे के रूप में भेंट देते रहे। इतना ही नहीं फैक्ट्री में ठेकेदारी के नाम महीना पहुंचाते रहे जिससे चीनी मिल गर्त की और चली तो बैंकों से किसानों के नाम अनाप शनाप कर्ज ले लिया। शर्म की बात है कि सिंभावली चीनी मिल नीलामी के बाद ही खरीददार ही चलाएगा।
क्या कहते है =
सिंभावली और बृजनाथ पुर चीनी मिल पर किसान के गन्ने का 200 करोड़ से ज्यादा का बकाया भुगतान है। चीनी मिल खरीदने के लिए खरीदार आकर जायजा ले रहे है। फैक्ट्री पर बकायेदारों का भुगतान नीलामी के बाद ही संभव है।
जितेंद्रपाल सिंह
चेयरमैन
सिंभावली सहकारी गन्ना समिति
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