बस्ती। उप निदेशक कृषि पर इतने-इतने गंभीर आरोप लग चुके हैं, कि अगर किसी दूसरे अधिकारी पर लगता तो कब का बुक हो गया होता। लेकिन ठहरे यह कृषि मंत्री के दुलारे, इस लिए इन्हें कोई डर नहीं लगता। हालही में जिला कृषि अधिकारी ने कनिष्ठ सहायक अमन प्रताप सिंह के खिलाफ डीडी को ऐसा कलमतोड़ डीओ लिखा कि अगर कोई दूसरा ईमानदार अधिकारी होता तो उसे सस्पेंड करने में एक मिनट भी नहीं लगता, लेकिन डीडी ठहरे भ्रष्ट और बेईमान इस लिए कार्रवाई के बजाए मोटा लिफाफा ले लिया। यह वही जिला कृषि अधिकारी डा. बाबू राम और लिपिक अमन प्रताप सिंह हैं, जिन्होंने कार्यालय में भ्रष्टाचार का नया रिकार्ड बनाया, जब तक लिपिक साहब के कमाउपूत रहे, तब तक सारे नखड़े बर्दास्त करते रहे, लेकिन जैसे ही इनका तबादला भानपुर हुआ, पैसे ही यह डीओ साहब के दुष्मन बन गए। तभी तो इन्होंने इनके खिलाफ ऐसा डीओ लिखा, जो शायद आज तक किसी डीओ ने नहीं लिखा होगा, कौन सा ऐसा आरोप नहीं जो लिपिक पर न लगाया गया हो, स्पष्टीकरण से भी साहब संतुष्ट नहीं हुए। यह तो डीडी साहब का लिफाफा प्रेम हैं, कि अभी तक लिपिक बचे हुए हैं, वरना कहां फंेका गए होते पता ही नहीं चलता।
जिस लिपिक पर अभिमानी स्वभाव, अनियमित एवं स्वच्छंद राजकीय कार्यशैली, कर्मचारियों सहित अधिकारियों को दोशारोपित करने, राजकीय कार्यो में अवरोध उत्पन्न करने, अनावष्यक पत्राचार करने, अनर्गल प्रलाप करने सुझाव और आदेशों का पालन न करने, अपने नियंत्रक प्राधिकारी को अंदेखा कर स्वहस्ताक्षरित शिकायती पत्र सीधे उच्चाधिकारियों को भेजना और उप निदेशक कार्यालय में तैनात महिला कर्मी शचि वर्मा के प्रकरण का उल्लेख कर बिना किसी ठोस साक्ष्य के विपरीत स्वहस्ताक्षरित पत्राचार किए जाने आरोप लगे हो, और डीओ लिखने के बाद भी अगर डीडी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती तो समझा जा सकता है, कि क्यों नहीं कार्रवाई हो रही है? विशेष नोट में डीओ ने डीडी को लिखा कि प्रकरण में उच्च न्यायालय से प्राप्त स्थगन आदेश से आच्छादित कर्मचारी के संबध में इस स्तर से तथ्य परक विभिन्न पत्राचारों एवं अन्य पत्रों का संदर्भ ग्रहण करने के साथ-साथ राज्य कर्मचारियों/अधिकारियों के संबध में प्रतिपादित नियमानुसार कठोर कार्रवाई किया जाना अतिआवष्यक हैं, ताकि कार्यालय में राजकीय कार्यो के संपादन में सुचिता, अनुशासन एवं कर्मचारी आचरण स्थापित हो सके। अपर निदेशक प्रशासन को भी लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया। जेडीए, कृषि निदेशक, सीडीओ और डीएम को भी इसकी जानकारी पत्रों के जरिए दी गई। डीडी और डीओ कार्यालय में देखा जाए तो हर दिन कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लघंन होता हैं, जेडीए जैसा मंडलीय अधिकारी कार्यालय में बैठका भोजपुरी गाना गाकर रील बनाते हैं, और उसे वायरल भी करते हैं।
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